अब बड़े लोगों के लिए भी उपलब्ध होगी चेचक वैक्सीन की सुविधा
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चिकन पॉक्स (चेचक) फैलने के कई कई कारण है। पहला कारण टीकाकरण में कमी, सम्पूर्ण प्रतिरक्षण के लिए दूसरी डोज न लेना और बड़ी उम्र में इस बीमारी से बचाव के लिए टीका न होना है।
इंडियन एसोसिएशन ऑफ पीडियाट्रिक (आईएपी) लखनऊ की अध्यक्ष डॉ. पियाली भट्टाचार्या और प्रो. पीके मिश्रा ने ये बात भारत में चेचक के बढ़ते प्रकोप पर आयोजित कार्यक्रम में रविवार को कही।
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. संजय निरंजन ने कहा कि चिकन पॉक्स के पीछे वेरिसेला जोस्टर वायरस (वीजेडवी) जिम्मेदार है। ये संक्रमण हवा या फिर बीमारी से प्रभावित मरीज के खांसने-छींकने और उसके संपर्क में आने से फैलता है।
इसके कारण शरीर पर छोटे-छोटे चकत्ते, खुजली करने वाले छाले पड़ जाते हैं। शरीर के बाहर ही नहीं इसकी वजह से पेट, फेफड़े, आंखे और मस्तिष्क भी प्रभावित हो जाता है।
शरीर पर होते हैं छोटे-छोटे चकत्ते व खुजली करने वाले छाले
आईएपी के सचिव डॉ. आशुतोष वर्मा ने बताया कि चिकन पॉक्स ही नहीं अब हार्पीज के मामले भी सामने आ रहे हैं। हार्पीज चिकन पॉक्स का ही एक रूप है जो बड़ी उम्र में सामने आता है।
उन्होंने बताया कि इस बीमारी से बचाव के लिए अब नेक्स्ट जेन वेरिसेला वैक्सीन (चिकन पॉक्स) की जरूरत है, जो 65 वर्ष तक के लोगों को इस बीमारी से बचा सकती है।
अभी तक जो भी वैक्सीन बाजार में उपलब्ध हैं, उनसे 0 से 18 साल के लोगों का प्रतिरक्षण किया जा सकता है। इस मौके पर आवास विकास परिषद के कमिश्नर आरपी सिंह भी मौजूद थे।