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मानसून ने बदली तस्वीर: महासमुंद में छह साल बाद लबालब हुआ केशवा जलाशय, अलर्ट जारी

Wed, 26 Aug 2026 06:34 PM IST
अमन कोशले अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर Published by: अमन कोशले Updated Wed, 26 Aug 2026 06:34 PM IST
सार

जिले में मानसून ने अगस्त का महीना खत्म होने से पहले ही पूरे सीजन का बारिश का कोटा पूरा कर लिया है। एक जून से 25 अगस्त तक जिले में कुल 1016 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई है, जबकि पूरे मानसूनी सीजन में औसतन 993 मिलीमीटर बारिश का अनुमान जताया गया था।

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Monsoon changed the picture: Keshava reservoir in Mahasamund filled to the brim after six years, alert issued
महासमुंद में छह साल बाद लबालब हुआ केशवा जलाशय - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

महासमुंद जिले में मानसून ने अगस्त का महीना खत्म होने से पहले ही पूरे सीजन का बारिश का कोटा पूरा कर लिया है। एक जून से 25 अगस्त तक जिले में कुल 1016 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई है, जबकि पूरे मानसूनी सीजन में औसतन 993 मिलीमीटर बारिश का अनुमान जताया गया था। त्रिस्तरीय मौसमी प्रणाली के सक्रिय होने से जिले भर में झमाझम बारिश का दौर जारी है। बारिश से जहां जिले के तमाम जलस्रोत लबालब भर चुके हैं, वहीं खेतों में पानी भरने से धान की फसल डूबने की स्थिति में आ गई है।
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जिले के प्रमुख जलस्रोतों में जलभराव की स्थिति बेहद मजबूत हुई है। कोडार बांध दो सप्ताह पहले ही अपनी पूर्ण क्षमता तक भर गया था। अब केशवा जलाशय का जलस्तर भी छह साल बाद 36 फीट तक पहुंच चुका है। लगातार बारिश से यह जलाशय अब छलकने की राह पर है। मौसम विभाग ने क्षेत्र में बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया था। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, उत्तरी ओडिशा और पश्चिम बंगाल के ऊपर निम्न दबाव का क्षेत्र बना हुआ है। साथ ही, अमृतसर से पश्चिम बंगाल और ओडिशा तक मानसूनी द्रोणिका सक्रिय है। उत्तर प्रदेश से ओडिशा तक बनी एक अन्य द्रोणिका के प्रभाव से भी जिले में भारी बारिश हो रही है।
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मानसून की शुरुआत में जिले में कम बारिश की आशंका जताई जा रही थी, क्योंकि पिछले कुछ वर्षों से यहां औसत से कम वर्षा हो रही थी। हालांकि अगस्त आते-आते स्थिति पूरी तरह बदल गई और सामान्य से अधिक वर्षा दर्ज की गई। खेतों में पानी का ठहराव होने से किसान फसलों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। प्रशासनिक अमले ने बांधों तथा जलाशयों के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए सतर्कता बढ़ा दी है। संभावित जलभराव और उफान वाले नदी-नालों के आसपास रहने वाले ग्रामीणों को सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए हैं। मानसूनी सीजन का अभी एक महीना शेष है, जिससे प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
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