{"_id":"598306164f1c1b8a7b8b4658","slug":"a-devotee-traveled-700-km","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"अनोखा भक्त, 255 दिन तक रेंगकर पूरा किया 700 किमी का सफर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अनोखा भक्त, 255 दिन तक रेंगकर पूरा किया 700 किमी का सफर
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Thu, 03 Aug 2017 04:57 PM IST
विज्ञापन
मंदिर में ढोक लगाता भक्त
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
एक ऐसा मंदिर जहां एक भक्त ने जो मुरादें मांगी वो सभी पूरी हो गईं। इसके बाद इस भक्त ने एक अनोखा काम कर दिया। भक्त की आस्था इतनी प्रगाढ़ थी कि उसने मंदिर तक कनक दंडवत देने का फैसला किया।
मामला बाबा रामदेव की समाधी स्थली रामदेवरा का है। टोंक जिले की टोडारायसिंह तहसील के निम्बेडा गांव से अपने पेट के बल रेंगते हुए रामधन रामदेवरा पहुंचा। बाबा का ऐसा ही एक भक्त उनकी नगरी में आया तो लोग देखते ही दंग रह गए।
इस भक्त ने सांप की तरह रेंगकर करीब 700 किमी का सफर तय किया। कई तरह की कठिनाइयों से भरे इस सफर को पूरा करने में उसे 255 दिन का समय लगा। रामधन गत 20 नवम्बर 2016 को अपन गांव से नाक व ठोडी को रगडते हुए दोनों हाथों व पांवों से सडक पर पेट के बल सांप की तरह रेंगते हुए रवाना हुआ।
विज्ञापन
रामदेवरा में भक्तों की आस्था जगजाहिर है। यहां आने वाले बाबा रामदेव में प्रगाढ़ आस्था रखते हैं। कहा जाता है कि यहां चर्म रोग से मुक्ति मिलती है।
विज्ञापन
मामला बाबा रामदेव की समाधी स्थली रामदेवरा का है। टोंक जिले की टोडारायसिंह तहसील के निम्बेडा गांव से अपने पेट के बल रेंगते हुए रामधन रामदेवरा पहुंचा। बाबा का ऐसा ही एक भक्त उनकी नगरी में आया तो लोग देखते ही दंग रह गए।
विज्ञापन
इस भक्त ने सांप की तरह रेंगकर करीब 700 किमी का सफर तय किया। कई तरह की कठिनाइयों से भरे इस सफर को पूरा करने में उसे 255 दिन का समय लगा। रामधन गत 20 नवम्बर 2016 को अपन गांव से नाक व ठोडी को रगडते हुए दोनों हाथों व पांवों से सडक पर पेट के बल सांप की तरह रेंगते हुए रवाना हुआ।
विज्ञापन
रामदेवरा में भक्तों की आस्था जगजाहिर है। यहां आने वाले बाबा रामदेव में प्रगाढ़ आस्था रखते हैं। कहा जाता है कि यहां चर्म रोग से मुक्ति मिलती है।
जानिए किस तरह पूरा किया इतना लम्बा सफर
भक्त के आगे कालीन बिछाते लोग
- फोटो : अमर उजाला
रामधन ने 255 दिनों में अपने मुश्किल सफर को बाबा रामदेव के जयकारों के साथ तय किया। रामधन ने दावा किया कि उसकी आंख की रोशनी व कुष्ठ रोग बाबा के चमत्कार से ही सही हुए हैं। अब रामधन अपने पिता के बेहतर स्वास्थ्य की कामना के लिए यात्रा पर निकला है।
बाबा रामदेव का अनन्य भक्त प्रतिदिन करीबन तीन से चार किलोमीटर का सफर तय करता था। उनके साथ आए पदयात्री श्रद्धालुओं में एक व्यक्ति झाडू से आगे-आगे सड़क की सफाई करता तो दो व्यक्ति आगे से आगे कारपेट बिछाते जिस पर रेंगकर रामधन आगे चलता था।
रास्ते में सर्दी, गर्मी व बारिश के दौरान कई मुश्किलें आई लेकिन रामधन ने हिम्मत नहीं हारी और अपनी मनोकामना पूर्ण होने पर रेंगते हुए बाबा की समाधि पर धोक लगाया।
बाबा रामदेव का अनन्य भक्त प्रतिदिन करीबन तीन से चार किलोमीटर का सफर तय करता था। उनके साथ आए पदयात्री श्रद्धालुओं में एक व्यक्ति झाडू से आगे-आगे सड़क की सफाई करता तो दो व्यक्ति आगे से आगे कारपेट बिछाते जिस पर रेंगकर रामधन आगे चलता था।
रास्ते में सर्दी, गर्मी व बारिश के दौरान कई मुश्किलें आई लेकिन रामधन ने हिम्मत नहीं हारी और अपनी मनोकामना पूर्ण होने पर रेंगते हुए बाबा की समाधि पर धोक लगाया।