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बागेश्वर धाम को शंकराचार्य की नसीहत: अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती बोले- हिंदू राष्ट्र नहीं, रामराज्य की बात करें

Fri, 26 May 2023 02:43 PM IST
मोहनीश श्रीवास्तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, राजनांदगांव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, राजनांदगांव Published by: मोहनीश श्रीवास्तव Updated Fri, 26 May 2023 02:43 PM IST
सार

राजनांदगांव शहर के रामाधीन मार्ग स्थित महेश्वरी भवन में धर्म सभा प्रवचन कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। इसमें शामिल होने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद राजनांदगांव पहुंचे हुए हैं। इसमें आज धर्म सभा और प्रवचन कार्यक्रम का आयोजन  होगा। 
 

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Shankaracharya Avimukteshwaranand on Dhirendra Shastri statement on making Hindu nation in rajnandgon
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती। - फोटो : संवाद

विस्तार

छत्तीसगढ़ दौरे पर पहुंचे शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि, हिंदुत्व की बात करने वाले, हिंदू राष्ट्र की बात न करें। राम राज्य की बात करें। बागेश्वर धाम के संत पंडित धीरेंद्र शास्त्री के हिंदू राष्ट्र बनाने की बात को लेकर पूछे गए सवाल पर शंकराचार्य ने कहा कि, हिंदू राष्ट्र की नहीं, बल्कि रामराज्य की बात करनी चाहिए। भारत को रामराज्य बनाना चाहिए। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती शुक्रवार को राजनांदगांव पहुंचे हुए हैं। वे यहां पर धर्म सभा में शामिल होंगे। 

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इससे पहले उदयाचल भवन में मीडिया से शंकराचार्य ने हिंदू, सनातन, धर्मांतरण सहित कई मुददों पर चर्चा की। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने धर्मांतरण को लेकर कहा कि, ये राजनीतिक हित में हो रहा है और उसका विरोध भी राजनीति के लिए किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि, हिंदुओं के बीच कुछ राजनेता फूट डालने का काम कर रहे हैं। ऐसे राजनेताओं को चुनाव आयोग के द्वारा बैन कर देना चाहिए, ताकि चुनाव ना लड़ सकें। कहा कि, हिंदुत्व का अर्थ, जो हीन को ऊपर उठाए। 
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बंटवारा हुआ है तो पाकिस्तान जाएं
मुस्लिमों को पाकिस्तान जाने के सवाल पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि, मेरे कहने का मतलब यह है की बंटवारा हुआ था, जिसमें बहुत से लोग पाकिस्तान चले गए थे।  बंटवारा हो गया है तो ऐसे लोग अपने हिस्से में चले जाएं। अगर वह बंटवारे को नहीं मानते हैं तो उसे रद्द किया जाए और दोनों को एक कर दिया जाए। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा एक संत ने हमारा विरोध किया। हमारे जगतगुरु बनने के समय। अखाड़ा और संतो ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का विरोध नहीं किया है।

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