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CG: इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य का कोई विशेषज्ञ नहीं होने को लेकर दायर जनहित याचिका पर हुई सुनवाई, HC ने दिया ये आदेश

Thu, 20 Mar 2025 07:51 PM IST
श्याम जी. अमर उजाला नेटवर्क, बीजापुर
अमर उजाला नेटवर्क, बीजापुर Published by: श्याम जी. Updated Thu, 20 Mar 2025 07:51 PM IST
सार

बिलासपुर हाईकोर्ट में प्रदेश में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य का कोई विशेषज्ञ नहीं होने को लेकर जनहित याचिका लगाई गई है। इस पूरे मामले में गुरुवार को सुनवाई हुई।

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Bilaspur High Court heard PIL filed regarding absence of any expert on electronic evidence
बिलासपुर हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बिलासपुर हाईकोर्ट में प्रदेश में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य का कोई विशेषज्ञ नहीं होने को लेकर जनहित याचिका लगाई गई है। इस पूरे मामले में गुरुवार को चीफ जस्टिस रमेश कुमार सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की बेंच में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान बेंच ने इस मामले में केंद्र सरकार के जवाब के बाद राज्य सरकार के मुख्य सचिव से हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है। 

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सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 की धारा 63(4) के तहत इलेक्ट्रॉनिक अभिलेखों को प्रमाणित करने के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे और सुविधाओं की स्थापना करना जरूरी है। वहीं छत्तीसगढ़ राज्य के लिए सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 79-ए के तहत कोई परीक्षक/विशेषज्ञ नहीं है और नियुक्त करने के निर्देश देने के लिए प्रार्थना की है। वहीं, केंद्र सरकार के अधिवक्ता रमाकांत मिश्रा ने बताया कि केंद्रीय और राज्य प्रयोगशालाओं की अधिसूचना के लिए एक योजना लागू की गई है। 
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प्रयोगशाला स्थापित करने के लिए आवश्यक आईटी अवसंरचना, उपकरणों की स्थापना और प्रशिक्षित व्यक्तियों की व्यवस्था करने और प्रयोगशाला संचालित करने की आवश्यकता होती है। इसका विवरण इलेक्ट्रॉनिक के परीक्षक के रूप में डिजिटल फोरेंसिक लैब की अधिसूचना के लिए आवेदन करने के लिए दस्तावेज़ में उपलब्ध है। राज्य डिजिटल फोरेंसिक लैब की स्थापना के समन्वय के लिए एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने पर विचार कर सकता है। एक निर्धारित प्रारूप है जैसे, इस प्रारूप में, राज्य प्रयोगशालाओं की सिफारिश करेगा यदि किसी प्रयोगशाला का अवसंरचना वहां उपलब्ध है। इसको लेकर राज्य सरकार से आवेदन का प्रारूप भेजा गया था। 
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छत्तीसगढ़ पुलिस साइबर लैब की मान्यता के लिए समिति के सदस्यों की टीम आई थी, जिसने कुछ कमियों के बारे में अवगत कराया था। इसके बाद राज्य सरकार को 19 मार्च 2021 को मेल के माध्यम से पत्र भेजा था। वहीं, 10 मार्च 2025 को भी पत्र से जानकारी दी गई। इस पर चीफ जस्टिस रमेश कुमार सिन्हा और जस्टिस रविन्द्र कुमार अग्रवाल की बेंच ने सुनवाई करते हुए राज्य सरकार के मुख्य सचिव को इस मामले में व्यक्तिगत हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया है। अगली सुनवाई 27 मार्च 2025 को तय की है। 


पिछली सुनवाई में कोर्ट ने केंद्र सरकार को तत्काल नियुक्ति के लिए उचित कदम उठाने निर्देश दिए थे। जिसपर शपथपत्र पेश कर प्रक्रिया की जानकारी दी है। बता दें याचिकाकर्ता शिरीन मालेवर ने अधिवक्ता रुद्र प्रताप दुबे और गौतम खेत्रपाल के माध्यम से याचिका दाखिल की है। इस याचिका में याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कोर्ट में बताया है कि देश भर में 16 जगह पर एक्सपर्ट की नियुक्ति की गई है, जो कि केंद्र सरकार के द्वारा की जाती है।फिलहाल छत्तीसगढ़ प्रदेश में किसी एक्सपर्ट की नियुक्ति नहीं हैं। आईटी अधिनियम राज्य के लिए धारा 79 के तहत इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य का कोई परीक्षक नहीं है।

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