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CG: सिस्टम की लापरवाही से नवजात शिशु की मौत, रास्ते में बच्चे को जन्म दिया जन्म, खाट पर लादकर कराया नाला पार
Thu, 11 Sep 2025 11:22 AM IST
अमन कोशले
अमर उजाला नेटवर्क, कांकेर
अमर उजाला नेटवर्क, कांकेर
Published by: अमन कोशले
Updated Thu, 11 Sep 2025 11:22 AM IST
सार
छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले से दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां स्वास्थ्य विभाग और प्रशासनिक उदासीनता ने एक नवजात की जान ले ली।
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परिजनों ने महिला और नवजात को खाट पर लादकर नाला पार कराया
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले से दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां स्वास्थ्य विभाग और प्रशासनिक उदासीनता ने एक नवजात की जान ले ली। जिले के अंजाड़ी गांव की रहने वाली महिला जानो बाई को अचानक प्रसव पीड़ा हुई। परिजनों और ग्रामीणों ने तुरंत महतारी 102 एम्बुलेंस को फोन किया, लेकिन बरसात के मौसम में नाले में पानी भरे होने के कारण वाहन गांव तक नहीं पहुंच सका।
मजबूरी में परिजनों ने महिला को प्राइवेट वाहन से अस्पताल ले जाने की कोशिश की। लेकिन रास्ते में ही महिला ने बच्चे को जन्म दे दिया। जब तक परिजन और ग्रामीण महिला व नवजात को खाट पर लादकर नाला पार कर दूसरी ओर खड़ी एम्बुलेंस तक ले गए, तब तक देर हो चुकी थी।
एम्बुलेंस में इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन (EMT) मौजूद नहीं था, जो मौके पर बच्चे को प्राथमिक चिकित्सा दे सकता। पखांजूर अस्पताल पहुँचने पर डॉक्टरों ने बच्चे को मृत घोषित कर दिया। वहीं, प्रसव पीड़ा से गुज़री महिला का इलाज अस्पताल में जारी है।
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यह घटना एक बार फिर सिस्टम की नाकामी को उजागर करती है। सवाल उठता है कि ग्रामीण और अंदरूनी इलाकों के लोग कब तक लापरवाही की कीमत अपनी जान देकर चुकाते रहेंगे? यह कोई पहला मामला नहीं है। ऐसे हालात में आए दिन ग्रामीण इलाकों में लोग स्वास्थ्य सुविधाओं और अधूरी सड़क-पुल निर्माण योजनाओं की वजह से परेशान होते हैं।
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मजबूरी में परिजनों ने महिला को प्राइवेट वाहन से अस्पताल ले जाने की कोशिश की। लेकिन रास्ते में ही महिला ने बच्चे को जन्म दे दिया। जब तक परिजन और ग्रामीण महिला व नवजात को खाट पर लादकर नाला पार कर दूसरी ओर खड़ी एम्बुलेंस तक ले गए, तब तक देर हो चुकी थी।
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एम्बुलेंस में इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन (EMT) मौजूद नहीं था, जो मौके पर बच्चे को प्राथमिक चिकित्सा दे सकता। पखांजूर अस्पताल पहुँचने पर डॉक्टरों ने बच्चे को मृत घोषित कर दिया। वहीं, प्रसव पीड़ा से गुज़री महिला का इलाज अस्पताल में जारी है।
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यह घटना एक बार फिर सिस्टम की नाकामी को उजागर करती है। सवाल उठता है कि ग्रामीण और अंदरूनी इलाकों के लोग कब तक लापरवाही की कीमत अपनी जान देकर चुकाते रहेंगे? यह कोई पहला मामला नहीं है। ऐसे हालात में आए दिन ग्रामीण इलाकों में लोग स्वास्थ्य सुविधाओं और अधूरी सड़क-पुल निर्माण योजनाओं की वजह से परेशान होते हैं।