Exclusive News एक्सक्लूसिव खबरें
Free E-Paper फ्री में ई-पेपर पढ़ें
ऐप डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chhattisgarh ›   Bilaspur-Chhattisgarh News ›   wildlife in chhattisgarh; chhattisgarh high court ban on bringing bison from assam

हाईकोर्ट ने वन भैंसा लाने पर लगाई रोक: याचिका में कहा- जीन मिक्स होने से विशेषता नहीं रहेगी; असम से ला रहे थे

Wed, 22 Mar 2023 08:42 PM IST
मोहनीश श्रीवास्तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बिलासपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बिलासपुर Published by: मोहनीश श्रीवास्तव Updated Wed, 22 Mar 2023 08:42 PM IST
सार

याचिका में कहा गया है, छत्तीसगढ़ वन विभाग असम से लाए गए मादा वन भैसों से उदंती के बाइसन से प्रजनन कराएंगे। इससे नई जीन का पूल तैयार होगा। भारतीय वन्यजीव संस्थान भी इस पर दो बार आपत्ति दर्ज करा चुका है। ऐसा करने से छत्तीसगढ़ के वन भैसों की जीन पूल की विशेषता बरकरार नहीं रखी जा सकेगी। 

विज्ञापन
wildlife in chhattisgarh; chhattisgarh high court ban on bringing bison from assam
वन भैंसा। - फोटो : संवाद

विस्तार

 छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने असम से वन भैंसा (बाइसन) लाने पर रोक लगा दी है। वन विभाग की टीम वन भैंसा लेने के लिए वहां गई हुई है। टीम वहां से चार मादा वन भैंसा लेकर लौटने वाली थी। इससे पहले कोर्ट ने जनहित याचिका पर आदेश जारी कर दिया है। याचिका में कहा गया है कि जीन मिक्स होने से छत्तीसगढ़ के वन भैंसों की विशेषता खत्म हो जाएगी। मामले की सुनवाई कार्यवाहक चीफ जस्टिस गौतम भादुड़ी और जस्टिस नरेश कुमार चंद्रवंशी की डिवीजन बेंच में हुई है। 

विज्ञापन
Trending Videos

दरअसल, छत्तीसगढ़ वन विभाग ने अप्रैल 2020 में असम के मानस टाइगर रिजर्व से एक नर और एक मादा बाइसन मंगवाया था। इन्हें बारनवापारा अभ्यारण में 25 एकड़ के बाड़े में रखा गया है। वन विभाग की योजना है कि इन वन भैंसों से प्रजनन कराया जाएगा। इसके विरोध में रायपुर के नितिन सिंघवी ने जनवरी 2022 में जनहित याचिका दायर कर इस पर आपत्ति जताई। याचिका लंबित होने के कारण वन विभाग की टीम मार्च में चार और मादा बाइसन लेने असम पहुंच गई। इस बीच कोर्ट ने रोक लगा दी।  

विज्ञापन
विज्ञापन

wildlife in chhattisgarh; chhattisgarh high court ban on bringing bison from assam
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट - फोटो : Social media

प्रजनन से नई जीन का पूल होगा तैयार
याचिका में कहा गया है कि, वन भैसा वन्यप्राणी संरक्षण अधिनियम के शेड्यूल-1 के तहत संरक्षित है। छत्तीसगढ़ वन विभाग असम से लाए गए मादा वन भैसों से उदंती के बाइसन से प्रजनन कराएंगे। इससे नई जीन का पूल तैयार होगा। भारतीय वन्यजीव संस्थान भी इस पर दो बार आपत्ति दर्ज करा चुका है। ऐसा करने से छत्तीसगढ़ के वन भैसों की जीन पूल की विशेषता बरकरार नहीं रखी जा सकेगी। वन्यजीव संस्थान ने बताया था कि छत्तीसगढ़ के वन भैसों की जीन पूल विश्व में शुद्धतम है। 

विज्ञापन

भौगोलिक स्थिति के कारण आनुवांशिकी फर्क
याचिका में यह भी बताया गया है कि सीसीएमबी नामक डीएनए जांचने वाले संस्थान ने भी कहा है कि असम के वन भैसों में भोगोलिक स्थिति के कारण आनुवंशिकी फर्क है। सर्वोच्च न्यायालय ने आदेशित किया था कि छत्तीसगढ़ के वन भैसों की शुद्धता बरकरार रखी जाए। असम का मानस टाइगर रिजर्व, नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी के अधीन आता है। ऐसे में वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम के तहत टाइगर रिजर्व के अंदर एनटीसीए की बिना अनुमति के कोई जानवर भी नहीं पकड़ा जा सकता।

एनटीसीए को वन विभाग ने रिपोर्ट तक नहीं सौंपी
एनटीसीए की तकनीकी समिति ने असम के वन भैसों को छत्तीसगढ़ के बारनवापारा में पुनर्वासित करने के करने के पूर्व परिस्थितिकी अर्थात इकोलॉजिकल सूटेबिलिटी रिपोर्ट मंगवाई थी। इससे यह पता लगाया जाना था कि असम के वन भैसे छत्तीसगढ़ में रह सकते हैं कि नहीं? इसके बाद भी छत्तीसगढ़ वन विभाग बिना इकोलॉजिकल सूटेबिलिटी अध्यन कराए और एनटीसीए को रिपोर्ट दिए वन भैसों को लेकर आने की प्रक्रिया शुरू कर दी। यहां तक कि अब उनकी टीम भी लेने के लिए पहुंच गई है। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed