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Gurjar Movment: महापंचायत में क्यों बंटे गुर्जर, अगले परिसीमन में छिपी है सियासी कहानी; जानें सबकुछ

Mon, 09 Jun 2025 04:45 PM IST
सौरभ भट्ट न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: सौरभ भट्ट Updated Mon, 09 Jun 2025 04:45 PM IST
सार

Gurjar aandolan: राजस्थान में रविवार को एक बार फिर से गुर्जर आरक्षण की धमक सुनाई दी। कर्नल किरोड़ी बैंसला के पुत्र विजय बैंसला ने 17 साल पुरानी आरक्षण की मांग को लेकर महापंचायत बुलाई। लेकिन शाम होते-होते महापंचायत दो फाड़ हो गई।
 

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Gurjar movement: Why are Gurjars divided in Mahapanchayat- story is hidden in the next delimitation
गुर्जर महापंचायत - फोटो : social media

विस्तार

राजस्थान में एक बार फिर से गुर्जर महापंचात की तारीख का ऐलान हुआ है। रविवार को महापंयाचत सरकार से वार्ता के बाद स्थगित कर दी गई। गुर्जर नेता परमाल सिंह ने ऐलान किया है कि 29 जून को दौसा जिले के सिकंदरा में महापंचायत बुलाई जाएगी।
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इन दो मांगों को लेकर होगी महापंचायत
इस बार महापंचायत दो मांगों को लेकर होगी। गुर्जर आंदोलन में शहीद हुए रूप नारायण के बेटे को अनुकंपा नियुक्ति नहीं मिली है। इसे लेकर उनकी पत्नी और बेटै धरने पर बैठे हैं। दूसरी मांग एमबीसी के 372 पदों पर रीट भर्ती में नियुक्ति नहीं किया जाना है। इन दोनों मांगों को लेकर अगली महापंचायत होगी।
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क्यों बंटे गुर्जर?
गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति के संयोजक विजय बैंसला के नेतृतव में गुर्जर समाज की महापंचायत रविवार को पीलूपुरा के कारबारी मांग में बुलाई गई। इस बैठक में सरकार के प्रतिनिधि से बातचीत करने के लिए महापंचायत को स्थगित कर दिया गया। लेकिन महापंचायत में शामिल युवा समझौते के मसौदे से नाराज थे। इसलिए शाम होते-होते महापंचायत दो धड़ों में बंट गई।
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परिसीमन में छिपी है कहानी
हालांकि जानकारों की मानें तो इसके पीछे की वजह सियासी है। दरअसल बयाना एससी सीट है। बयाना 2008 में एससी के लिए रिर्जव हुई थी। इससे पहले यह सामान्य सीट थी। लेकिन गुर्जर बाहुल्य होने की वजह से यहां 1980 से 2003 तक लगातार गुर्जर ही चुनाव जीतते रहे। लेकिन 2028 में होने वाले विधानसभा चुनाव नए परिसीमन के बाद होंगे। जिसमें यह सीट सामान्य के खाते में आनी है।

स्थानीय और बाहरी का पेंच
 इस सीट पर एक बड़ा मुद्दा स्थानीय बनाम बाहरी का भी रहता है। हालांकि ब्रिजेंद्र सिंह सूपा स्थानीय गुर्जर थे और उन्होंने बयाना से कांग्रेस ओर बीजेपी के टिकट पर 2 बार विधानसभा चुनाव जीते थे। लेकिन बीजेपी ने यहां हरियाणा के अंतर सिंह भड़ाना को टिकट दिया ओर वे चुनाव जीत गए। वहीं बसेड़ी के बृजराज सिंह ने भी यहां जनता दल के टिकट पर 2003 में विधानसभा चुनाव जीता। यही वजह है कि इस बार महापंचायत में स्थानीय और बाहरी के मुद्दे का फर्क साफ नजर आया और शायद इसलिए ही महापंचायत का अगला पड़ा पीलूपरा से बदलकर सिकंदरा किया गया है।
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