सावधान! चारधाम तीर्थयात्रियों को बढ़ा इस बीमारी का खतरा
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केदारनाथ धाम में आने वाली तीर्थयात्रियों के लिए बेहतर सुविधाएं न होने के चलते उन्हें बीमारी का खतरा बना हुआ है।
केदारनाथ धाम यात्रा के अंतिम बस्ती पड़ाव गौरीकुंड पर महामारी का खतरा मंडराने लगा है। यात्रा के नाम पर पहुंच रहे हजारों श्रद्धालुओं के लिए उचित व्यवस्था नहीं होने से यहां चारों तरफ गंदगी फैली हुई है।
मंदाकिनी नदी किनारे के पत्थर मल-मूत्र से भरे हुए हैं। बावजूद व्यवस्था में सुधार के लिए पुलिस और प्रशासन द्वारा कोई प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। आपदा के बाद इस वर्ष बाबा केदार की यात्रा से केदारघाटी गुलजार तो हुई।
लेकिन हर कदम पर पसरी अव्यवस्थाएं शासन-प्रशासन का मुंह चिढ़ा रही हैं, जिसका खामियाजा श्रद्धालुओं के साथ स्थानीय लोगों को भी भुगतना पड़ रहा है।
इसकी बांनगी गौरीकुंड में देखी जा सकती है, जहां सड़क, पैदल मार्ग और नालियां गंदगी से भरे हुए हैं। प्लास्टिक कचरा से लेकर मल, मूत्र और अन्य प्रकार की गंदगी से बीमारी का खतरा बढ़ रहा है।
सुलभ द्वारा साफ-सफाई के इंतजाम नाकाफी साबित हो रहे हैं। मंदाकिनी नदी किनारे संरक्षित तप्तकुंड के चारों तरफ भी गंदगी पसरी है। यहां प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु स्नान व आचमन को पहुंच रहे हैं।
बायोडायजेस्ट शौचालय नाकाफी
लेकिन बिखरी गंदगी से वहां पर खड़ा होना भी मुश्किल हो रहा है। वन पंचायत सरपंच पुरुषोत्तम गोस्वामी, व्यापार संघ अध्यक्ष कुलानंद गोस्वामी आदि का कहना है कि प्रशासन की अव्यवस्था के कारण गौरीकुंड पर महामारी का खतरा मंडरा रहा है। अधिकारी यात्रा व्यवस्था को सुधारने के बजाय खानापूर्ति के लिए निरीक्षण तक सिमटे हुए हैं।
बाबा केदार की यात्रा को लेकर गौरीकुंड में प्रतिदिन हजारों की संख्या में यात्री पहुंच रहे हैं। यात्रा तैयारियों के तहत डीडीएमए द्वारा शौचालय व्यवस्था के लिए 8 बायोडायजेस्ट टायलेट बनाए गए हैं, जो उमड़ते सैलाब के लिए नाकाफी हैं।
बताया जा रहा है कि इन सभी टायलेट के चेंबर भर गए हैं, जो रिसाव करने लगे हैं। इसके बाद भी सुध नहीं ली जा रही है। ऐसे हाल में यात्री खुले में शौच के लिए मजबूर हैं, जिस कारण गंदगी बढ़ रही है।
केदारनाथ यात्रा की तैयारियों के नाम पर प्रशासन द्वारा सिर्फ काम चलाऊ व्यवस्था की गई, जिससे हालात गंभीर हो रहे हैं। नदी किनारे से लेकर सड़क व नालियों में गंदगी भरी पड़ी है, जिससे गौरीकुंड में महामारी का खतरा मंडरा रहा है। अगर, इस अव्यवस्था से कुछ भी अनहोनी हुई तो इसके लिए उत्तराखंड सरकार, जिला प्रशासन और पुलिस जिम्मेदार रहेगी।
-- राकेश गोस्वामी, ग्राम प्रधान गौरीकुंड