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छत्तीसगढ़: पीडब्ल्यूडी में नई नियुक्तियों पर पूर्ण प्रतिबंध, दोषी अधिकारियों से होगी वसूली
Thu, 05 Nov 2026 05:27 PM IST
प्रतीक कुमार पाण्डेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रायपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रायपुर
Published by: प्रतीक कुमार पाण्डेय
Updated Thu, 05 Nov 2026 05:27 PM IST
सार
छत्तीसगढ़ शासन के लोक निर्माण विभाग ने स्वीकृत पदों और बजट आवंटन के बिना मस्टर रोल, दैनिक वेतनभोगी और कलेक्टर दर पर नई नियुक्तियों पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। एक अप्रैल 2026 के बाद नियम विरुद्ध नियुक्ति करने वाले अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी।
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लोक निर्माण विभाग
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
छत्तीसगढ़ शासन के लोक निर्माण विभाग ने स्वीकृत सेटअप और बजट आवंटन के बिना मस्टर रोल, दैनिक वेतनभोगी और कलेक्टर दर पर कर्मचारियों की नई नियुक्तियों पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। शासन ने स्पष्ट किया है कि नियमों का उल्लंघन कर नई नियुक्तियां करने वाले अधिकारियों के विरुद्ध सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी। इसके साथ ही ऐसी नियुक्तियों से शासन को होने वाली वित्तीय क्षति की पूरी राशि संबंधित अधिकारी से वसूल की जाएगी।
विभाग ने स्पष्ट निर्देश जारी कर अपने सभी मुख्यालयों और अधीनस्थ कार्यालयों को नियमों का कड़ाई से पालन करने को कहा है। लोक निर्माण विभाग ने सभी विभागाध्यक्षों तथा क्षेत्रीय अधिकारियों को इस संबंध में दिशा-निर्देश भेज दिए हैं।
वित्तीय नुकसान की होगी वसूली
लोक निर्माण विभाग के जारी आदेश में उल्लेख है कि बिना सक्षम वित्तीय स्वीकृति और स्वीकृत पदों के किसी भी व्यक्ति को दैनिक वेतनभोगी अथवा मस्टर रोल पर रखना पूरी तरह नियम विरुद्ध है। छत्तीसगढ़ वित्तीय संहिता के प्रावधानों के अनुसार सक्षम प्राधिकारी की पूर्व प्रशासनिक तथा वित्तीय मंजूरी के बिना श्रमिकों को काम पर रखना अनधिकृत अतिरिक्त वित्तीय भार पैदा करने की श्रेणी में आता है।
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शासन का मानना है कि इस प्रकार की अनियमित नियुक्तियां बिना किसी बजट प्रावधान के राज्य सरकार पर अनावश्यक वित्तीय बोझ डालती हैं। सरकार ने इस प्रकार के कृत्यों को अत्यंत गंभीर वित्तीय अनियमितता माना है। इसलिए यह निर्णय लिया गया है कि यदि कोई अधिकारी इस प्रकार का कदम उठाता है, तो उनसे नुकसान की वसूली होगी।
नियमों का उल्लंघन माना जाएगा कदाचार
शासन ने चेतावनी दी है कि एक अप्रैल 2026 के बाद नियम विरुद्ध किसी भी कर्मचारी या श्रमिक को नियोजित करने पर जिम्मेदार अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू होगी। इस प्रकार के कृत्य को छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के नियम तीन का उल्लंघन माना जाएगा।
इसे गंभीर वित्तीय कदाचार की श्रेणी में रखकर संबंधित अधिकारी पर कड़ी कार्रवाई होगी। विभाग ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में इस प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी कार्यालय प्रमुखों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने अधीन आने वाले कार्यालयों में इस आदेश का कड़ाई से अनुपालन कराएं।
पुरानी नीति का दिया गया हवाला
लोक निर्माण विभाग ने सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा पांच मार्च 2008 को जारी परिपत्र का उल्लेख किया है। उस परिपत्र में स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि भविष्य में दैनिक वेतनभोगी, तदर्थ अथवा कलेक्टर दर पर किसी भी प्रकार की अनियमित नियुक्तियां न की जाएं।
विभाग ने अधिकारियों को सचेत किया है कि 2008 के उस परिपत्र के तहत दैनिक वेतनभोगियों की भर्ती पर पहले से ही रोक लागू है। इसके बावजूद नियमों की अनदेखी नहीं की जा सकती। अब शासन ने पुनः जोर दिया है कि पुराने नियमों का अनुपालन अनिवार्य रूप से किया जाए।
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विभाग ने स्पष्ट निर्देश जारी कर अपने सभी मुख्यालयों और अधीनस्थ कार्यालयों को नियमों का कड़ाई से पालन करने को कहा है। लोक निर्माण विभाग ने सभी विभागाध्यक्षों तथा क्षेत्रीय अधिकारियों को इस संबंध में दिशा-निर्देश भेज दिए हैं।
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वित्तीय नुकसान की होगी वसूली
लोक निर्माण विभाग के जारी आदेश में उल्लेख है कि बिना सक्षम वित्तीय स्वीकृति और स्वीकृत पदों के किसी भी व्यक्ति को दैनिक वेतनभोगी अथवा मस्टर रोल पर रखना पूरी तरह नियम विरुद्ध है। छत्तीसगढ़ वित्तीय संहिता के प्रावधानों के अनुसार सक्षम प्राधिकारी की पूर्व प्रशासनिक तथा वित्तीय मंजूरी के बिना श्रमिकों को काम पर रखना अनधिकृत अतिरिक्त वित्तीय भार पैदा करने की श्रेणी में आता है।
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शासन का मानना है कि इस प्रकार की अनियमित नियुक्तियां बिना किसी बजट प्रावधान के राज्य सरकार पर अनावश्यक वित्तीय बोझ डालती हैं। सरकार ने इस प्रकार के कृत्यों को अत्यंत गंभीर वित्तीय अनियमितता माना है। इसलिए यह निर्णय लिया गया है कि यदि कोई अधिकारी इस प्रकार का कदम उठाता है, तो उनसे नुकसान की वसूली होगी।
नियमों का उल्लंघन माना जाएगा कदाचार
शासन ने चेतावनी दी है कि एक अप्रैल 2026 के बाद नियम विरुद्ध किसी भी कर्मचारी या श्रमिक को नियोजित करने पर जिम्मेदार अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू होगी। इस प्रकार के कृत्य को छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के नियम तीन का उल्लंघन माना जाएगा।
इसे गंभीर वित्तीय कदाचार की श्रेणी में रखकर संबंधित अधिकारी पर कड़ी कार्रवाई होगी। विभाग ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में इस प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी कार्यालय प्रमुखों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने अधीन आने वाले कार्यालयों में इस आदेश का कड़ाई से अनुपालन कराएं।
पुरानी नीति का दिया गया हवाला
लोक निर्माण विभाग ने सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा पांच मार्च 2008 को जारी परिपत्र का उल्लेख किया है। उस परिपत्र में स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि भविष्य में दैनिक वेतनभोगी, तदर्थ अथवा कलेक्टर दर पर किसी भी प्रकार की अनियमित नियुक्तियां न की जाएं।
विभाग ने अधिकारियों को सचेत किया है कि 2008 के उस परिपत्र के तहत दैनिक वेतनभोगियों की भर्ती पर पहले से ही रोक लागू है। इसके बावजूद नियमों की अनदेखी नहीं की जा सकती। अब शासन ने पुनः जोर दिया है कि पुराने नियमों का अनुपालन अनिवार्य रूप से किया जाए।