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Chhattisgarh News: अब कॉलेजों में भी कुत्तों की निगरानी करेंगे प्रोफेसर, आदेश जारी
Tue, 16 Dec 2025 04:32 PM IST
अमन कोशले
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
Published by: अमन कोशले
Updated Tue, 16 Dec 2025 04:32 PM IST
सार
छत्तीसगढ़ उच्च शिक्षा विभाग ने कॉलेज और विश्वविद्यालय परिसरों में छात्रों की सुरक्षा को लेकर बड़ा फैसला लिया है। अब शिक्षण कार्य के साथ-साथ कैंपस में घूम रहे आवारा कुत्तों और मवेशियों पर नजर रखना भी कॉलेज प्रशासन की जिम्मेदारी होगी।
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अब कॉलेजों में भी कुत्तों की निगरानी करेंगे प्रोफेसर
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
छत्तीसगढ़ उच्च शिक्षा विभाग ने कॉलेज और विश्वविद्यालय परिसरों में छात्रों की सुरक्षा को लेकर बड़ा फैसला लिया है। अब शिक्षण कार्य के साथ-साथ कैंपस में घूम रहे आवारा कुत्तों और मवेशियों पर नजर रखना भी कॉलेज प्रशासन की जिम्मेदारी होगी। विभाग ने स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए हर कॉलेज में एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने को कहा है, जिसकी जवाबदेही सीधे प्राचार्य पर तय की गई है।
आदेश के अमल को सुनिश्चित करने के लिए नगर निगम और नगरपालिकाएं अपने-अपने क्षेत्र के कॉलेजों से जानकारी जुटा रही हैं। इसके लिए एक तय प्रारूप भेजा गया है, जिसमें कॉलेज प्रशासन को यह बताना होगा कि नोडल अधिकारी कौन है और आवारा जानवरों को लेकर अब तक क्या कदम उठाए गए हैं।
नई व्यवस्था के तहत यदि कॉलेज या विश्वविद्यालय परिसर में आवारा कुत्तों अथवा मवेशियों की मौजूदगी पाई जाती है या किसी प्रकार की अप्रिय घटना होती है, तो उसकी जिम्मेदारी सीधे प्राचार्य और नामित नोडल अधिकारी की होगी। उन्हें नगर निगम या स्थानीय निकाय से संपर्क कर तत्काल समाधान कराना होगा।
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वाट्सएप पर भेजनी होगी रिपोर्ट और फोटो
विभाग की सख्ती का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि राज्य स्तर पर एक अधिकारी को इस पूरी व्यवस्था का प्रभारी बनाया गया है। कॉलेजों को नोडल अधिकारी का नाम और संपर्क नंबर दर्शाने वाला बोर्ड कैंपस में लगाना होगा और उसका फोटो प्रमाण के रूप में उच्च शिक्षा संचालनालय को वाट्सएप के जरिए भेजना अनिवार्य होगा।
कैंपस में नई गाइडलाइन लागू
निर्देशों में साफ किया गया है कि कॉलेज परिसर में खुले में जूठन या खाद्य सामग्री फेंकने पर पूरी तरह रोक रहेगी, क्योंकि इससे जानवर आकर्षित होते हैं। इसके साथ ही बाउंड्रीवॉल की मरम्मत, फर्स्ट-एड बॉक्स की उपलब्धता और छात्रों की सुरक्षा के लिए जरूरी इंतजाम सुनिश्चित करने होंगे। इसके अलावा पशु चिकित्सा विभाग के सहयोग से जागरूकता कार्यशालाएं आयोजित करने और आपात स्थिति के लिए हेल्पलाइन नंबर 1100 का व्यापक प्रचार करने के भी निर्देश दिए गए हैं।
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आदेश के अमल को सुनिश्चित करने के लिए नगर निगम और नगरपालिकाएं अपने-अपने क्षेत्र के कॉलेजों से जानकारी जुटा रही हैं। इसके लिए एक तय प्रारूप भेजा गया है, जिसमें कॉलेज प्रशासन को यह बताना होगा कि नोडल अधिकारी कौन है और आवारा जानवरों को लेकर अब तक क्या कदम उठाए गए हैं।
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नई व्यवस्था के तहत यदि कॉलेज या विश्वविद्यालय परिसर में आवारा कुत्तों अथवा मवेशियों की मौजूदगी पाई जाती है या किसी प्रकार की अप्रिय घटना होती है, तो उसकी जिम्मेदारी सीधे प्राचार्य और नामित नोडल अधिकारी की होगी। उन्हें नगर निगम या स्थानीय निकाय से संपर्क कर तत्काल समाधान कराना होगा।
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वाट्सएप पर भेजनी होगी रिपोर्ट और फोटो
विभाग की सख्ती का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि राज्य स्तर पर एक अधिकारी को इस पूरी व्यवस्था का प्रभारी बनाया गया है। कॉलेजों को नोडल अधिकारी का नाम और संपर्क नंबर दर्शाने वाला बोर्ड कैंपस में लगाना होगा और उसका फोटो प्रमाण के रूप में उच्च शिक्षा संचालनालय को वाट्सएप के जरिए भेजना अनिवार्य होगा।
कैंपस में नई गाइडलाइन लागू
निर्देशों में साफ किया गया है कि कॉलेज परिसर में खुले में जूठन या खाद्य सामग्री फेंकने पर पूरी तरह रोक रहेगी, क्योंकि इससे जानवर आकर्षित होते हैं। इसके साथ ही बाउंड्रीवॉल की मरम्मत, फर्स्ट-एड बॉक्स की उपलब्धता और छात्रों की सुरक्षा के लिए जरूरी इंतजाम सुनिश्चित करने होंगे। इसके अलावा पशु चिकित्सा विभाग के सहयोग से जागरूकता कार्यशालाएं आयोजित करने और आपात स्थिति के लिए हेल्पलाइन नंबर 1100 का व्यापक प्रचार करने के भी निर्देश दिए गए हैं।