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छत्तीसगढ़: 300 मछली पालकों को मिली आधुनिक तकनीक की ट्रेनिंग, उत्पादन बढ़ाने के बताए तरीके
Tue, 06 Oct 2026 01:07 PM IST
अमन कोशले
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
Published by: अमन कोशले
Updated Tue, 06 Oct 2026 01:07 PM IST
सार
किसानों को आधुनिक और वैज्ञानिक मछली पालन तकनीकों का प्रशिक्षण दिया गया। किसानों को पौंड लाइनर और केज कल्चर का प्रत्यक्ष भ्रमण कराया गया। प्रशिक्षण में मत्स्य बीज, तालाब प्रबंधन, आहार व्यवस्था और मछलियों में होने वाले रोगों की रोकथाम की जानकारी दी गई।
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300 मत्स्य किसानों को मिला प्रशिक्षण
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मछली पालन से जुड़े किसानों की आय बढ़ाने और उत्पादन को बेहतर बनाने के लिए जशपुर जिले में आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी कड़ी में मत्स्य पालन विभाग ने जिले के अलग-अलग विकासखंडों से चयनित 300 मत्स्य किसानों के लिए तीन दिवसीय प्रशिक्षण और भ्रमण कार्यक्रम आयोजित किया।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को पारंपरिक मत्स्य पालन के साथ वैज्ञानिक तकनीकों से जोड़ना और उन्हें ऐसी आधुनिक व्यवस्थाओं की जानकारी देना था, जिनसे कम संसाधनों में बेहतर उत्पादन हासिल किया जा सके।
पौंड लाइनर तकनीक को करीब से समझा
प्रशिक्षण में शामिल किसानों को जशपुर जिले में पौंड लाइनर तकनीक से संचालित आधुनिक मत्स्य पालन इकाइयों का भ्रमण कराया गया। किसानों ने मौके पर तालाब में पौंड लाइनर के इस्तेमाल, तालाब प्रबंधन और उत्पादन बढ़ाने की तकनीकों को समझा। विशेषज्ञों ने किसानों को बताया कि बेहतर तालाब प्रबंधन, गुणवत्तापूर्ण मत्स्य बीज और वैज्ञानिक तरीके से पालन करने से मछली उत्पादन को बढ़ाया जा सकता है।
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रजपुरी जलाशय में देखा केज कल्चर
प्रशिक्षण के दौरान किसानों को सरगुजा जिले के रजपुरी जलाशय का भी दौरा कराया गया। यहां किसान केज कल्चर तकनीक से हो रहे मछली पालन से रूबरू हुए। किसानों ने जलाशय में लगाए गए केज की कार्यप्रणाली को प्रत्यक्ष रूप से देखा और इस तकनीक के जरिए मछली उत्पादन बढ़ाने तथा अतिरिक्त आय के अवसरों की जानकारी हासिल की।
बीज से लेकर बीमारी नियंत्रण तक मिली जानकारी
तीन दिवसीय प्रशिक्षण में मत्स्य किसानों को मछली पालन के अलग-अलग चरणों की वैज्ञानिक जानकारी दी गई। इसमें मुख्य रूप से गुणवत्तापूर्ण मत्स्य बीज का चयन, मत्स्य बीज उत्पादन की आधुनिक तकनीक, तालाब का वैज्ञानिक प्रबंधन, संतुलित आहार का उपयोग, मछलियों की वृद्धि के लिए उचित देखभाल, मछलियों में होने वाली बीमारियों की पहचान और रोगों की रोकथाम और प्रबंधन जैसे विषयों पर विशेषज्ञों ने प्रशिक्षण दिया।
किसानों को अपने तालाबों में मिलेगा सीधा फायदा
प्रशिक्षण और भ्रमण के दौरान मिली व्यावहारिक जानकारी किसान अपने स्तर पर भी इस्तेमाल कर सकेंगे। वैज्ञानिक तरीके से तालाब प्रबंधन, बेहतर मत्स्य बीज, संतुलित आहार और समय पर बीमारी की रोकथाम से उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
मत्स्य पालन विभाग का मानना है कि आधुनिक तकनीकों को अपनाने से न सिर्फ मछली उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि मत्स्य पालन से जुड़े किसानों और हितग्राहियों की आमदनी में भी वृद्धि हो सकती है। तीन दिवसीय प्रशिक्षण एवं भ्रमण कार्यक्रम सहायक संचालक मत्स्य पालन जितेंद्र कुमार पैकरा के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया।
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कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को पारंपरिक मत्स्य पालन के साथ वैज्ञानिक तकनीकों से जोड़ना और उन्हें ऐसी आधुनिक व्यवस्थाओं की जानकारी देना था, जिनसे कम संसाधनों में बेहतर उत्पादन हासिल किया जा सके।
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पौंड लाइनर तकनीक को करीब से समझा
प्रशिक्षण में शामिल किसानों को जशपुर जिले में पौंड लाइनर तकनीक से संचालित आधुनिक मत्स्य पालन इकाइयों का भ्रमण कराया गया। किसानों ने मौके पर तालाब में पौंड लाइनर के इस्तेमाल, तालाब प्रबंधन और उत्पादन बढ़ाने की तकनीकों को समझा। विशेषज्ञों ने किसानों को बताया कि बेहतर तालाब प्रबंधन, गुणवत्तापूर्ण मत्स्य बीज और वैज्ञानिक तरीके से पालन करने से मछली उत्पादन को बढ़ाया जा सकता है।
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रजपुरी जलाशय में देखा केज कल्चर
प्रशिक्षण के दौरान किसानों को सरगुजा जिले के रजपुरी जलाशय का भी दौरा कराया गया। यहां किसान केज कल्चर तकनीक से हो रहे मछली पालन से रूबरू हुए। किसानों ने जलाशय में लगाए गए केज की कार्यप्रणाली को प्रत्यक्ष रूप से देखा और इस तकनीक के जरिए मछली उत्पादन बढ़ाने तथा अतिरिक्त आय के अवसरों की जानकारी हासिल की।
बीज से लेकर बीमारी नियंत्रण तक मिली जानकारी
तीन दिवसीय प्रशिक्षण में मत्स्य किसानों को मछली पालन के अलग-अलग चरणों की वैज्ञानिक जानकारी दी गई। इसमें मुख्य रूप से गुणवत्तापूर्ण मत्स्य बीज का चयन, मत्स्य बीज उत्पादन की आधुनिक तकनीक, तालाब का वैज्ञानिक प्रबंधन, संतुलित आहार का उपयोग, मछलियों की वृद्धि के लिए उचित देखभाल, मछलियों में होने वाली बीमारियों की पहचान और रोगों की रोकथाम और प्रबंधन जैसे विषयों पर विशेषज्ञों ने प्रशिक्षण दिया।
किसानों को अपने तालाबों में मिलेगा सीधा फायदा
प्रशिक्षण और भ्रमण के दौरान मिली व्यावहारिक जानकारी किसान अपने स्तर पर भी इस्तेमाल कर सकेंगे। वैज्ञानिक तरीके से तालाब प्रबंधन, बेहतर मत्स्य बीज, संतुलित आहार और समय पर बीमारी की रोकथाम से उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
मत्स्य पालन विभाग का मानना है कि आधुनिक तकनीकों को अपनाने से न सिर्फ मछली उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि मत्स्य पालन से जुड़े किसानों और हितग्राहियों की आमदनी में भी वृद्धि हो सकती है। तीन दिवसीय प्रशिक्षण एवं भ्रमण कार्यक्रम सहायक संचालक मत्स्य पालन जितेंद्र कुमार पैकरा के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया।