फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chhattisgarh ›   Balod News ›   Dogs are worshipped here lamp of faith is lit during Navratri story here is related to Nagavanshi period in Ba

Balod: यहां होती है कुत्ते की पूजा, नवरात्रि में जला आस्था का दीपक, नागवंशी काल से जुड़ी है यहां की कहानी

Mon, 31 Mar 2025 05:03 PM IST
Digvijay Singh अमर उजाला नेटवर्क, बालोद
अमर उजाला नेटवर्क, बालोद Published by: Digvijay Singh Updated Mon, 31 Mar 2025 05:03 PM IST
सार

पूरे देश में मां शक्ति के आराधना के पर्व नवरात्रि की धूम मची हुई है हर तरफ ज्योति कलश स्थापित किए गए हैं परंतु मां शक्ति की इस आराधना के पर्व में छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में एक ऐसा स्थल भी है जहां पर कुत्ते की पूजा की जा रही है। 

विज्ञापन
Dogs are worshipped here lamp of faith is lit during Navratri story here is related to Nagavanshi period in Ba
यहां होती है कुत्ते की पूजा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पूरे देश में मां शक्ति के आराधना के पर्व नवरात्रि की धूम मची हुई है हर तरफ ज्योति कलश स्थापित किए गए हैं परंतु मां शक्ति की इस आराधना के पर्व में छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में एक ऐसा स्थल भी है जहां पर कुत्ते की पूजा की जा रही है जी हां इस मंदिर का नाम है कुकुरदेव जिसकी मान्यता फनी राजवंशी राजाओं के ज़माने की है और इस कुकुरदेव मंदिर में आस्था के ज्योत भी जलाए गए हैं दरअसल इस मंदिर में कुत्ते के स्वरूप में उसे ईमानदारी की पूजा होती है जो प्राचीन समय में इस कुत्ते ने निभाई थी और ये मंदिर उसके दफन स्थल पर बना हुआ है साथ ही कई प्राचीन देवी देवताओं का मंदिर समूह भी यहां स्थापित हैं यह मंदिर पुरातत्व विभाग के संरक्षण में है।

विज्ञापन


विज्ञापन


दरअसल, कुकुर देव मंदिर एक स्मारक है। एक वफादार कुत्ते की याद में इसे बनाया गया था और लोग आज इसकी पूजा करते हैं पूजा एक कुत्ते के रूप में उसे ईमानदारी और स्वामी भक्ति की होती है जो प्राचीन कहानियां में दर्ज है इस मंदिर में आस्था के 95 ज्योति कलश स्थापित किए गए हैं शिव महापुराण की यहां पर गाथा सुनाई जा रही है और कुत्ते के इस स्मारक के आसपास देवी देवताओं की मूर्तियां इसलिए स्थापित की गई क्योंकि एक कुत्ते की पूजा कौन करेगा और आज यह मंदिर पूरे देश भर में आस्था की एक अनूठी मिसाल के रूप में जाना जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन


ग्रामीण बताते हैं कि यहां पर कुत्ता काटने से जो बीमारी फैलती है उसका इलाज होता है दूर-दूर से लोग यहां पर आते हैं और कुत्ते की वफादारी को सलाम करते हैं और कुकुर देव भगवान के साथ यहां पर कई सारे देवी देवताओं के मंदिर समूह स्थापित है पूरे छत्तीसगढ़ सहित देश भर के लोग यहां पर दीपक भी जलते हैं दोनों नवरात्र में और महाशिवरात्रि में यहां पर विशेष पूजा अर्चना किया जाता है।


जानिए कहानी
पुरातत्व विभाग के कर्मचारी महेश राम साहू ने बताया कि सदियों पहले एक बंजारा अपने परिवार के साथ इस गांव में आया था। उसके साथ एक कुत्ता भी था। गांव में एक बार अकाल पड़ गया तो बंजारे ने गांव के साहूकार से कर्ज लिया, लेकिन वो कर्ज वो वापस नहीं कर पाया। ऐसे में उसने अपना वफादार कुत्ता साहूकार के पास गिरवी रख दिया।कहते हैं कि एक बार साहूकार के यहां चोरी हो गई। चोरों ने सारा माल जमीन के नीचे गाड़ दिया और सोचा कि बाद में उसे निकाल लेंगे, लेकिन कुत्ते को उस लूटे हुए माल के बारे में पता चल गया और वो साहूकार को वहां तक ले गया। 

कुत्ते की बताई जगह पर साहूकार ने गड्ढा खोदा तो उसे अपना सारा माल मिल गया कुत्ते की वफादारी से खुश होकर साहूकार ने उसे आजाद कर देने का फैसला लिया। इसके लिए उसने बंजारे के नाम एक चिट्ठी लिखी और कुत्ते के गले में लटकाकार उसे उसके मालिक के पास भेज दिया। इधर कुत्ता जैसे ही बंजारे के पास पहुंचा, उसे लगा कि वो साहूकार के पास से भागकर आया है। इसलिए उसने गुस्से में आकर कुत्ते को पीट-पीटकर मार डाला। हालांकि बाद में बंजारे ने कुत्ते के गले में लटकी साहूकार की चिट्ठी पढ़ी तो वो हैरान हो गया। उसे अपने किए पर बहुत पछतावा हुआ। उसके बाद उसने उसी जगह कुत्ते को दफना दिया और उस पर स्मारक बनवा दिया। स्मारक को बाद में लोगों ने मंदिर का रूप दे दिया, जिसे आज लोग कुकुर मंदिर के नाम से जानते हैं। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed