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सामाजिक बाधाएं तोड़कर वैवाहिक बंधन में बंधे 15 ट्रांसजेंडर
Mon, 01 Apr 2019 04:30 AM IST
गौरव द्विवेदी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रायपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रायपुर
Published by: गौरव द्विवेदी
Updated Mon, 01 Apr 2019 04:30 AM IST
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ट्रांसजेंडर वैवाहिक कार्यक्रम, रायपुर
आठ साल पहले, जब सलोनी को गुलाम नबी अंसारी से प्यार हुआ था, तो उसके ट्रांसजेंडर होने के कारण इस जोड़े को समाज और परिजनों के तमाम प्रतिबंधों का सामना करना पड़ा था। लेकिन इस जोड़े ने हार नहीं मानी और छत्तीसगढ़ में 15 ट्रांसजेंडर जोड़ों के सामूहिक विवाह आयोजन के दौरान उन्होंने सभी तरह के सामाजिक बंधन तोड़कर खुद को वैवाहिक बंधन में जकड़ लिया।
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देश में ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए अपनी तरह के इस पहले सामूहिक विवाह समारोह का आयोजन शनिवार को किया गया। 28 साल के गुलाम नबी से शादी करने के बाद 33 साल की सलोनी ने शाहरुख खान की एक फिल्म का डायलॉग बोलकर अपनी खुशी का इजहार किया। सलोनी ने कहा, यदि आप किसी को अपने दिल की गहराई से चाहते हैं, तो पूरी कायनात आपको उससे मिलाने में जुट जाती है।
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सलोनी और अंसारी महाराष्ट्र के नागपुर जिले के रहने वाले हैं, लेकिन उनका एक-दूसरे के साथ जिंदगी बिताने का सपना 300 किलोमीटर दूर रायपुर में हकीकत में बदला। शादी करने वाले 15 जोड़ों में 7 छत्तीसगढ़, 2-2 गुजरात, मध्यप्रदेश और बिहार से, जबकि 1-1 महाराष्ट्र व पश्चिम बंगाल से आए थे।
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हिंदू रीति-रिवाजों से कराए गए इस समारोह के आयोजन में रायपुर की ट्रांसजेंडर सामाजिक कार्यकर्ता विद्या राजपूत और उनकी टीम ने अहम भूमिका निभाई। राजपूत ने कहा, ट्रांसजेंडरों को अकेलेपन और एक तरह के सामाजिक बहिष्कार का सामना करना पड़ता है। इस कारण हमने ट्रांसजेंडरों के सामूहिक विवाह का आयोजन करने का निर्णय लिया, जिससे जनता में यह संदेश जाए कि हमें भी प्यार और शादी करने का हक है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से पूरी हुई सलोनी-अंसारी की आशा
सुप्रीम कोर्ट ने 2014 में ट्रांसजेंडरों को तीसरे लिंग के तौर पर मान्यता दी और उन्हें सभी सांविधानिक हक व स्वतंत्रता दिए जाने के आदेश दिए। शीर्ष अदालत के इस आदेश ने सलोनी और अंसारी के मन में आशा जगाई। उन्होंने कहा, शुरुआत में हमने अपने रिश्ते को छिपाया। जब हमने अपने परिजनों को इसके बारे में बताया, तो उन्होंने स्वीकार नहीं किया।
यह ट्रांसजेंडरों के सामने उनके परिवार की तरफ से आने वाली आम समस्या है। इस नवविवाहत जोड़े ने कहा, शीर्ष अदालत के आदेश के बाद हमने खुलकर एकसाथ रहने का निर्णय लिया। हमने शादी करने का प्रयास किया, लेकिन नहीं कर पाए। जब हमने इस सामूहिक विवाह आयोजन के बारे में सुना, तो हम यहां आ गए और यहां हमारा सपना पूरा हो गया।