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रायपुर: स्टाइपेंड बढ़ाया, पर बाकी मांगों पर अड़े जूनियर डॉक्टर, 28 सितंबर से सभी स्वास्थ्य सेवाएं बंद करेंगे
Fri, 25 Sep 2026 08:31 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रायपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रायपुर
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Fri, 25 Sep 2026 08:31 PM IST
सार
रायपुर में जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल जारी है। सरकार ने एमबीबीएस इंटर्न का स्टाइपेंड बढ़ाकर 25 हजार रुपये किया, लेकिन डॉक्टर 17 सूत्री मांगों में बाकी मांगों पर लिखित आदेश चाहते हैं। एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि समाधान नहीं हुआ तो 28 सितंबर से आपातकालीन सेवाओं समेत सभी स्वास्थ्य सेवाएं बंद की जाएंगी।
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रायपुर में जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
तेज बारिश के बावजूद रायपुर के मेडिकल कॉलेज परिसर में छत्तीसगढ़ जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन की हड़ताल शुक्रवार को भी जारी रही। राज्य सरकार ने एमबीबीएस इंटर्न का स्टाईपेंड बढ़ाकर 25 हजार रुपये प्रति माह करने का औपचारिक आदेश जारी कर दिया है। इसके बावजूद, आंदोलनकारी डॉक्टरों ने अपना प्रदर्शन खत्म करने से मना कर दिया है। डॉक्टरों का कहना है कि उनकी 17 सूत्री मांगों में से शासन ने केवल एक मांग पूरी की है।
मांगों पर ठोस निर्णय न होने के कारण भीमराव आंबेडकर अस्पताल की ओपीडी सेवाएं गंभीर रूप से प्रभावित रहीं। कई विभागों में डॉक्टरों की कुर्सियां पूरी तरह खाली नजर आईं और आम दिनों की तुलना में मरीजों की संख्या भी कम दर्ज की गई। एसोसिएशन ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान में केवल ओपीडी का सांकेतिक बहिष्कार किया जा रहा है। यदि बची हुई मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो 28 सितंबर से आपातकालीन सेवाओं समेत अन्य सभी स्वास्थ्य सुविधाएं बंद कर दी जाएंगी। डॉक्टरों ने साफ कह दिया है कि मांगों का पूर्ण समाधान होने पर ही हड़ताल समाप्त होगी।
लिखित आदेश मिलने तक आंदोलन
कैंसर विभाग के डॉ. विनय कुमार साहू ने बताया कि जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन की ओर से 17 मांगें रखी गई थीं। इनमें से सरकार ने केवल एक मांग स्वीकार की है, शेष मांगों पर कोई आदेश जारी नहीं हुआ है। अधिकारियों ने शाम तक लिखित आदेश जारी करने का आश्वासन दिया था। डॉक्टरों का कहना है कि जब तक सभी मांगों पर लिखित आदेश नहीं मिल जाता, तब तक उनका यह आंदोलन अनवरत जारी रहेगा।
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ये भी पढ़ें- छत्तीसगढ़: आठ हजार से ज्यादा पदों पर होगी भर्ती; रायपुर में इस तारीख से लगेगा दो दिनी राज्य स्तरीय रोजगार मेला
10 जून से ही लागू किया जाए
इंटर्न डॉ. सीमा मिश्रा ने बताया कि मध्य प्रदेश में बढ़ा हुआ वजीफा एक अप्रैल से लागू किया गया था, जबकि छत्तीसगढ़ में जारी आदेश में बढ़ा हुआ वजीफा एक अक्तूबर से लागू करने की बात कही गई है। आंदोलनकारी डॉक्टरों की मांग है कि छत्तीसगढ़ में बढ़ा हुआ वजीफा 10 जून से ही लागू किया जाना चाहिए।
आंदोलन मरीजों के खिलाफ नहीं
मेडिकल कॉलेज परिसर में धरने पर बैठे डॉक्टरों ने स्पष्ट किया कि उनका आंदोलन मरीजों के खिलाफ नहीं है, बल्कि मेडिकल सिस्टम में सुधार और डॉक्टरों की मांगों को लेकर है। इंटर्न डॉक्टर संस्कार ने एक प्रमुख मांग पूरी करने के लिए स्वास्थ्य मंत्री का धन्यवाद व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि बाकी बची मांगें डॉक्टरों और आम जनता दोनों के स्वास्थ्य हित में बेहद महत्वपूर्ण हैं।
बॉन्ड व्यवस्था पर फैसला होना अभी बाकी
डॉ. संस्कार के अनुसार प्रदेश में डॉक्टरों पर लागू बॉन्ड व्यवस्था पर फैसला होना अभी बाकी है। एसोसिएशन की मांग है कि बॉन्ड पूरी तरह समाप्त किया जाए या फिर उसकी अवधि कम की जाए। इसके अतिरिक्त राज्य में लंबे समय से सुपर स्पेशियलिटी कैडर शुरू करने की मांग की जा रही है। इस कैडर के गठित होने से प्रदेश में विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ेगी और गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए मरीजों की दूसरे राज्यों पर निर्भरता कम होगी।
स्वास्थ्य सेवाएं बंद करने की चेतावनी
जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष ने बताया कि फिलहाल डॉक्टरों का आंदोलन प्रदर्शन तक ही सीमित है। इस आंदोलन में रायपुर के साथ-साथ बिलासपुर, अंबिकापुर और जगदलपुर मेडिकल कॉलेजों के रेजिडेंट, इंटर्न, पीजी बॉन्डेड और एमबीबीएस बॉन्डेड डॉक्टर पूर्ण रूप से शामिल हैं।
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मांगों पर ठोस निर्णय न होने के कारण भीमराव आंबेडकर अस्पताल की ओपीडी सेवाएं गंभीर रूप से प्रभावित रहीं। कई विभागों में डॉक्टरों की कुर्सियां पूरी तरह खाली नजर आईं और आम दिनों की तुलना में मरीजों की संख्या भी कम दर्ज की गई। एसोसिएशन ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान में केवल ओपीडी का सांकेतिक बहिष्कार किया जा रहा है। यदि बची हुई मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो 28 सितंबर से आपातकालीन सेवाओं समेत अन्य सभी स्वास्थ्य सुविधाएं बंद कर दी जाएंगी। डॉक्टरों ने साफ कह दिया है कि मांगों का पूर्ण समाधान होने पर ही हड़ताल समाप्त होगी।
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लिखित आदेश मिलने तक आंदोलन
कैंसर विभाग के डॉ. विनय कुमार साहू ने बताया कि जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन की ओर से 17 मांगें रखी गई थीं। इनमें से सरकार ने केवल एक मांग स्वीकार की है, शेष मांगों पर कोई आदेश जारी नहीं हुआ है। अधिकारियों ने शाम तक लिखित आदेश जारी करने का आश्वासन दिया था। डॉक्टरों का कहना है कि जब तक सभी मांगों पर लिखित आदेश नहीं मिल जाता, तब तक उनका यह आंदोलन अनवरत जारी रहेगा।
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10 जून से ही लागू किया जाए
इंटर्न डॉ. सीमा मिश्रा ने बताया कि मध्य प्रदेश में बढ़ा हुआ वजीफा एक अप्रैल से लागू किया गया था, जबकि छत्तीसगढ़ में जारी आदेश में बढ़ा हुआ वजीफा एक अक्तूबर से लागू करने की बात कही गई है। आंदोलनकारी डॉक्टरों की मांग है कि छत्तीसगढ़ में बढ़ा हुआ वजीफा 10 जून से ही लागू किया जाना चाहिए।
आंदोलन मरीजों के खिलाफ नहीं
मेडिकल कॉलेज परिसर में धरने पर बैठे डॉक्टरों ने स्पष्ट किया कि उनका आंदोलन मरीजों के खिलाफ नहीं है, बल्कि मेडिकल सिस्टम में सुधार और डॉक्टरों की मांगों को लेकर है। इंटर्न डॉक्टर संस्कार ने एक प्रमुख मांग पूरी करने के लिए स्वास्थ्य मंत्री का धन्यवाद व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि बाकी बची मांगें डॉक्टरों और आम जनता दोनों के स्वास्थ्य हित में बेहद महत्वपूर्ण हैं।
बॉन्ड व्यवस्था पर फैसला होना अभी बाकी
डॉ. संस्कार के अनुसार प्रदेश में डॉक्टरों पर लागू बॉन्ड व्यवस्था पर फैसला होना अभी बाकी है। एसोसिएशन की मांग है कि बॉन्ड पूरी तरह समाप्त किया जाए या फिर उसकी अवधि कम की जाए। इसके अतिरिक्त राज्य में लंबे समय से सुपर स्पेशियलिटी कैडर शुरू करने की मांग की जा रही है। इस कैडर के गठित होने से प्रदेश में विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ेगी और गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए मरीजों की दूसरे राज्यों पर निर्भरता कम होगी।
स्वास्थ्य सेवाएं बंद करने की चेतावनी
जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष ने बताया कि फिलहाल डॉक्टरों का आंदोलन प्रदर्शन तक ही सीमित है। इस आंदोलन में रायपुर के साथ-साथ बिलासपुर, अंबिकापुर और जगदलपुर मेडिकल कॉलेजों के रेजिडेंट, इंटर्न, पीजी बॉन्डेड और एमबीबीएस बॉन्डेड डॉक्टर पूर्ण रूप से शामिल हैं।