Basava Raju: 'प्रिय कॉमरेड आप लोग कहीं भी..', नक्सली बसव राजू के डेरे से मिली डायरी; साथियों के लिए लिखा संदेश
नारायणपुर में जवानों को सर्चिंग के दौरान बसव राजू के डेरे से एक डायरी मिली है। इस डायरी में उसने डीआरजी की ताकत और नक्सलियों के डर का जिक्र किया है। उसने अपने नक्सली साथियों को संदेश दिया है।
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नारायणपुर के घने जंगलों में हुई नक्सली पुलिस मुठभेड़ में जवानों ने करीब डेढ़ करोड़ के इनामी नक्सली बसव राजू समेत 27 नक्सलियों को मार गिराया था। वहीं, इस घटना में दो जवान भी बलिदान हो गए। जवानों ने इलाके की सर्चिंग की तो उन्हें बसव राजू के डेरे से एक डायरी मिली। डायरी में डीआरजी जवानों के द्वारा नक्सलियों को खोज कर मार देने की बात लिखी हुई है।
डायरी में लाल रंग के पेन से लिखा, 'प्रिय कॉमरेड आप लोग कहीं भी छिप जाओ डीआरजी जवान आप लोगों को खोज कर मार देंगे।' इस डायरी के मिलने के बाद से एक ओर जहां डीआरजी जवानों के हौसले बुलंद देखे जा रहे हैं। वहीं, नक्सलियों की कंपनी को लगातार भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
बसव राजू: नक्सल आंदोलन का 'थिंक टैंक'
70 वर्षीय नंबाला केशव राव, उर्फ बसव राजू, आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम जिले के जियान्नापेटा गांव के निवासी था। वारंगल के रीजनल इंजीनियरिंग कॉलेज (अब NIT) से बी.टेक की पढ़ाई पूरी करने वाले बसव राजू 1970 के दशक में पीपुल्स वार ग्रुप (PWG) से जुड़ा। 2018 में वे CPI (माओवादी) के महासचिव बना। उसे बम बनाने (विशेष रूप से IED) और गुरिल्ला युद्ध में विशेषज्ञता के लिए जाना जाता था। 1987 में उन्होंने श्रीलंका के LTTE से प्रशिक्षण लिया था। उसके ऊपर एक से डेढ़े करोड़ रुपये का इनाम था।
प्रमुख हमलों के मास्टरमाइंड
बसव राजू कई घातक नक्सली हमलों के सूत्रधार था।
2003: अलीपीरी में तत्कालीन मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू पर बम हमला।
2010: दंतेवाड़ा में 76 सीआरपीएफ जवानों की हत्या।
2013: झीरम घाटी में 27 लोगों की हत्या, जिसमें कांग्रेस नेता शामिल थे।
2019: श्यामगिरी हमले में बीजेपी विधायक भीमा मंडावी की हत्या।
2021: टेकलगुड़ेम में 22 जवानों का नरसंहार।
सरकार और सुरक्षाबलों की प्रतिक्रिया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस सफलता के लिए सुरक्षाबलों को बधाई दी और नक्सलवाद को 31 मार्च 2026 तक खत्म करने की प्रतिबद्धता दोहराई। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इसे 'राष्ट्रीय गौरव का क्षण' करार देते हुए कहा कि बसव राजू की मृत्यु ने नक्सल आंदोलन की 'रीढ़ की हड्डी' तोड़ दी है। उन्होंने छत्तीसगढ़ पुलिस की डीआरजी यूनिट की तारीफ की।
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नक्सल संगठन पर प्रभाव
बसव राजू की मृत्यु से सीपीआई (माओवादी) में नेतृत्व संकट गहरा सकता है। अबूझमाड़, जो कभी नक्सलियों का अभेद्य गढ़ माना जाता था, अब सुरक्षाबलों की पहुंच में है। यह ऑपरेशन हफ्तों की खुफिया जानकारी और रणनीतिक योजना का परिणाम था।
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