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Korba: SECL कुसमुंडा में भूविस्थापितों का हल्लाबोल, घंटों थमे मशीनों के पहिए, रोजगार के आश्वासन पर खत्म आंदोलन

Wed, 06 May 2026 08:16 PM IST
कोरबा ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, कोरबा
अमर उजाला नेटवर्क, कोरबा Published by: कोरबा ब्यूरो Updated Wed, 06 May 2026 08:16 PM IST
सार

कोरबा में साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) के कुसमुंडा क्षेत्र में बुधवार को भूविस्थापितों ने अपनी मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया।

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Land Displaced Persons Stage Protest at SECL Kusmunda Machinery Grinds to a Halt for Hours Agitation Ends Foll
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विस्तार

कोरबा में साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) के कुसमुंडा क्षेत्र में बुधवार को भूविस्थापितों ने अपनी मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। पूर्व घोषित कार्यक्रम के तहत सुबह 8 बजे से प्रदर्शनकारियों ने खदान में कोयला खनन और परिवहन कार्य में लगी मशीनों को रोक दिया। करीब 5 घंटे तक चले चक्काजाम और उग्र प्रदर्शन के बाद प्रबंधन के ठोस आश्वासन पर दोपहर 1 बजे आंदोलन स्थगित कर दिया गया।

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भूविस्थापितों ने प्रबंधन के सामने 4 प्रमुख मांगें रखीं। पहली मांग अर्जन के बाद जन्मे परिवार के सदस्यों के लिए रोजगार और पुनर्वास की स्पष्ट नीति बनाने की थी। दूसरी मांग वर्षों से लंबित पड़े पुराने प्रकरणों के तत्काल निपटारे की रही। तीसरी मांग बलरामपुर, दुरपा और अन्य प्रभावित क्षेत्रों में हो रहे अवैध कब्जों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की थी। चौथी मांग खदान में संचालित आउटसोर्सिंग कार्यों में स्थानीय भूविस्थापितों को प्राथमिकता देने की थी। आंदोलन की उग्रता को देखते हुए कुसमुंडा प्रबंधन के अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से चर्चा की। वार्ता में प्रबंधन ने भूविस्थापितों की मांगों को जायज माना। प्रबंधन ने आश्वासन दिया कि 5 दिनों के भीतर बिलासपुर CMD स्तर पर उच्च स्तरीय बैठक बुलाई जाएगी, जिसमें नीतिगत समस्याओं का स्थायी समाधान निकाला जाएगा।
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प्रबंधन ने कोयला और मिट्टी उत्खनन कार्य में लगी आउटसोर्सिंग कंपनियों में 15 भूविस्थापितों को स्थायी रोजगार देने की मांग पर मुहर लगा दी है। एक सप्ताह के भीतर इन्हें काम पर रखने की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। आंदोलन का नेतृत्व कर रहीं गोमती केवट ने कहा, “यह हमारे हक की लड़ाई है। प्रबंधन ने 5 दिनों के भीतर CMD स्तर की बैठक और 15 विस्थापितों को तत्काल रोजगार देने का भरोसा दिया है। यदि समय सीमा में वादे पूरे नहीं हुए तो आंदोलन और उग्र होगा। प्रबंधन के ठोस आश्वासन और सकारात्मक रुख के बाद दोपहर 1 बजे भूविस्थापितों ने खदान का काम सुचारू रूप से चलने दिया और धरना समाप्त कर दिया। 5 घंटे उत्पादन ठप रहने से कंपनी को लाखों का नुकसान होने का अनुमान है।

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