Khargone News: निजी अस्पताल एसिड अटैक पीड़ित के इलाज से नहीं कर सकते मना, शिविर में बोले न्यायाधीश
द्वितीय जिला न्यायाधीश दीपक चौधरी ने कहा कि जब किसी व्यक्ति पर एसिड अटैक होता है तो उसके आसपास के लोग भी घबरा जाते हैं। लेकिन, पीड़ित व्यक्ति की पीड़ा को कम करने के लिए उसके घाव की साफ पानी से सफाई करना चाहिए, जिससे एसिड की सान्द्रता कम हो जाए।
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मध्य प्रदेश के खरगोन जिले के मंडलेश्वर ब्लॉक में विधिक सेवाओं से आमजन को रूबरू कराने के लिए विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया था। शासकीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र चोली में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से लगाये गए इस शिविर में एसिड अटैक से पीड़ित व्यक्तियों को लेकर जागरूक किया गया। शिविर में द्वितीय जिला न्यायाधीश दीपक चौधरी ने कहा कि जब किसी व्यक्ति पर एसिड अटैक होता है तो उसके आसपास के लोग भी घबरा जाते हैं। लेकिन, पीड़ित व्यक्ति की पीड़ा को कम करने के लिए उसके घाव की साफ पानी से सफाई करना चाहिए, जिससे एसिड की सान्द्रता कम हो जाए। पीड़ित को तुरंत प्राथमिक उपचार के लिए निकट के अस्पताल पहुंचाना चाहिए। घटना स्थल के निकट कोई प्रायवेट अस्पताल है तो पीड़ित को वहां ले जाना चाहिए। कोई भी निजी अस्पताल एसिड पीड़ित का इलाज करने से मना नहीं कर सकता है। उन्होंने कहा कि मानसिक रूप से विकलांग व्यक्ति द्वारा किए गए अपराध पर पहले उसका उपचार कर स्वस्थ्य कराने के बाद ही ट्रायल होता है।
इस दौरान शिविर में मौजूद लीगल डिफेंस काउंसिल सिस्टम के डिप्टी चीफ रूपेश शर्मा ने कहा कि एसिड अटैक से पीड़ित व्यक्ति को जिंदगी भर पीड़ा झेलना पड़ती है। नालसा द्वारा उपचार के लिए और पुनर्वास के लिए सहायता दी जाती है। एसिड अटैक के मुख्य कारण में एकतरफा प्यार में पागल प्रेमी द्वारा ऐसा घातक हमला किया जाता है। एलएडीसीएस की शासकीय अधिवक्ता निशा कौशल ने कहा कि आज कल डिप्रेशन के मामले अधिक देखने में आ रहे हैं। इस कारण लोग मानसिक बीमार हो रहे हैं, जो लोग इस तरह की बीमारी से परेशान है, उन्हें स्वयं को दूसरे कामों में व्यस्त रखना चाहिए। योग प्राणायाम से डिप्रेशन पर नियंत्रण किया जा सकता है। डिप्रेस्ड व्यक्ति को मोबाइल से दूरी बना लेनी चाहिए। क्योंकि मोबाइल पर ऐसे मैसेज वीडियो अधिक मिलते हैं, जिनसे डिप्रेशन वाला व्यक्ति और अधिक परेशान हो जाता है।
कार्यक्रम के दौरान एडव्होकेट कौशल ने विधिक सेवा प्राधिकरण की विभिन्न योजनाओं के बारे में भी बताया। जिसके बाद प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र चोली के चिकित्सा अधिकारी डॉ प्रसन्न जैन ने एसिड अटैक से पीड़ित व्यक्ति के प्राथमिक उपचार की जानकारी देते हुए बताया कि सबसे पहले जिस व्यक्ति पर अटैक हुआ है, उसके घायल अंग पर कम से कम 20 से 25 मिनट तक साफ पानी डालें, जिससे एसिड साफ हो जाए। ज्यादा समय तक लगभग 1 घंटे तक भी पानी डाल सकते हैं। इसके साथ ही उसे किसी निकट के अस्पताल में ले जाएं, जहां उसकी सफाई के बाद टिटेनस का इंजेक्शन जरूर लगवाएं। इस दौरान घाव को साफ कपड़े से ढककर रखना जरूरी है, ताकि इंफेक्शन न फैले। इस कार्यक्रम का संचालन पैरालीगल वालेंटियर दुर्गेश कुमार राजदीप के द्वारा किया गया।
