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छत्तीसगढ़ की माया ने रचा इतिहास, नक्सल इलाके से पहली आदिवासी बेटी बनेगी डॉक्टर

Sun, 26 Aug 2018 05:22 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रायपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रायपुर Updated Sun, 26 Aug 2018 05:22 AM IST
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tribal girl has become the first from the moist hit region of Dornapal to get medical seat

छत्तीसगढ़ का सुकमा सबसे ज्यादा माओवादी प्रभावित क्षेत्र है। यहां रहने वाली एक आदिवासी लड़की माया कश्यप क्षेत्र की पहली ऐसी लड़की बन गई है जिसे कि मेडिकल में दाखिला का मौका मिला है। वह जब भी पूछती कि आज मास्टरजी आए हैं? तो उसे जवाब में ना ही मिलता था। इसके बावजूद उसने बिना किसी कोचिंग के मेडिकल एग्जाम को पास कर लिया। उसे इस बात का कोई अंदाजा नहीं था कि उसकी एडमिशन फीस कहां से आएगी। दोरनापल की माया ने कहा, 'यह मेरे बचपन का सपना था कि मैं डॉक्टर बनूं। मुझे खुशी है कि मैं इतनी दूर आ पाई।'

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किसी आदिवासी लड़की द्वारा मेडिकल में दाखिला कराना कितनी बड़ी बात है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दोरनापल में केवल 3000 बच्चों ने प्रारंभिक शिक्षा में एडमिशन लिया था। गांव के स्कूल जिसमें कि माया पढ़ती थी वहां बमुश्किल से कोई टीचर दिखाई देता है। मुट्ठीभर बच्चे दसवीं तक जाते और कॉलेज जाना एक कोरा सपना होता है। यह 19 साल की उस लड़की के लिए और ज्यादा मुश्किल था जिसके लिए 9 साल पहले पिता को खोने के बाद जीने के लिए संघर्ष बढ़ गया था।
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माया से जब पूछा गया कि वह अपनी परेशानियों से पार पाकर कैसे कामयाब रही तो उन्होंने कहा मैंने कभी परेशानियों की तरफ ध्यान नहीं दिया। मैंने केवल अपना लक्ष्य देखा। माया को एसटी श्रेणी में 154वीं रैंक मिली है। इस साल नीट में उन्हें 12,315 नंबर मिला था और उन्होंने अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज में मई 2018 को एडमिशन लिया। मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया ने इस कॉलेज के लिए 100 मेडिकल सीटों को मंजूरी दी है।
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माया ने कहा, 'जितना मुझे याद है मैं हमेशा से डॉक्टर बनना चाहती थी। मेरे पिता की मौत के बाद, मेरे लिए पढ़ाई को जारी रखना लगभग नामुमकिन हो गया था। लेकिन मैंने हार नहीं मानी। मैंने अपने सपने को नहीं छोड़ा।' जब उन्होंने नीट क्रैक किया तो उनका परिवार काफी खुश हुआ लेकिन वह उसकी फीस का पैसा जुटाने को लेकर चिंतित थे। उनके भाई अनूप ने अपने दोस्त से और भाभी रत्ना कश्यप ने फीस के लिए रिश्तेदारों से पैसे इकट्ठा किए।


अपने मुशकिल समय को याद करते हुए माया ने कहा, 'मेरी मां मेरे अलावा तीन और भाई-बहनों की देखभाल किया करती थीं। वह सभी भी स्कूल जाते थे। पैसों की कमी की वजह से मुझे नीट की तैयारी करते समय काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा लेकिन उन्होंने मुझे रोका नहीं। मैं अपने क्षेत्र में वापस लौटकर अपने लोगों की सेवा करना चाहती हूं। आतंरिक क्षेत्रों में बुनियादी चिकित्सा सुविधाओं की कमी है।'

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