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CG Election: विधानसभा चुनाव में बिल्हा विधानसभा की अहम भूमिका, जानें क्या है इतिहास और किसका है कब्जा

Thu, 12 Oct 2023 01:48 PM IST
श्याम जी. अमर उजाला नेटवर्क, बिलासपुर (छत्तीसगढ़)
अमर उजाला नेटवर्क, बिलासपुर (छत्तीसगढ़) Published by: श्याम जी. Updated Thu, 12 Oct 2023 01:48 PM IST
सार

बिल्हा विधानसभा प्रदेश के हाईप्रोफाइल सीटों में से एक है। यहां बीते कई कार्यकाल से भाजपा के दिग्गज नेता धरमलाल कौशिक चुनाव लड़ते आए हैं। वर्तमान में भी इस सीट पर भाजपा का ही कब्जा है।
 

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Important role of Bilha Assembly in Chhattisgarh Assembly Elections 2023
बिल्हा नगर पंचायत कार्यालय - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बिलासपुर जिले की बिल्हा विधानसभा सीट प्रदेश के लिए बेहद महत्वपूर्ण सीट माना जाती है। बिल्हा विधानसभा प्रदेश के हाईप्रोफाइल सीटों में से एक है। यहां बीते कई कार्यकाल से भाजपा के दिग्गज नेता धरमलाल कौशिक चुनाव लड़ते आए हैं। वर्तमान में भी इस सीट पर भाजपा का ही कब्जा है। भाजपा के दिग्गज नेता धरमलाल कौशिक यहां से विधायक हैं और इस बार भी पार्टी ने उनके ऊपर भरोसा जताया है।

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विधायक रहते हुए धरमलाल कौशिक विधानसभा अध्यक्ष, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। लेकिन बिल्हा विधानसभा सीट की एक तासीर ये भी है कि यहां की जनता दोनों प्रमुख दल कांग्रेस और भाजपा को बराबर मौका देती है। यहां भाजपा और कांग्रेस ने दोनों ने ही राज किया है। बिल्हा विधानसभा दो जिलों का सीमावर्ती विधानसभा क्षेत्र है। बिलासपुर के शहरी और ग्रामीण क्षेत्र के साथ मुंगेली जिले का पथरिया और सरगांव ब्लॉक का इलाका भी इसी विधानसभा में आता है।
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बिल्हा में मतदाता
बिल्हा विधानसभा में कुल 305982 मतदाता हैं। इनमें से 151943 महिला और 154027 पुरुष मतदाता हैं। वहीं, 8905 युवा मतदाता हैं, जिनकी उम्र 18 से 19 साल है। बिल्हा विधासभा में कुल आबादी करीब साढ़े चार लाख है। एससी और आदिवासी वोटर्स की यहां बड़ी मौजूदगी है। यह ओबीसी बाहुल विधानसभा है। इसमें करीब 45 फीसदी ओबीसी वर्ग के वोटर्स हैं। जिसमें कुर्मी, साहू, लोधी और यादव शामिल हैं। वहीं, करीब 25 फीसदी हरिजन व आदिवासी और 30 फीसदी ठाकुर-ब्राह्मण वोटर हैं। 
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राजनीतिक इतिहास
1962 से 1985 तक लगातार कांग्रेस के चित्रकांत जायसवाल ने यहां पर पार्टी का झंडा बुलंद किया, लेकिन 1990 में अशोक राव ने कांग्रेस से बगावत की और जनता दल की टिकट पर चुनाव लड़कर यहां कांग्रेस के चित्रकांत जायसवाल को मात दी। हालांकि 1993 में अशोक राव दोबारा कांग्रेस में शामिल हो गए और बीजेपी के धरमलाल कौशिक को हराया। 1998 में पहली बार यहां से धरमलाल कौशिक ने बीजेपी का झंडा बुलंद किया, लेकिन 2003 में वे अपनी सीट बचाने में नाकाम रहे। उन्हें कांग्रेस के सियाराम कौशिक ने मात दी। 

2008 में धरमलाल कौशिक ने सियाराम कौशिक को फिर से मात दी। 2013 में एक बार फिर कांग्रेस ने सियाराम कौशिक पर भरोसा जताया और वो विधानसभा अध्यक्ष धरमलाल कौशिक को हराने में सफल हुए। इस चुनाव में बीजेपी को जहां 72,630 वोट मिले तो कांग्रेस को 83,598 वोट मिले। इस तरह जीत का अंतर 10,968 वोटों का रहा।

2018 के चुनाव में बदले समीकरण
2018 के चुनाव में फिर समीकरण बदले। कांग्रेस का दामन छोड़कर सियाराम कौशिक जोगी कांग्रेस से चुनाव मैदान में उतरे, जिसके जवाब में कांग्रेस ने राजेंद्र शुक्ला को अपना प्रत्याशी बनाया। त्रिकोणीय मुकाबले में भाजपा के धरमलाल कौशिक एक बार फिर कांग्रेस और जोगी कांग्रेस को शिकस्त देने में कामयाब हो गए। बीजेपी के धरमलाल कौशिक को 84,431 वोट मिले। वहीं, कांग्रेस के राजेंद्र शुक्ला को 57,907 वोट मिले। पूर्व विधायक व जोगी कांग्रेस प्रत्याशी सियाराम कौशिक करीब 31 हजार वोटों के साथ तीसरे नंबर पर रहे। इस जीत के बाद भी प्रदेश में भाजपा के हार का ठीकरा तब भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रहे धरमलाल कौशिक पर भी फूटा। हालंकि, इसके बाद भी धरमलाल कौशिक को पार्टी में बड़ी जिम्मेदारी मिली। धरमलाल कौशिक बतौर नेता प्रतिपक्ष मोर्चा संभाला। धरमलाल कौशिक को डॉ. रमन सिंह का करीबी और विश्वस्त माना जाता है।

बिल्हा विधानसभा के सियासी तासीर के साथ यहां कई ज्वलंत मुद्दे भी हैं। बिल्हा विधानसभा में पिछड़े आदिवासी गांव हैं तो चमचमाती सड़कों और शॉपिंग कॉम्प्लेक्स वाले शहरी क्षेत्र भी यहां मौजूद हैं। यहां सिरगिट्टी, तिफरा जैसे औद्योगिक इलाके हैं तो यदुनंदन नगर से लेकर चकरभाठा तक कई बड़ी कॉलोनियां भी हैं।  बिलासपुर नगर निगम के कुछ वार्ड भी बिल्हा विधानसभा में आते हैं।


आप ने भी घोषित किया प्रत्याशी
सीमावर्ती मुंगेली जिले का पथरिया, सरगांव भी इसी विधानसभा में है। यहां बुनियादी समस्याओँ के अलावा पेयजल, सिंचाई व्यवस्था और सरकारी योजनाओं का ठीक तरह से क्रियान्वयन नहीं होना व अवैध उत्खनन भी एक बड़ा मुद्दा है। इस क्षेत्र में ट्रेनों का स्टॉपेज न होना भी क्षेत्र के लोगों के लिए फिलहाल एक प्रमुख समस्या बना हुआ है। कांग्रेस यहां से किसी नए उम्मीदवार को मौका दे सकती है। तीसरे मोर्चे के तौर पर आम आदमी पार्टी ने भी यहां से पार्टी के कोषाध्यक्ष जसबीर सिंह को अपना कैंडिडेट घोषित कर दिया है। पहले के चुनाव की तुलना में इस बार बिल्हा विधानसभा में समीकरण कुछ हद तक बदले हुए नजर रहे हैं।

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