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Bilaspur High Court: ईओडब्ल्यू सूचना को अधिकार से छूट देने के मामला, कोर्ट ने कहा- राज्य संशोधन करे
Tue, 19 Mar 2024 08:53 PM IST
श्याम जी.
अमर उजाला नेटवर्क, बिलासपुर
अमर उजाला नेटवर्क, बिलासपुर
Published by: श्याम जी.
Updated Tue, 19 Mar 2024 08:53 PM IST
सार
बिलासपुर हाईकोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई के बाद आदेश दिया है कि ईओडब्ल्यू सूचना को अधिकार से छूट देने के मामले में राज्य शासन संशोधन करे। कोर्ट ने कहा कि भ्रष्टाचार और मानव अधिकारों के हनन से संबंधित सूचना देने से इस तरह की संस्था को मुक्त नहीं किया जा सकता।
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बिलासपुर हाईकोर्ट
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
हाईकोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई के बाद आदेश दिया है कि आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) को सूचना के अधिकार से छूट देने के मामले में राज्य शासन संशोधन करे। छत्तीसगढ़ सामान्य प्रशासन विभाग ने 7 नवंबर 2006 को अधिसूचना जारी कर राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो को सूचना के अधिकार पर जानकारी प्रदान करने से मुक्त किया था, कोर्ट ने इसे त्रुटिपूर्ण कहा है।
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कोर्ट ने कहा कि भ्रष्टाचार और मानव अधिकारों के हनन से संबंधित सूचना देने से इस तरह की संस्था को मुक्त नहीं किया जा सकता, इसलिए इस आदेश के तीन सप्ताह के भीतर छत्तीसगढ़ सामान्य प्रशासन विभाग अधिसूचना में आवश्यक संशोधन कर राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो को सूचना के अधिकार के दायरे में लाए।
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कोर्ट ने छत्तीसगढ़ राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो को यह निर्देश भी दिए कि आरटीआई कार्यकर्ता द्वारा 15 नवंबर 2016 में प्रस्तुत सूचना के अधिकार के आवेदन का जवाब आज की स्थिति में इस आदेश के चार सप्ताह के भीतर प्रदान करें। इस निर्देश के साथ इस संबन्ध में दायर याचिका हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने स्वीकार ली है। चिरमिरी निवासी आरटीआई कार्यकर्ता राजकुमार मिश्रा ने इस मुद्दे पर हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की थी।
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बता दें कि आरटीआई कार्यकर्ता ने 15 नवंबर 2016 को सूचना के अधिकार पर एक आवेदन प्रस्तुत कर छत्तीसगढ़ ईओडब्ल्यू से कुछ जानकारियां मांगी थीं। संस्था ने इस आधार पर जानकारी प्रदान करने से इनकार कर दिया कि 7 नवंबर 2006 को राज्य सरकार ने उसे सूचना के अधिकार पर जानकारी प्रदान करने से मुक्त कर दिया है।
इस अधिसूचना को राजकुमार मिश्रा ने हाईकोर्ट में चुनौती दी कि सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 24 की उपधारा 4 में उल्लेख है कि भ्रष्टाचार और मानव अधिकारों के हनन से संबंधित सूचना देने से किसी भी संस्था को मुक्त नहीं किया जा सकता। छत्तीसगढ़ सरकार की यह संस्था छत्तीसगढ़ राज्य में भ्रष्टाचार से संबंधित प्रकरणों की ही जांच करती है. इस तरह इस संस्था को सूचना के अधिकार से मुक्त नहीं किया जा सकता।