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Jagdalpur: 'मरने के बाद मेरे शरीर को मेकाज को सौंपना', परिजनों ने पूरी की पिता की अंतिम इच्छा
Wed, 02 Apr 2025 04:40 PM IST
Digvijay Singh
अमर उजाला नेटवर्क, जगदलपुर
अमर उजाला नेटवर्क, जगदलपुर
Published by: Digvijay Singh
Updated Wed, 02 Apr 2025 04:40 PM IST
सार
जगदलपुर में शहर के धरमपुरा नंबर 3 में रहने वाले बुजुर्ग ने अपनी अंतिम इच्छा बताते हुए अपने बेटे व बेटियों से कहा था कि अगर मेरी आत्मा को शांति देना चाहते हो तो मेरे शव को मेकाज के छात्रों को सौप देना।
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सुपर्ण सांतरा का देहदान
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
जगदलपुर में शहर के धरमपुरा नंबर 3 में रहने वाले बुजुर्ग ने अपनी अंतिम इच्छा बताते हुए अपने बेटे व बेटियों से कहा था कि अगर मेरी आत्मा को शांति देना चाहते हो तो मेरे शव को मेकाज के छात्रों को सौप देना, जिससे कि मेरा पार्थिव देह से सीखने को बहुत कुछ मिलेगा। इस बात को सांतरा परिवार के सुगंधा, सृष्टि व पलाश ने बुधवार को अपने पिता सुपर्ण के पार्थिव शरीर को एनाटॉमी विभाग को सौपने से पहले बताया।
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बताया जा रहा है कि धरमपुरा नंबर 3 में रहने वाले सुपर्ण सांतरा अपने घर मे एक आटा चक्की चलाने का काम करते थे, इसी चक्की से अपने दोनों बेटी व बेटे की पढ़ाई करवाई, बेटी सुगंधा, सृष्टि व पलाश ने बताया कि पिता जब भी बातें करते तो हमेशा इसी बात को लेकर मलाल था कि वे अपने देहदान का फार्म नही भर पाए थे। लेकिन उनकी इच्छा थी कि मेरी मौत के बाद मेरे शव को मेडिकल कॉलेज डिमरापाल के छात्रों को सौप देना, जिससे कि उनके शव से छात्र पढ़ाई कर सकेंगे। वास्तव में देखा जाए तो मेरी आत्मा को तभी शांति मिलेगी जब मेरे शव का अंतिम संस्कार ना करते हुए मेकाज के एनाटॉमी विभाग को सौपा जाए, पिता के इस बातों को बच्चों ने अपने दिमाग में बैठाकर रखा था, जहाँ मंगलवार को सुपर्ण की इलाज के दौरान विशाखापत्तनम में निधन हो गया, निधन के बाद बुधवार की सुबह परिजन जगदलपुर पहुँचे, जहाँ मेकाज के डॉक्टरों से चर्चा करने के बाद पूरे सम्मान के साथ पिता के शव को मेकाज को सौपा गया,
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2 माह पहले डॉक्टर का हुआ था देहदान
देखा जाए तो 2 माह पहले 24 जनवरी को इंदिरा वार्ड में रहने वाले आयुवैदिक डॉक्टर मोहन लाल गर्ग 72 वर्ष के पार्थिव शरीर को परिजनों ने मेकाज के सौप दिया था।
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