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सहकार भारती का देश में पहला राष्ट्रीय बुनकर अधिवेशन: साव बोले- देश की आर्थिक तरक्की में बुनकरों का बड़ा योगदान

Sat, 23 Aug 2025 05:26 PM IST
रायपुर ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, रायपुर
अमर उजाला ब्यूरो, रायपुर Published by: रायपुर ब्यूरो Updated Sat, 23 Aug 2025 05:26 PM IST
सार

Sahakar Bharati first national weavers convention in Raipur: छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री अरुण साव, सहकारिता मंत्री केदार कश्यप और श्रम मंत्री लखनलाल देवांगन आज राष्ट्रीय बुनकर अधिवेशन के उद्घाटन सत्र में शामिल हुए।

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Sahakar Bharati first national weavers convention in Raipur: weavers contribute to country economic progress
कार्यक्रम को संबोधित करते डिप्टी सीएम अरुण साव

विस्तार

Sahakar Bharati first national weavers convention in Raipur: छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री अरुण साव, सहकारिता मंत्री केदार कश्यप और श्रम मंत्री लखनलाल देवांगन आज राष्ट्रीय बुनकर अधिवेशन के उद्घाटन सत्र में शामिल हुए। सहकार भारती राजधानी रायपुर के जैनम मानस भवन में 23 अगस्त और 24 अगस्त को देश में पहली बार राष्ट्रीय बुनकर अधिवेशन का आयोजन किया गया है। इसमें 28 राज्यों से विभिन्न बुनकर संघों के एक हजार से अधिक प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं।
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उद्घाटन सत्र में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के वीडियो संदेश का प्रसारण किया गया। अपने संदेश में मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ में विभिन्न क्षेत्रों में सहकारिता को मजबूत करने के लिए किए गए कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने अधिवेशन की सफलता के लिए आयोजकों और प्रतिभागियों को अपनी शुभकामनाएं भी दीं। विधायक मोतीलाल साहू, छत्तीसगढ़ अपेक्स बैंक के अध्यक्ष केदार गुप्ता और खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के अध्यक्ष राकेश पाण्डेय उद्घाटन सत्र में शामिल हुए।
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उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने अधिवेशन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि सहकारिता हमारे रग-रग में बसी हुई है। हम सब 'वसुधैव कुटुम्बकम' की भावना से पले-बढ़े हैं। भारत अपने कुटीर उद्योगों और ग्राम उद्योगों की बदौलत लंबे समय तक पूरी दुनिया के लिए 'सोने की चिड़िया' था। उन्होंने कहा कि देश की आर्थिक तरक्की में बुनकरों का बड़ा योगदान है। हमारे बुनकर बड़ी मेहनत और लगन से कपड़ा उद्योग को मजबूती दे रहे हैं। सहकारिता के माध्यम से उनकी आर्थिक और सामाजिक स्थिति को नए आयाम दिए जा सकते हैं। आजीविका के अवसरों को बढ़ाने, देश को आत्मनिर्भर एवं सक्षम बनाने में बुनकर और उनकी सहकार की भावना काफी अहम है।
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सहकारिता मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि यह गर्व का विषय है कि अंतरराष्ट्रीय सहकारिता वर्ष में यह अधिवेशन छत्तीसगढ़ में हो रहा है। सहकार से समृद्धि के तहत राज्य में 54 पहल किए गए हैं जो सीधे-सीधे गांवों, गरीबों व किसानों से जुड़े हुए हैं। उन्होंने बताया कि राज्य में लगभग 20 हजार हाथकरघा कार्यरत हैं जिनके माध्यम से 60 हजार 300 लोगों को रोजगार मिल रहा है। राज्य में 329 पंजीकृत प्राथमिक बुनकर सहकारी समितियां महासंघ से जुड़ी हुई हैं जो सरकारी वस्त्र उत्पादन में सक्रिय हैं। महासंघ द्वारा विभिन्न सरकारी विभागों को स्कूल यूनिफार्म, पुलिस ड्रेस, कंबल, चादर और अन्य प्रकार के कपड़ों की आपूर्ति की जा रही है। बुनकर सहकारी समितियों को सुदृढ़ बनाने के लिए राष्ट्रीय सहकारी नीति से प्रेरणा लेकर छत्तीसगढ़ में भी सहकारी नीति तैयार की जा रही है। श्री कश्यप ने सहकार भारती के पदाधिकारियों को अधिवेशन की सफलता के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि इस अधिवेशन से बुनकरों में जागरूकता बढ़ाने और सहकारिता आंदोलन को गति प्रदान करने में मदद मिलेगी।

उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन ने अधिवेशन को सम्बोधित करते हुए कहा कि बुनकर समाज बड़ी लगन और मेहनत के साथ कार्य करते हैं। बुनकर आदिकाल से बुनकरी के माध्यम से कपड़ा निर्माण का कार्य कर रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में बुनकरों के हित में अच्छे कार्य हो रहे हैं। हमारे छत्तीसगढ़ में बुनकरों के लिए बहुत सारी योजनाएं संचालित हो रही हैं। हमने बुनकरों के सम्मेलन में बुनकरों की मजदूरी बढ़ाने की बात कही थी और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने तत्काल बुनकरों की मजदूरी 20 प्रतिशत बढ़ा दी जिसका 60 हजार लोगों को सीधा लाभ मिल रहा है।

सहकार भारती के राष्ट्रीय महामंत्री दीपक कुमार चौरसिया ने अधिवेशन में कहा कि सहकारिता व्यक्ति के संघर्ष को शक्ति देता है। इससे आर्थिक विकास के साथ ही इंसान को सबल होने का मौका मिलता है। बुनकर परंपरा, संस्कृति और आजीविका को जोड़ता है। देश में करीब ढाई करोड़ लोग प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से इससे जुड़े हुए हैं। इस अधिवेशन से उनकी सामाजिक-आर्थिक चेतना को जगाने का काम होगा। उन्होंने बताया कि भारत से हर वर्ष साढ़े तीन हजार करोड़ रुपए के कपड़ों का निर्यात होता है। इसमें 15 प्रतिशत हिस्सेदारी बुनकरों के काम का है।


सहकार भारती के अध्यक्ष डॉ. उदय जोशी ने अपने संबोधन में कहा कि सहकारिता लोगों का स्थायी आर्थिक विकास करता है। सहकार भारती देश के 28 राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों के 650 जिलों में काम कर रही है। पिछले दो वर्षो में अलग-अलग प्रकोष्ठों द्वारा 12 राष्ट्रीय अधिवेशन आयोजित किए गए हैं। इस अधिवेशन में बुनकरों के लिए राष्ट्रीय एजेंडा तैयार कर सरकार से बात करेंगे। यहां देशभर के अलग-अलग बुनकर संघ अपने कार्यों, समस्याओं और भविष्य के बारे में विचार-विमर्श कर आगे बढ़ने की रणनीति बनाएंगे।
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