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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा आदेश: एसटी को अनारक्षित पद पर पदोन्नति के लिए करना होगा शामिल, निर्देश जारी

Tue, 22 Sep 2026 08:18 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बिलासपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बिलासपुर Published by: अमर उजाला ब्यूरो Updated Tue, 22 Sep 2026 08:18 AM IST
सार

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पदोन्नति से जुड़े एक मामले में स्पष्ट किया कि अनारक्षित पद किसी एक सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित नहीं होता। कोर्ट ने विभाग को डीपीसी की समीक्षा कर अनुसूचित जनजाति वर्ग के कर्मचारी अलख राम ध्रुव की पदोन्नति पर नए सिरे से विचार करने और 90 दिनों में प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया है।

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Chhattisgarh High Court Major Ruling ST Candidates Must Be Included for Promotion to Unreserved Posts
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

एक मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने अनुसूचित जनजाति के अभ्यर्थी को भी पदोन्नति प्रक्रिया में शामिल करने के आदेश दिए हैं। रायपुर के काशीराम नगर निवासी 53 वर्षीय अलख राम ध्रुव स्कूल शिक्षा विभाग के लोक शिक्षण संचालनालय में सहायक ग्रेड-एक के पद पर कार्यरत थे। वे अनुसूचित जनजाति वर्ग से आते हैं। वर्ष 2016 में सहायक अधीक्षक के पद पर पदोन्नति के लिए डीपीसी यानी विभागीय पदोन्नति समिति आयोजित की गई थी, जिसमें उन्हें पदोन्नति से वंचित कर दिया गया था। इसे लेकर उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी।
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योग्यता के आधार पर अनारक्षित पद के लिए पात्र तो विचार होना चाहिए
मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस राकेश मोहन पांडेय की पीठ ने कहा कि अनारक्षित पद किसी एक सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित नहीं होता। यदि आरक्षित वर्ग का कर्मचारी वरिष्ठता और योग्यता के आधार पर अनारक्षित पद के लिए पात्र है, तो उसके नाम पर भी विचार होना चाहिए।
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दरअसल, साल 2016 में डीपीसी के समय दो पद उपलब्ध थे, जिनमें एक पद अनारक्षित और दूसरा अनुसूचित जाति वर्ग के लिए था। याचिकाकर्ता का कहना था कि वे वरिष्ठ होने के बावजूद केवल इस आधार पर पदोन्नति प्रक्रिया से बाहर कर दिए गए कि अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए कोई रिक्त पद उपलब्ध नहीं है। डीपीसी में उनसे कनिष्ठ कर्मचारियों के नामों पर विचार किया गया।
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सहायक अधीक्षक पद के लिए विचार किया गया
वरिष्ठता सूची में अलख राम ध्रुव संबंधित कर्मचारी सुनील कुमार भूमरकर और शैलेश शर्मा से वरिष्ठ थे। इसके बावजूद दोनों के नामों पर सहायक अधीक्षक पद के लिए विचार किया गया। वहीं, राज्य की ओर से सरकारी अधिवक्ता अखिलेश कुमार ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए कोई रिक्त पद उपलब्ध नहीं था। वर्ष 2016 में उपलब्ध दोनों पद आरक्षण रोस्टर के अनुसार भरे गए और पदोन्नति की प्रक्रिया नियमों के मुताबिक हुई। इस मामले में हाईकोर्ट ने विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की समीक्षा आयोजित करने को कहा है। इसमें अलख राम ध्रुव के नाम पर सहायक अधीक्षक पद पर पदोन्नति के लिए नए सिरे से विचार कर 90 दिन के भीतर प्रक्रिया पूरी करने का आदेश दिया है।
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