छत्तीसगढ़ में आदिवासियों को फ्री पौष्टिक भोजन और स्वास्थ्य सुविधा, सीएम बघेल ने की घोषणा
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छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बुधवार को आदिवासियों के लिए दो बड़ी घोषणाएं की। बस्तर के जंगली इलाके में रह रहे आदिवासियों को नि:शुल्क पौष्टिक भोजन और स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराई जाएगी। सीएम बघेल ने यह घोषणा ऐसे समय में की है, जब बिहार में चमकी बुखार के कहर से 100 से ज्यादा बच्चों की मौत हो चुकी है। एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम के पीछे डॉक्टर 'कुपोषण' को बड़ा कारण मान रहे हैं।
सर्वजन सुखाय, सर्वजन हिताय के संकल्प के साथ आगे बढ़ती प्रदेश सरकार।
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-अब हाट बाजारों में मिलेगी आदिवासियों को चिकित्सा सुविधा
- आदिवासियों को अब पौष्टिक आहार देगी प्रदेश सरकार
"गढ़बो नवा छत्तीसगढ़" pic.twitter.com/xebzkdoNL0— INC Chhattisgarh (@INCChhattisgarh) June 19, 2019
सीएम भूपेश बघेल ने कहा कि राज्य सरकार आदिवासियों के लिए दो नई योजना लागू करने जा रही है। कुपोषण से निबटने और स्वास्थ्य सुविधा को लेकर इन योजनाओं का अहम रोल रोल होगा, जो कि आदिवासियों के स्वास्थ्य में सुधार लाएगा।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार वनवासियों के लिए ग्राम पंचायतों के माध्यम से पौष्टिक भोजन मुहैया कराएगी। एक अन्य योजना के तहत साप्ताहिक बाजारों (हाटों) में आदिवासियों के लिए मोबाइल स्वास्थ्य सुविधाएं मौजूद होगी।
पायलट प्रोजेक्ट के तहत बस्तर से शुरुआत
इन योजनाओं को पायलट प्रोजेक्ट के तहत बस्तर से लॉन्च किया जाएगा, जोकि छत्तीसगढ़ का अति नक्सल प्रभावित क्षेत्र है। यहां पूरे राज्य भर में सबसे ज्यादा कुपोषण का प्रभाव है। स्वास्थ्य की दृष्टि से भी यह इलाका पिछड़ा हुआ है।
सीएम बघेल ने कहा कि हम कुपोषण को जड़ से खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। अगले एक सप्ताह के भीतर कुछ पंचायतों में पायलट प्रोजेक्ट लॉन्च किया जाएगा और अगले एक महीने के अंदर पूरा जिले को इस दायरे में लाया जाएगा।
महिला स्वयं सहायता समूहों का अहम रोल
मुख्यमंत्री ने कहा कि पौष्टिक भोजन आदिवासियों को स्थानीय स्तर पर मुहैया कराया जाएगा। यह उनकी इच्छा पर निर्भर करेगा कि वे पौष्टिक आहार, पंचायत के माध्यम से या फिर महिला स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से लेना चाहेंगे।
उन्होंने कहा कि बस्तर और दंतेवाड़ा के जिलाधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि मोबाइल पैथोलॉजी यूनिट, एक्स रे यूनिट और जरूरी दवाओं को हाट-बाजारों में उपलब्ध कराने के लिए जल्द से जल्द जरुरी कदम उठाए जाएं। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह योजना आदिवासियों के जीवन स्तर में काफी हद तक सुधार लाएगी।