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Bijapur: मांद में घुसकर जवानों ने ध्वस्त किया नक्सली स्मारक, इसी इलाके में 12 नक्सली हुए थे ढेर

Fri, 07 Mar 2025 03:16 PM IST
Digvijay Singh अमर उजाला नेटवर्क, बीजापुर
अमर उजाला नेटवर्क, बीजापुर Published by: Digvijay Singh Updated Fri, 07 Mar 2025 03:16 PM IST
सार

बीजापुर जिले के अंदुरुनी क्षेत्र पुजारी कांकेर में जवानों ने नक्सलियों की मांद में घुसकर उनका एक विशालकाय नक्सल स्मारक को जेसीबी की मदद से ध्वस्त कर दिया है।

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Soldiers entered den and demolished Naxal memorial 12 Naxals were killed in this area in Bijapur
जवानों ने ध्वस्त किया नक्सली स्मारक - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बीजापुर जिले के अंदुरुनी क्षेत्र पुजारी कांकेर में जवानों ने नक्सलियों की मांद में घुसकर उनका एक विशालकाय नक्सल स्मारक को जेसीबी की मदद से ध्वस्त कर दिया है। जानकारी के मुताबिक उसूर ब्लाक के अंदुरुनी क्षेत्र पुजारी कांकेर के जंगलों में घुसकर जवानों ने नक्सलियों के बड़े स्मारक को ध्वस्त कर दिया है। जवान जेसीबी लेकर स्मारक स्थल तक पहुंचे थे। बता दें कि, इसी इलाके में कुछ दिनों पहले जवानों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ हुई थी जिसमें 12 हार्डकोर नक्सली मारे गए थे। बता दें कि, यह इलाका छत्तीसगढ़-तेलंगाना की सीमा पर है। जवानों ने यहां हाल ही में फॉरवर्ड आपरेटिंग बेस कैंप स्थापित किया है।

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पिछले साल 90 फीट ऊंचे नक्सल स्मारक को किया था ध्वस्त
वहीं दिसंबर 2024 में जवानों ने बड़े नक्सल नेता के 90 फीट ऊंचे स्मारक को ध्वस्त किया। बीते कुछ सालों की बात करें तो बस्तर संभाग के अलग-अलग जिलों में बनाए गए 300 से ज्यादा स्मारकों को तोड़ा जा चुका है। नक्सलियों द्वारा विशेष अवसरों पर अपने साथियों की याद में अपने आधार क्षेत्र के गांवों और जंगलों में स्मारक बनाया जाता रहा है। अब फोर्स उनके आधार इलाकों में घुसकर एक ओर जहां मुठभेड़ में नक्सलियों को मार रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उनकी यादों को भी समाप्त कर रहे हैं। 
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अब तक सैकड़ों नक्सल स्मारक को किया ध्वस्त
जानकारी हो कि पिछले कुछ सालों में अब तक सैकड़ो छोटे बड़े नक्सल स्मारकों को जवानों ने ध्वस्त किया है। नक्सल कैलेंडर के मुताबिक नक्सली वर्ष में 6 बार विभिन्न आयोजन करते हैं जिसमें मारे गए साथियों की याद में स्मारक बनाकर उन्हें याद किया जाता है। इस दौरान आस-पास के गावों के सैकड़ों ग्रामीणों को भी आमंत्रित किया जाता है और नक्सलियों की सीएनएन टीम द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुती दी जाती है। इसके पीछे नक्सलियों की मंशा यह होती है कि, इलाके के लोगों में संगठन की मजबूती को दिखाएं और नए युवाओं को प्रभावित कर संगठन में शामिल कर सकें।

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