{"_id":"688dc89e620b2e14950a5ffd","slug":"terror-of-bear-in-surajpur-a-young-man-seriously-injured-in-the-attack-panic-among-villagers-in-chhattisgarh-2025-08-02","type":"story","status":"publish","title_hn":"छत्तीसगढ़: सूरजपुर में भालू का आतंक, हमले में एक युवक गंभीर रूप से घायल, ग्रामीणों में दहशत का माहौल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
छत्तीसगढ़: सूरजपुर में भालू का आतंक, हमले में एक युवक गंभीर रूप से घायल, ग्रामीणों में दहशत का माहौल
Sat, 02 Aug 2025 01:48 PM IST
Digvijay Singh
अमर उजाला नेटवर्क, सूरजपुर
अमर उजाला नेटवर्क, सूरजपुर
Published by: Digvijay Singh
Updated Sat, 02 Aug 2025 01:48 PM IST
सार
सूरजपुर जिले के तमोर पिंगला के ग्राम रमकोला निवासी 40 वर्षीय रामफल जंगल में किसी काम से गया हुआ था। तभी उसका भालू और उसके शावकों से सामना हो गया। इससे पहले की रामफल वहां से भाग पाता भालू ने उसे नोच डाला।
विज्ञापन
भालू
- फोटो : फाइल फोटो
विस्तार
सूरजपुर जिले के तमोर पिंगला के ग्राम रमकोला निवासी 40 वर्षीय रामफल जंगल में किसी काम से गया हुआ था। तभी उसका भालू और उसके शावकों से सामना हो गया। इससे पहले की रामफल वहां से भाग पाता भालू ने उसे नोच डाला। जंगल में रामफल बुरी तरह जख्मी हो गया। इसी बीच आसपास के ग्रामीणों ने जब उसे गंभीर हालत में देखा तो उसे तुरंत उपस्वास्थ्य केंद्र ले गए। हालत नाजुक होने पर उसे प्राथमिक उपचार उपरांत युवक की गंभीर स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें अंबिकापुर रेफर कर दिया। वर्तमान में उनका इलाज अम्बिकापुर के मेडिकल कॉलेज अस्पताल में चल रहा था। उनकी हालत नाजुक होने पर उन्हें रायपुर रेफर किया गया है।
विज्ञापन
ग्रामीणों ने जंगल में गश्त बढ़ाने की मांग
तमोर पिंगला अभ्यारण्य कुल 608.52 वर्ग किलोमीटर में फैला है। जंहा भालू, तेंदुआ, सांभर, हाथी समेत अन्य वन्य जीवों का निवास करते है। इस अभ्यारण्य के आसपास रहने वाले ग्रामीणों को जानवरों का डर बना रहता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जंगल से सटे गांवों में वन्य जीवों का आना-जाना आम हो गया है, उन्होंने वन विभाग से जंगल में गश्त बढ़ाने और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने की मांग की है।
विज्ञापन
ग्रामीणों के बीच इस हादसे से फैल दहशत
इस घटना के बाद रमकोला और आसपास के गांवों में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि तेंदूपत्ता संग्रहण और अन्य कार्यों के लिए जंगल पर उनकी आजीविका निर्भर है, लेकिन ऐसी घटनाएं उनकी जान जोखिम में डाल रही हैं।
विज्ञापन