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बस्तर का वेस्ट टू बेस्ट: बेकार छिंद के बीजों से निकली कैफीन फ्री हर्बल कॉफी, प्रदेश में चर्चा- कौन है ये युवा?

Sat, 09 May 2026 06:50 PM IST
अनुज कुमार अमर उजाला नेटवर्क, जगदलपुर
अमर उजाला नेटवर्क, जगदलपुर Published by: अनुज कुमार Updated Sat, 09 May 2026 06:50 PM IST
सार

दंतेवाड़ा के युवा उद्यमी विशाल हालदार ने बस्तर में बेकार समझे जाने वाले छिंद के बीजों से कैफीन मुक्त हर्बल कॉफी तैयार कर नई क्रांति शुरू कर दी है। इस नवाचार को इनोवेशन महाकुंभ में प्रथम स्थान मिला, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सम्मानित भी किया।

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Vishal Haldar Innovation Caffeine-Free Herbal Coffee Made from Bastar's Chhind Seeds
युवा उद्यमी विशाल हालदार को सीएम साय सम्मान देते - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बस्तर में छिंद के व्यर्थ समझे जाने वाले बीजों से अब कैफीन मुक्त हर्बल कॉफी तैयार की जा रही है। दंतेवाड़ा जिले के बचेली निवासी युवा उद्यमी विशाल हालदार ने यह अभिनव प्रयोग किया है। यह पहल बस्तर के लिए एक नई और सुगंधित पहचान बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। जिसकी चर्चा पूरे प्रदेश में हो रही है।

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इनोवेशन महाकुंभ में मिला पहला स्थान
बीकॉम और सॉफ्टवेयर विकास की शिक्षा प्राप्त विशाल ने दो वर्षों के गहन शोध से यह कॉफी विकसित की है। उनका उद्देश्य प्राकृतिक संसाधनों का सदुपयोग करना और कैफीन के दुष्प्रभावों से बचने वालों को स्वस्थ विकल्प देना है। इस नवाचार को इनोवेशन महाकुंभ में प्रथम स्थान मिला। 

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सीएम साय ने किया सम्मानित
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने विशाल को सम्मानित किया। इस हर्बल कॉफी में छिंद के प्राकृतिक गुणों के कारण प्रचुर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट्स हैं। यह पूरी तरह से कैफीन मुक्त है। विशाल का मानना है कि लोग कॉफी स्वाद और आदत के लिए पीते हैं, मानसिक सक्रियता के लिए नहीं। शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय जगदलपुर में आयोजित इनोवेशन महाकुंभ में उन्होंने अपना मंडप लगाया। वित्त मंत्री ओपी चौधरी और प्रोफेसरों ने इसकी खूब सराहना की।

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रोजगार और उद्यमिता को बढ़ावा
विशाल केवल एक उत्पाद बनाने तक सीमित नहीं हैं। वे दंतेवाड़ा जिला प्रशासन के यूथ अप संस्था के माध्यम से स्थानीय युवाओं को उद्यमिता के लिए प्रेरित कर रहे हैं। उनका लक्ष्य बस्तर के ग्रामीणों को रोजगार दिलाना है। वे चाहते हैं कि गांवों और जंगल से मिलने वाले छिंद के बीजों से उन्हें अतिरिक्त आय प्राप्त हो।

यह परियोजना अभी परीक्षण और विकास के दौर में है। इसका आधिकारिक शुभारंभ होना बाकी है। विशाल के इस अटूट प्रयास ने साबित किया है कि स्थानीय व्यर्थ सामग्री को भी वैश्विक स्तर के उत्कृष्ट उत्पाद में बदला जा सकता है। आने वाले समय में यह हर्बल कॉफी बस्तर की पहचान बन सकती है। यह स्वास्थ्य के प्रति जागरूक दुनिया के लिए एक अनूठा उपहार भी साबित हो सकती है।

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