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गंगरेल के बीच पहली बार सजा आइलैंड कैंप: 40 मिनट की बोट राइड के बाद पर्यटकों ने लिया कैंपिंग-एडवेंचर का रोमांच
Tue, 22 Sep 2026 05:30 PM IST
धमतरी ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, धमतरी
अमर उजाला नेटवर्क, धमतरी
Published by: धमतरी ब्यूरो
Updated Tue, 22 Sep 2026 05:30 PM IST
सार
गंगरेल बांध में पहली बार द्वीप पर आइलैंड कैंपसाइट विकसित की गई है। 19 और 20 सितंबर को 12 पर्यटकों ने 2 डेज-1 नाइट आइलैंड कैंपिंग एडवेंचर में हिस्सा लिया। बोटिंग, ट्रेकिंग, फिशिंग, बोनफायर और स्टार गेजिंग जैसी गतिविधियों ने पर्यटकों को आकर्षित किया।
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गंगरेल के द्वीप पर शुरू हुआ आइलैंड कैंपसाइट
विस्तार
छत्तीसगढ़ में पर्यटन को नए और अनुभव आधारित आयाम देने की दिशा में धमतरी ने एक नई पहल की है। गंगरेल बांध के विशाल जलक्षेत्र के बीच स्थित एक द्वीप पर पहली बार आइलैंड कैंपसाइट विकसित की गई है। प्राकृतिक सौंदर्य, जल पर्यटन, रोमांचक गतिविधियों और स्थानीय संस्कृति के मेल से तैयार यह पहल गंगरेल को एडवेंचर टूरिज्म, नेचर टूरिज्म और कम्युनिटी टूरिज्म के नए केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में कदम माना जा रहा है।
जिला प्रशासन के मार्गदर्शन में गंगरेल क्षेत्र को पर्यटन के लिहाज से विकसित करने के प्रयासों के तहत 17 और 18 सितंबर को टूर ऑपरेटर्स के लिए एफएएम ट्रिप (फैमिलियराइजेशन ट्रिप) आयोजित की गई। इसमें विभिन्न टूर ऑपरेटर्स ने गंगरेल बांध, उसके विशाल जलक्षेत्र, द्वीपों और आसपास के प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक परिवेश का प्रत्यक्ष अनुभव लिया। इसका उद्देश्य पर्यटन विशेषज्ञों को धमतरी में विकसित किए जा रहे नए पर्यटन अनुभवों और संभावनाओं से परिचित कराना था।
गंगरेल का द्वीप बना रोमांच और प्रकृति का नया ठिकाना
एफएएम ट्रिप के दौरान गंगरेल का विशाल जलक्षेत्र और उसके बीच स्थित द्वीप आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहा। शहर की भागदौड़ से दूर खुले आसमान के नीचे प्रकृति के बीच समय बिताने का अनुभव पर्यटकों के लिए नया आकर्षण बना।
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इसी पहल को आगे बढ़ाते हुए 19 और 20 सितंबर को छत्तीसगढ़ की ट्रैवल कंपनी कैंपवन द्वारा गंगरेल के द्वीप पर 2 डेज-1 नाइट आइलैंड कैंपिंग एडवेंचर आयोजित किया गया। इस ट्रिप में छत्तीसगढ़ के अलावा ओडिशा और तमिलनाडु से आए कुल 12 पर्यटकों ने हिस्सा लिया।
पर्यटक करीब 40 मिनट की बोट यात्रा के बाद द्वीप तक पहुंचे। जल के बीच नाव से द्वीप तक पहुंचने का अनुभव ही उनके लिए रोमांच की पहली कड़ी रहा। द्वीप पर पहुंचने के बाद पर्यटकों ने प्राकृतिक वातावरण, शांत जलक्षेत्र और आसपास की जैव विविधता का अनुभव लिया।
नाइट कैंपिंग से स्टार गेजिंग तक कई गतिविधियां
आइलैंड कैंपिंग के दौरान पर्यटकों के लिए नाइट कैंपिंग, ट्रेकिंग, फिशिंग, स्विमिंग, बोनफायर, आउटडोर कुकिंग, बर्ड वॉचिंग और स्टार गेजिंग जैसी गतिविधियां आयोजित की गईं।
खुले प्राकृतिक वातावरण में कैंप लगाकर रात बिताना और तारों से भरे आसमान को निहारना पर्यटकों के लिए खास अनुभव रहा। रात के समय शांत जलक्षेत्र के बीच कैंपिंग और खुले आसमान के नीचे बोनफायर ने इस यात्रा को और खास बनाया। ओडिशा और तमिलनाडु से पहुंचे पर्यटकों ने भी गंगरेल के प्राकृतिक सौंदर्य और यहां विकसित किए जा रहे एडवेंचर टूरिज्म अनुभवों में रुचि दिखाई।
स्थानीय युवाओं को रोजगार के नए अवसर
आइलैंड कैंपिंग जैसी गतिविधियों का असर केवल पर्यटन तक सीमित नहीं है। इससे स्थानीय समुदाय की भागीदारी बढ़ाने और युवाओं के लिए रोजगार व स्वरोजगार के नए अवसर पैदा किए जा सकते हैं। बोटिंग, स्थानीय गाइड, कैंप प्रबंधन, भोजन व्यवस्था, आतिथ्य, ट्रेकिंग और अन्य पर्यटन गतिविधियों में स्थानीय युवाओं की भागीदारी से आजीविका के अवसर बढ़ सकते हैं। वहीं, पर्यटकों को स्थानीय जीवन, खान-पान, संस्कृति और परंपराओं को करीब से जानने का मौका भी मिलेगा।
प्रकृति के साथ जिम्मेदार पर्यटन पर जोर
गंगरेल में आइलैंड कैंपिंग की पहल को जिम्मेदार और प्रकृति आधारित पर्यटन की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्राकृतिक स्थलों पर पर्यटन गतिविधियों का विस्तार करते समय पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता, जैव विविधता की सुरक्षा और स्थानीय समुदाय की भागीदारी पर ध्यान देना जरूरी होगा। गंगरेल जलाशय, उसके द्वीपों, आसपास के प्राकृतिक परिदृश्य और स्थानीय सांस्कृतिक विरासत को जोड़कर नेचर एक्सप्लोरेशन, रॉ कैंपिंग, एडवेंचर टूरिज्म और कम्युनिटी टूरिज्म के कई नए अनुभव विकसित किए जा सकते हैं।
पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान की ओर गंगरेल
आइलैंड कैंपसाइट की शुरुआत धमतरी में अनुभव आधारित पर्यटन की संभावनाओं को विस्तार देने वाली पहल के रूप में सामने आई है। जल, जंगल और प्राकृतिक परिवेश से समृद्ध गंगरेल क्षेत्र में इस तरह की गतिविधियों के विस्तार से देश के अलग-अलग हिस्सों से पर्यटकों को आकर्षित करने के नए अवसर बन सकते हैं। गंगरेल अब केवल एक जलाशय नहीं, बल्कि प्रकृति, रोमांच और स्थानीय जीवन के संगम के रूप में अपनी नई पहचान बनाने की दिशा में बढ़ रहा है। आइलैंड कैंपिंग की शुरुआत पर्यटन क्षेत्र के साथ-साथ स्थानीय युवाओं और समुदायों के लिए पर्यटन आधारित आजीविका के नए अवसरों की संभावना भी दिखाती है।
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जिला प्रशासन के मार्गदर्शन में गंगरेल क्षेत्र को पर्यटन के लिहाज से विकसित करने के प्रयासों के तहत 17 और 18 सितंबर को टूर ऑपरेटर्स के लिए एफएएम ट्रिप (फैमिलियराइजेशन ट्रिप) आयोजित की गई। इसमें विभिन्न टूर ऑपरेटर्स ने गंगरेल बांध, उसके विशाल जलक्षेत्र, द्वीपों और आसपास के प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक परिवेश का प्रत्यक्ष अनुभव लिया। इसका उद्देश्य पर्यटन विशेषज्ञों को धमतरी में विकसित किए जा रहे नए पर्यटन अनुभवों और संभावनाओं से परिचित कराना था।
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गंगरेल का द्वीप बना रोमांच और प्रकृति का नया ठिकाना
एफएएम ट्रिप के दौरान गंगरेल का विशाल जलक्षेत्र और उसके बीच स्थित द्वीप आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहा। शहर की भागदौड़ से दूर खुले आसमान के नीचे प्रकृति के बीच समय बिताने का अनुभव पर्यटकों के लिए नया आकर्षण बना।
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इसी पहल को आगे बढ़ाते हुए 19 और 20 सितंबर को छत्तीसगढ़ की ट्रैवल कंपनी कैंपवन द्वारा गंगरेल के द्वीप पर 2 डेज-1 नाइट आइलैंड कैंपिंग एडवेंचर आयोजित किया गया। इस ट्रिप में छत्तीसगढ़ के अलावा ओडिशा और तमिलनाडु से आए कुल 12 पर्यटकों ने हिस्सा लिया।
पर्यटक करीब 40 मिनट की बोट यात्रा के बाद द्वीप तक पहुंचे। जल के बीच नाव से द्वीप तक पहुंचने का अनुभव ही उनके लिए रोमांच की पहली कड़ी रहा। द्वीप पर पहुंचने के बाद पर्यटकों ने प्राकृतिक वातावरण, शांत जलक्षेत्र और आसपास की जैव विविधता का अनुभव लिया।
नाइट कैंपिंग से स्टार गेजिंग तक कई गतिविधियां
आइलैंड कैंपिंग के दौरान पर्यटकों के लिए नाइट कैंपिंग, ट्रेकिंग, फिशिंग, स्विमिंग, बोनफायर, आउटडोर कुकिंग, बर्ड वॉचिंग और स्टार गेजिंग जैसी गतिविधियां आयोजित की गईं।
खुले प्राकृतिक वातावरण में कैंप लगाकर रात बिताना और तारों से भरे आसमान को निहारना पर्यटकों के लिए खास अनुभव रहा। रात के समय शांत जलक्षेत्र के बीच कैंपिंग और खुले आसमान के नीचे बोनफायर ने इस यात्रा को और खास बनाया। ओडिशा और तमिलनाडु से पहुंचे पर्यटकों ने भी गंगरेल के प्राकृतिक सौंदर्य और यहां विकसित किए जा रहे एडवेंचर टूरिज्म अनुभवों में रुचि दिखाई।
स्थानीय युवाओं को रोजगार के नए अवसर
आइलैंड कैंपिंग जैसी गतिविधियों का असर केवल पर्यटन तक सीमित नहीं है। इससे स्थानीय समुदाय की भागीदारी बढ़ाने और युवाओं के लिए रोजगार व स्वरोजगार के नए अवसर पैदा किए जा सकते हैं। बोटिंग, स्थानीय गाइड, कैंप प्रबंधन, भोजन व्यवस्था, आतिथ्य, ट्रेकिंग और अन्य पर्यटन गतिविधियों में स्थानीय युवाओं की भागीदारी से आजीविका के अवसर बढ़ सकते हैं। वहीं, पर्यटकों को स्थानीय जीवन, खान-पान, संस्कृति और परंपराओं को करीब से जानने का मौका भी मिलेगा।
प्रकृति के साथ जिम्मेदार पर्यटन पर जोर
गंगरेल में आइलैंड कैंपिंग की पहल को जिम्मेदार और प्रकृति आधारित पर्यटन की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्राकृतिक स्थलों पर पर्यटन गतिविधियों का विस्तार करते समय पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता, जैव विविधता की सुरक्षा और स्थानीय समुदाय की भागीदारी पर ध्यान देना जरूरी होगा। गंगरेल जलाशय, उसके द्वीपों, आसपास के प्राकृतिक परिदृश्य और स्थानीय सांस्कृतिक विरासत को जोड़कर नेचर एक्सप्लोरेशन, रॉ कैंपिंग, एडवेंचर टूरिज्म और कम्युनिटी टूरिज्म के कई नए अनुभव विकसित किए जा सकते हैं।
पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान की ओर गंगरेल
आइलैंड कैंपसाइट की शुरुआत धमतरी में अनुभव आधारित पर्यटन की संभावनाओं को विस्तार देने वाली पहल के रूप में सामने आई है। जल, जंगल और प्राकृतिक परिवेश से समृद्ध गंगरेल क्षेत्र में इस तरह की गतिविधियों के विस्तार से देश के अलग-अलग हिस्सों से पर्यटकों को आकर्षित करने के नए अवसर बन सकते हैं। गंगरेल अब केवल एक जलाशय नहीं, बल्कि प्रकृति, रोमांच और स्थानीय जीवन के संगम के रूप में अपनी नई पहचान बनाने की दिशा में बढ़ रहा है। आइलैंड कैंपिंग की शुरुआत पर्यटन क्षेत्र के साथ-साथ स्थानीय युवाओं और समुदायों के लिए पर्यटन आधारित आजीविका के नए अवसरों की संभावना भी दिखाती है।