फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chhattisgarh ›   Bijapur News ›   Now there is no fear but the spirit of education 16 schools opened and 600 children took admission in Bijapur

बीजापुर: अब डर नहीं गूंजी शिक्षा की अलख, 16 स्कूल खुले तो 600 बच्चों ने लिया दाखिला

Mon, 21 Jul 2025 01:26 PM IST
Digvijay Singh अमर उजाला नेटवर्क, बीजापुर
अमर उजाला नेटवर्क, बीजापुर Published by: Digvijay Singh Updated Mon, 21 Jul 2025 01:26 PM IST
सार

बीजापुर में जहां कभी बच्चों के हाथों में किताबों की जगह खालीपन था और हर कोने में डर की दस्तक होती थी, आज वहां नन्ही मुस्कानें पढ़ाई की नई सुबह का स्वागत कर रही हैं।

विज्ञापन
Now there is no fear but the spirit of education 16 schools opened and 600 children took admission in Bijapur
अब डर नहीं गूंजी शिक्षा की अलख - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बीजापुर में जहां कभी बच्चों के हाथों में किताबों की जगह खालीपन था और हर कोने में डर की दस्तक होती थी, आज वहां नन्ही मुस्कानें पढ़ाई की नई सुबह का स्वागत कर रही हैं। नक्सल प्रभाव और पहाड़ी दुर्गमता से जूझते बीजापुर जिले के कोरचोली, तोड़का, एड्समेटा और बड़ेकाकलेड जैसे गांवों में पहली बार शिक्षा की दस्तक सुनाई दी है।

विज्ञापन


16 स्कूल, 600 से ज्यादा बच्चों के सपनों को मिली जमीन
बीजापुर प्रशासन ने 14 प्राथमिक और 2 माध्यमिक स्कूल खोलकर 600 से अधिक बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ दिया है। अधिकतर जगहों पर ये स्कूल झोपड़ियों और अस्थायी शेड्स में चल रहे हैं, लेकिन बच्चों का उत्साह देखते ही बनता है। उनका चेहरा कहता है , हम पढ़ना चाहते हैं, हम आगे बढ़ना चाहते हैं।
विज्ञापन


वेंडे स्कूल दायकाल एक जनआंदोलन बना
इस बदलाव की नींव ‘वेंडे स्कूल दायकाल नामक विशेष अभियान से रखी गई। कलेक्टर संबित मिश्रा के नेतृत्व में 2200 से अधिक शिक्षकों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और वालंटियर्स ने 600 गांवों में घर-घर जाकर लगभग 9650 ऐसे बच्चों की पहचान की, जो स्कूल से बाहर थे। इसके बाद बच्चों की उम्र के अनुसार माइक्रो प्लानिंग कर चरणबद्ध तरीके से उन्हें स्कूलों से जोड़ा गया।
विज्ञापन
विज्ञापन


जब सरकार पहली बार गांवों तक पहुँची
जिन गांवों में आज पढ़ाई हो रही है, वहां पहले कभी सरकारी तंत्र पहुंचा ही नहीं था। स्कूलों के माध्यम से  पहली बार वहां सरकारी उपस्थिति दर्ज हुई। ये सिर्फ स्कूल नहीं, सरकार और लोगों के बीच विश्वास की वापसी का पहला कदम हैं।

ड्रेस, बैग, किताबें  ताकि कोई पीछे न छूटे
बच्चों को यूनिफॉर्म, किताबें और स्कूल बैग मुफ्त दिए गए हैं ताकि शिक्षा में कोई भी आर्थिक बाधा न आए। एक बच्चे की मां कहती हैं, “पहले हमारे बच्चे जंगलों में भटकते थे, अब उन्हें कलम थमाई जा रही है। ये हमारे लिए सपना सच होने जैसा है।

बीजापुर में यह पहल केवल स्कूल खोलने तक सीमित नहीं है, यह एक शांतिपूर्ण सामाजिक क्रांति है। बुद्धिजीवियों व अफसरों का मानना है कि शिक्षा से बड़ा कोई हथियार नहीं हो सकता, जो आने वाली पीढ़ियों को हिंसा से दूर रख सके। आज जब गांव के लोग अपने बच्चों को पढ़ने जाते देख रहे हैं, तो वे न केवल गर्वित हैं, बल्कि इस बदलाव के साझेदार भी बन गए हैं। उन्होंने प्रशासन का आभार जताते हुए कहा अब हमारे बच्चे किताबों से अपना भविष्य लिखेंगे। 


शिक्षा ही असली बदलाव की चाबी है
बता दे जब प्रशासनिक इच्छाशक्ति, सामाजिक सहयोग और जनभागीदारी एकजुट होती है, तब पहाड़ भी रास्ता बन जाते हैं। ये स्कूल केवल कक्षाएं नहीं हैं, ये आशा की नई दीवारें हैं, जिनके भीतर भविष्य आकार ले रहा है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed