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महादेव के इस मंदिर में लटकी हजारों घंटियां बता रही हैं कि यहां पूरी हो जाती है मनोकामना

Tue, 13 Feb 2018 04:50 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Updated Tue, 13 Feb 2018 04:50 PM IST
सार

-शिव को छाया देने को पार्वती ने घने वन का रूप धरा
-आज भी विधमान हैं ताड़ के वे सात वृक्ष
-यहां आने पर होती है दिव्य अनुभूति

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Mahashivratri 2018 Parvati took the form of trees
lord shiva, tarkeshwar mahadev, devbhoomi - फोटो : file photo

विस्तार

देवभूमि उत्तराखंड में एक ऐसा अनूठा सिद्धपीठ हैं जहां मनोकामना पूरी होने पर भक्तजन मंदिर प्रांगण में घंटियां बांध देते हैं। सिद्धपीठ में लटकी असंख्य घंटियां बताती हैं कि यहां जो आता है उसकी मनोकामना अवश्य पूरी होती है।
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यह दिव्य सिद्धपीठ गढ़वाल राइफल के मुख्यालय लैंसडौन से लगभग पचास किमी दूर तथा कोटद्वार से करीब पैंसठ किमी की दूरी पर स्थित है।

शिव को छाया देने को पार्वती ने घने वन का रूप धरा
सिद्धपीठ के अवतरण की बड़ी ही दिलचस्प कथा है। इसके अनुसार, ताड़कासुर का वध करने के बाद भगवान शिव ने इस स्थान पर जब विश्राम किया तब माता पार्वती ने देखा कि भगवान शिव को सूर्य की गर्मी लग रही है। माता पार्वती ने स्वयं देवदार के वृक्षों का रूप धरा और भगवान शिव को छाया प्रदान की।
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आज भी विधमान हैं ताड़ के वे सात वृक्ष
मान्यता है कि भगवान शिव मंदिर के प्रांगण में आज भी वे सात ताड़ के पेड़ विराजमान हैं। रामायण में भी ताड़केश्वर का वर्णन एक पवित्र तीर्थ के रूप में मिलता है। यहां बाबा ताड़केश्वर के पास लोग यहां अपनी मनोकामना लेकर आते हैं। और भोलेनाथ अपने भक्तों को कभी निराश नही करते हैं। जब किसी की मनोकामना पूरी होती है तो वे यहां मंदिर में घंटी चढ़ाते हैं। यहां मंदिर में चढ़ाई गई हजारों घंटियां इस बात का प्रमाण हैं कि यहां बाबा की शरण में आने वालों का कल्याण होता है।
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यहां आने पर होती है दिव्य अनुभूति
ताड़केश्वर महादेव ताड़ के विशाल वृक्षों के बीच में स्थित एक ऐसा प्राचीन तथा पौराणिक मंदिर है कि जहां आने मात्र से ही मन को एक अजीब प्रकार का सुकून और राहत मिलती है। यहां पर प्रकृति ने ऐसा वातावरण तथा दृश्यावलि रची हुई हैं कि ऐसा इस जगह के अतिरिक्त और कहीं देखने को नही मिलता है। यहां विशाल ताड़ के वृक्ष तथा हर मौसम में लबालब भरे जलकुण्ड देखकर मन प्रफुल्लित हो जाता है।
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