फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chhattisgarh ›   Bilaspur-Chhattisgarh News ›   padyatra taken out to include chhattisgarhi language in primary education in bilaspur

छत्तीसगढ़ी भाषा के लिए पदयात्रा: सुरुज बाई की पुण्यतिथि पर निकले लोग, कहा- बालमन की ऐसी मानसिक हत्या कहीं नहीं

Sat, 11 Mar 2023 03:44 PM IST
मोहनीश श्रीवास्तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बिलासपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बिलासपुर Published by: मोहनीश श्रीवास्तव Updated Sat, 11 Mar 2023 03:44 PM IST
सार

मोर चिन्हारी समिति की ओर से बताया गया कि जनता में जागरण के लिए हमारी पदयात्रा चरणबद्ध रूप से आगे भी चलती रहेगी। मातृभाषा में शिक्षा पाना हर बच्चे का कानूनी, संवैधानिक अधिकार है, पर दुखद रुप से हमारा छत्तीसगढ़िया-समाज इस वाजिब अधिकार से वंचित है। उन्होंने कहा कि, हमारा संघर्ष लगातार जारी है। 

विज्ञापन
padyatra taken out to include chhattisgarhi language in primary education in bilaspur
छत्तीसगढ़ी भाषा में शिक्षा की मांग को लेकर निकाली गई पदयात्रा। - फोटो : संवाद

विस्तार

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में छत्तीसगढ़ी को प्राथमिक स्कूल की पढ़ाई में शामिल करने की मांग को लेकर लोगों ने पदयात्रा निकाली। कलाकार सुरुज बाई खांडे की पुण्यतिथि पर इस एक दिवसीय पदयात्रा का आयोजन किया गया। कहा गया कि जिस मातृभाषा  छत्तीसगढ़ी में सुरुज बाई खांडे 'भरथरी-गाथा' गाती थीं, उसे शिक्षा का माध्यम बनाया जाए। छत्तीसगढ़िया बच्चों का गैर भाषा में शिक्षा देना उनके मानसिक विकास को रोकना है बालमन की ऐसी मानसिक हत्या कहीं नहीं है। 

विज्ञापन


मोर चिन्हारी समिति की ओर से पदयात्रा का दूसरा चरण महामाया चौक सरकंडा से चकरभाठा फिर चकरभाठा से बिलासपुर तक पूरा किया गया। यह यात्रा जरहाभाठा , तिफरा, हाईकोर्ट परिसर, धमनी, नगपुरा, सिरगिट्टी के रास्ते 20 किमी चली। इस दौरान लोगों को जागरुक किया गया। वही छत्तीसगढ़ी भाषा को कम से कम प्राथमिक शिक्षा का माध्यम बनाने की प्रमुख मांग के साथ ही उसको राजकाज -कामकाज की भाषा बनाने की मांग की गई। इस जनजागरण-पदयात्रा का प्रथम-चरण 22-23 फरवरी को किया गया था। 
विज्ञापन




पदयात्रा में शामिल  81 साल के नंदकिशोर शुक्ल ने बताया कि गैर-मातृभाषा माध्यम में छत्तीसगढ़िया बच्चों को शिक्षा देना उनके साथ बर्बरता है। उनकी स्वाभाविक शैक्षणिक विकास को रोकना है। बालमन की ऐसी मानसिक हत्या छत्तीसगढ़ को छोड़कर पूरे हिन्दुस्तान में और कहीं नहीं होती। मातृभाषा में शिक्षा पाना हर बच्चे का कानूनी, संवैधानिक अधिकार है, पर दुखद रुप से हमारा छत्तीसगढ़िया-समाज इस वाजिब अधिकार से वंचित है। उन्होंने कहा कि, हमारा संघर्ष लगातार जारी है। 

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed