फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chhattisgarh ›   Former Chhattisgarh Chief Minister Ajit Jogi certificate of being scheduled tribe rejected

छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के कंवर आदिवासी होने का प्रमाण पत्र खारिज

Tue, 27 Aug 2019 06:50 PM IST
आसिम खान न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रायपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रायपुर Published by: आसिम खान Updated Tue, 27 Aug 2019 06:50 PM IST
विज्ञापन
Former Chhattisgarh Chief Minister Ajit Jogi certificate of being scheduled tribe rejected
अजीत जोगी (फाइल फोटो)

छत्तीसगढ़ में उच्च स्तरीय प्रमाणीकरण छानबीन समिति ने पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के कंवर आदिवासी होने के प्रमाण पत्र को खारिज कर दिया है। इधर जोगी ने इस आदेश को न्यायालय में चुनौती देने का फैसला किया है। राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों ने मंगलवार को यहां बताया कि जोगी की जाति के मामले में बनी उच्च स्तरीय ‘प्रमाणीकरण छानबीन समिति’ ने पूर्व मुख्यमंत्री के कंवर आदिवासी होने के प्रमाण पत्र को खारिज कर दिया है।

विज्ञापन


अधिकारियों ने बताया कि छानबीन समिति ने पाया कि अजीत प्रमोद कुमार जोगी अपने कंवर अनुसूचित जनजाति के सदस्य होने के दावे को साबित करने में असफल रहे हैं। इसलिए ‘छत्तीसगढ़ अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग (सामाजिक प्रास्थिति के प्रमाणीकरण का विनियमन) अधिनियम 2013’ के अधीन नियम 2013 के उपनियम 23 (2) में विहित प्रावधान के अनुसार जोगी के पक्ष में जारी किए गए ‘कंवर’ अनुसूचित जनजाति के जाति प्रमाण पत्रों को निरस्त कर दिया गया है।
विज्ञापन


उन्होंने बताया कि इससे पहले उच्चतम न्यायालय ने वर्ष 2011 में जोगी की जाति की छानबीन के लिए उच्च स्तरीय ‘प्रमाणीकरण छानबीन समिति’ का गठन करने का निर्देश दिया था। तब छानबीन समिति ने जोगी को जारी कंवर अनुसूचित जनजाति से संबंधित जाति प्रमाण पत्रों को विधि संगत नहीं पाया था। इसके फलस्वरूप जोगी की जाति प्रमाण पत्रों को जून 2017 में निरस्त कर दिया गया था।
विज्ञापन
विज्ञापन


अधिकारियों ने बताया कि समिति के आदेश के खिलाफ जोगी ने छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय बिलासपुर में रिट याचिका दायर की थी। उच्च न्यायालय ने इस मामले में छानबीन समिति का आदेश निरस्त करते हुए एक बार फिर समिति का गठन करने का निर्देश दिया था। इस आदेश के बाद राज्य शासन ने फरवरी वर्ष 2018 में समिति का पुनर्गठन किया था।

उन्होंने बताया कि आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास विभाग के सचिव डीडी सिंह की अध्यक्षता में बनी उच्च स्तरीय प्रमाणीकरण छानबीन समिति ने जोगी को जारी जाति प्रमाण पत्र को निरस्त करने का आदेश दिया है। उच्च अधिकारियों ने बताया कि छानबीन समिति ने छत्तीसगढ़ अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग (सामाजिक प्रास्थिति के प्रमाणीकरण का विनियमन) नियम 2013 के नियम 23 (3) एवं 24 (1) में विहित प्रावधानों के अनुसार कार्यवाही संपादित करने के लिए बिलासपुर जिले के कलेक्टर को प्राधिकृत किया है।

अजीत जोगी ने मंगलवार को यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि विधिवत रुप से उन्हें निर्णय की कॉपी नहीं मिली है। उनका मानना है कि यह निर्णय भूपेश बघेल उच्च स्तरीय छानबीन समिति का निर्णय है। जोगी ने कहा कि जब वह भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी थे तब तक उनके खिलाफ यह मामला नहीं उठा। 

राजनीति में आने के बाद यह मामला सामने आया। जब वह राज्यसभा के लिए चुने गए तब उनकी जाति का मुद्दा मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के इंदौर बैंच के समक्ष आया। उनके पक्ष में इंदौर, जबलपुर तथा बिलासपुर उच्च न्यायालय से छह बार फैसले आए हैं। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके खिलाफ में भाजपा के नेता रहे दिलीप सिंह भुरिया कमेटी ने रिपोर्ट दी थी। 


उसके बाद रमन सिंह सरकार के कार्यकाल में दो बार रिपोर्ट आई। मैं तब से अब तक न्यायालय में इन फैसलों को चुनौती देते रहा हूं और अब पुन: मैं इस मामले को उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय तक चुनौती दूंगा। पूर्व मुख्यमंत्री की जाति को लेकर विवाद छत्तीसगढ़ में पिछले लगभग दो दशकों पुराना है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed