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Chhattisgarh News: जशपुर के किसान लिख रहे खेती की नई सफलता की कहानी, अब सेब उत्पादन से बढ़ी पहचान
Sat, 23 May 2026 06:36 PM IST
अमन कोशले
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
Published by: अमन कोशले
Updated Sat, 23 May 2026 06:36 PM IST
सार
छत्तीसगढ़ का जशपुर जिला अब केवल पारंपरिक खेती तक सीमित नहीं रहा। यहां के किसान आधुनिक उद्यानिकी और नकदी फसलों की खेती कर अपनी अलग पहचान बना रहे हैं।
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जशपुर के किसान लिख रहे खेती की नई सफलता की कहानी
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
छत्तीसगढ़ का जशपुर जिला अब केवल पारंपरिक खेती तक सीमित नहीं रहा। यहां के किसान आधुनिक उद्यानिकी और नकदी फसलों की खेती कर अपनी अलग पहचान बना रहे हैं। चाय, नाशपाती, लीची और स्ट्रॉबेरी के बाद अब बड़ी संख्या में किसान सेब की खेती की ओर भी तेजी से बढ़ रहे हैं। बेहतर मौसम, तकनीकी मार्गदर्शन और सरकारी सहयोग की बदौलत जिले में फलोत्पादन का दायरा लगातार बढ़ रहा है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के प्रोत्साहन और जिला प्रशासन, नाबार्ड तथा उद्यानिकी विभाग के संयुक्त प्रयासों से किसानों को नई फसलों के लिए प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता दी जा रही है। इसका असर यह हुआ कि पिछले कुछ वर्षों में किसानों ने पारंपरिक फसलों के साथ उद्यानिकी खेती को भी आय का मजबूत जरिया बना लिया है।
जशपुर में तेजी से बढ़ी सेब की खेती
जिले में वर्ष 2023 से सेब उत्पादन की शुरुआत हुई थी, जो अब तेजी से विस्तार ले चुका है। वर्तमान में लगभग 410 एकड़ क्षेत्र में सेब की खेती हो रही है और 410 से अधिक किसान इससे जुड़े हैं। मनोर, बगीचा, शैला, छतौरी, करदना और छिछली जैसे क्षेत्रों में लगाए गए सेब के पौधों ने इस बार अच्छी गुणवत्ता के फल दिए हैं। किसानों का दावा है कि जशपुर में पैदा हो रहे सेब स्वाद और गुणवत्ता के मामले में हिमाचल और कश्मीर के सेबों को टक्कर दे रहे हैं।
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नाशपाती उत्पादन से किसानों की बढ़ी आय
जशपुर जिले में नाशपाती की खेती भी बड़े पैमाने पर हो रही है। करीब 3500 एकड़ क्षेत्र में नाशपाती के बाग तैयार किए गए हैं और हजारों किसान इससे जुड़े हुए हैं। जिले से हर साल बड़ी मात्रा में नाशपाती दिल्ली, उत्तर प्रदेश और ओडिशा जैसे राज्यों में भेजी जा रही है। किसानों को इससे प्रति एकड़ एक से डेढ़ लाख रुपए तक की आमदनी हो रही है।
किसानों को मिल रहा प्रशिक्षण और बाजार सहयोग
उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों के अनुसार राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत किसानों को आधुनिक खेती, पौध संरक्षण, तकनीकी प्रशिक्षण और बाजार उपलब्ध कराने में मदद की जा रही है। इससे किसान आर्थिक रूप से मजबूत हो रहे हैं और खेती में विविधता बढ़ रही है।
चाय से लेकर फल उत्पादन तक बना नया मॉडल
जशपुर पहले से ही चाय उत्पादन के लिए प्रसिद्ध रहा है। अब सेब और नाशपाती जैसी फसलों की सफलता ने जिले को फलोत्पादन के नए केंद्र के रूप में पहचान दिलाई है। प्रशासन आने वाले समय में इन फसलों के रकबे को और बढ़ाने की तैयारी में है, जिससे किसानों की आय में और वृद्धि हो सके।
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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के प्रोत्साहन और जिला प्रशासन, नाबार्ड तथा उद्यानिकी विभाग के संयुक्त प्रयासों से किसानों को नई फसलों के लिए प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता दी जा रही है। इसका असर यह हुआ कि पिछले कुछ वर्षों में किसानों ने पारंपरिक फसलों के साथ उद्यानिकी खेती को भी आय का मजबूत जरिया बना लिया है।
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जशपुर में तेजी से बढ़ी सेब की खेती
जिले में वर्ष 2023 से सेब उत्पादन की शुरुआत हुई थी, जो अब तेजी से विस्तार ले चुका है। वर्तमान में लगभग 410 एकड़ क्षेत्र में सेब की खेती हो रही है और 410 से अधिक किसान इससे जुड़े हैं। मनोर, बगीचा, शैला, छतौरी, करदना और छिछली जैसे क्षेत्रों में लगाए गए सेब के पौधों ने इस बार अच्छी गुणवत्ता के फल दिए हैं। किसानों का दावा है कि जशपुर में पैदा हो रहे सेब स्वाद और गुणवत्ता के मामले में हिमाचल और कश्मीर के सेबों को टक्कर दे रहे हैं।
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नाशपाती उत्पादन से किसानों की बढ़ी आय
जशपुर जिले में नाशपाती की खेती भी बड़े पैमाने पर हो रही है। करीब 3500 एकड़ क्षेत्र में नाशपाती के बाग तैयार किए गए हैं और हजारों किसान इससे जुड़े हुए हैं। जिले से हर साल बड़ी मात्रा में नाशपाती दिल्ली, उत्तर प्रदेश और ओडिशा जैसे राज्यों में भेजी जा रही है। किसानों को इससे प्रति एकड़ एक से डेढ़ लाख रुपए तक की आमदनी हो रही है।
किसानों को मिल रहा प्रशिक्षण और बाजार सहयोग
उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों के अनुसार राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत किसानों को आधुनिक खेती, पौध संरक्षण, तकनीकी प्रशिक्षण और बाजार उपलब्ध कराने में मदद की जा रही है। इससे किसान आर्थिक रूप से मजबूत हो रहे हैं और खेती में विविधता बढ़ रही है।
चाय से लेकर फल उत्पादन तक बना नया मॉडल
जशपुर पहले से ही चाय उत्पादन के लिए प्रसिद्ध रहा है। अब सेब और नाशपाती जैसी फसलों की सफलता ने जिले को फलोत्पादन के नए केंद्र के रूप में पहचान दिलाई है। प्रशासन आने वाले समय में इन फसलों के रकबे को और बढ़ाने की तैयारी में है, जिससे किसानों की आय में और वृद्धि हो सके।