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सौतेली मां भी भरण-पोषण की हकदार: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का अहम फैसला- 3 बेटों को हर महीने देने होंगे 9 हजार रुपये

Thu, 27 Aug 2026 05:39 PM IST
अमन कोशले अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर Published by: अमन कोशले Updated Thu, 27 Aug 2026 05:39 PM IST
सार

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि केवल सौतेली मां होने के आधार पर किसी वृद्ध महिला को भरण-पोषण के कानूनी अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता।

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Stepmother also entitled to maintenance: Chhattisgarh High Court's important decision - 3 sons must pay 9,000
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि केवल सौतेली मां होने के आधार पर किसी वृद्ध महिला को भरण-पोषण के कानूनी अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता। अदालत ने फैमिली कोर्ट का फैसला रद्द करते हुए 77 वर्ष की विधवा और निःसंतान महिला को उसके तीन सौतेले बेटों से प्रतिमाह कुल 9 हजार रुपये भरण-पोषण भत्ता दिलाने का आदेश जारी किया है। उच्च न्यायालय के निर्देश के अनुसार तीनों बेटों को 3-3 हजार रुपये की राशि हर महीने देनी होगी, जिसकी शुरुआत सितंबर, 2026 से होगी।
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पीड़ित महिला ने अपनी दयनीय आर्थिक स्थिति और असहाय अवस्था का हवाला देते हुए अपने तीन सौतेले बेटों से हर महीने 20 हजार रुपये भरण-पोषण खर्च दिए जाने की मांग की थी। याचिकाकर्ता महिला का कहना था कि पति के निधन के बाद बेटों ने उसकी देखभाल पूरी तरह बंद कर दी। याचिका में यह भी उल्लेख किया था कि उसने अपने स्त्रीधन तथा पैतृक संपत्ति की सहायता से कृषि भूमि खरीदी थी, परंतु उस जमीन से प्राप्त होने वाली आय में उसे कोई हिस्सा नहीं दिया जा रहा है। इसके बावजूद फैमिली कोर्ट ने याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी थी कि संबंधित पुरुष महिला के सौतेले बेटे हैं।
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निचली अदालत के निर्णय के विरुद्ध याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उच्च न्यायालय ने फैमिली कोर्ट के तर्क को निरस्त कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि कोई सौतेली मां विधवा, निःसंतान और स्वयं अपना भरण-पोषण करने में असमर्थ है, तो वह परिस्थितियों के अनुसार अपने सौतेले बेटों से आर्थिक सहायता पाने की हकदार है। केवल रिश्ते की प्रकृति के आधार पर किसी असहाय महिला को उसके बुनियादी अधिकारों से बेदखल नहीं किया जा सकता।
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फैसले को कानूनी आधार देने के लिए हाईकोर्ट ने सर्वोच्च न्यायालय के कीर्तिकांत डी. वडोदिया बनाम गुजरात राज्य मामले का विशेष रूप से उल्लेख किया। इसी कानूनी सिद्धांत का अनुसरण करते हुए उच्च न्यायालय ने महिला के पक्ष में निर्देश जारी किया। कोर्ट ने व्यवस्था दी कि तीनों बेटों को प्रतिमाह 3-3 हजार रुपये की दर से कुल 9 हजार रुपये का नियमित भुगतान करना होगा।
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