NIA Action: म्यांमार में मानव तस्करी और साइबर ठगी नेटवर्क पर NIA का शिकंजा, बंगाल-छत्तीसगढ़ में छापेमारी
NIA: म्यांमार में भारतीय युवाओं की मानव तस्करी और साइबर ठगी नेटवर्क के मामले में एनआईए ने पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर और छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में छापेमारी की। जांच में नौकरी का झांसा देकर युवाओं को म्यांमार भेजकर साइबर ठगी कराने का खुलासा हुआ।
विस्तार
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने सोमवार को पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ में दो स्थानों पर छापेमारी की। यह कार्रवाई भारतीय नागरिकों की मानव तस्करी कर उन्हें म्यांमार भेजने और साइबर ठगी के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़े मामले में की गई। एनआईए ने पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर और छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में तलाशी अभियान चलाया।
यह कार्रवाई उस चार्जशीट के करीब पांच महीने बाद की गई है, जिसे एनआईए ने फरवरी के मध्य में तीन आरोपियों के खिलाफ दाखिल किया था। इनमें एक फरार संदिग्ध चीनी नागरिक भी शामिल है। जांच के अनुसार भारतीय और विदेशी एजेंट मिलकर म्यांमार से मानव तस्करी और साइबर ठगी का गिरोह चला रहे थे।
चार्जशीट में अंकित कुमार उर्फ अंकित भारद्वाज, इश्तिखार अली उर्फ अली और लीसा को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं तथा प्रवासन अधिनियम (Emigration Act) की धारा 24 के तहत आरोपी बनाया गया है। यह चार्जशीट हरियाणा के पंचकूला स्थित एनआईए की विशेष अदालत में दाखिल की गई थी।
जांच में क्या सामने आया?
एनआईए ने यह मामला हरियाणा पुलिस से अपने हाथ में लिया था। जांच में पता चला कि तीनों आरोपी अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर भारतीय युवाओं को म्यांमार के म्यावाडी (Myawaddy) क्षेत्र में तस्करी कर भेजने में शामिल थे। जांच में यह भी सामने आया कि यह एक सुव्यवस्थित अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क था, जिसमें दलाल और तस्कर भारतीय नागरिकों की बिना लाइसेंस विदेश में भर्ती कराते थे और उन्हें दक्षिण-पूर्व एशिया में अवैध गतिविधियों के लिए भेजते थे।
पढे़ं: कबीरधाम में 24 घंटे में सुलझा अंधा कत्ल, पत्नी और चचेरे भाई निकले हत्यारे; ऐसी रची थी साजिश
एनआईए के अनुसार गिरफ्तार आरोपी अंकित कुमार और इश्तिखार अली भारतीय युवाओं को थाईलैंड में वैध नौकरी दिलाने का झांसा देते थे। इसके बाद उनकी ऑनलाइन इंटरव्यू की व्यवस्था लीसा नामक महिला से कराई जाती थी, जिसे जांच एजेंसी म्यांमार में रह रही एक चीनी नागरिक मानती है। एनआईए ने बताया कि दोनों आरोपियों ने लीसा को असली भर्ती एजेंट के रूप में पेश कर पीड़ितों को भरोसा दिलाया कि उन्हें थाईलैंड में सुरक्षित नौकरी मिलेगी। इसके बाद उन्हें भारत से थाईलैंड और वहां से अवैध रूप से म्यांमार भेजा जाता था।
म्यांमार पहुंचने के बाद पीड़ितों को साइबर ठगी करने वाली कंपनियों में काम करने के लिए मजबूर किया जाता था। उनसे फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल बनवाए जाते थे और अमेरिका, ब्रिटेन तथा कनाडा के लोगों से संपर्क कर उन्हें फर्जी क्रिप्टोकरेंसी ऐप में निवेश करने के लिए बहलाया जाता था। एनआईए के मुताबिक, यदि कोई पीड़ित काम करने से इनकार करता था तो उसे बंधक बनाकर प्रताड़ित किया जाता था और काम जारी रखने के लिए मजबूर किया जाता था। इतना ही नहीं, रिहाई के बदले उनसे भारी रकम भी वसूली जाती थी।