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फुटबॉल स्टेडियम से चमकेगा युवाओं कार करियर, दिव्यांग खिलाड़ियों को मिला तौहफा
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चंडीगढ़। इस साल शहर के खिलाड़ियों ने देश ही नहीं विदेशों में शानदार खेल दिखाते हुए अपना परचम लहराया है। इसके साथ ही नया इंफ्रास्ट्रक्चर भी खिलाड़ियों को उपलब्ध कराया गया, जिससे अपने वाले समय में शहर के खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतकर देश का नाम रोशन करेंगे। वहीं शहर के दिव्यांग क्रिकेट खिलाड़ियों को बीसीसीआई ने अपना कर उनका भविष्य उज्ज्वल कर दिया है।
दो युवा क्रिकेटर वर्ल्ड कप में शुमार हुए
शहर के दो युुवा क्रिकेट खिलाड़ी राज अंगद बावा और हरनूर सिंह का वर्ल्ड कप अंडर-19 के लिए भारतीय अंडर-19 टीम में चयन हुआ है। वर्ल्ड कप वेस्टइंडीज में 14 जनवरी से 5 फरवरी तक खेला जाएगा। दोनों युवा क्रिकेट खिलाड़ी यूटी क्रिकेट एसोसिएशन की ओर से घरेलू सीरीज में खेलते हैं। राज अंगद बावा सेक्टर- 50 निवासी एसडी कॉलेज सेक्टर- 32 के बीए प्रथम वर्ष के छात्र हैं। राजअंगद बावा ने पिछले महीने बीसीसीआई की ओर से खेली गई वीनू मांकड़ ट्रॉफी में चंडीगढ़ टीम की कमान संभाली थी। यूटीसीए डोमेस्टिक टूर्नामेंट में बावा ने प्लाजा जोन की कप्तानी की थी। वहीं हरनूर सिंह सेक्टर 30 निवासी है और एसडी कॉलेज सेक्टर 32 के बीए प्रथम वर्ष के छात्र है। वीनू मांकड़ ट्राफी में चंडीगढ़ टीम के लिए सलामी बल्लेबाज के तौर पर मैदान पर उतरे थे। यूटीसीए डोमेस्टिक टूर्नामेंट में हरनूर ने सुखना जोन की कप्तानी की थी और कुल 419 रन बनाए थे।
टोक्यो ओलंपिक में सोना
डीएवी कॉलेज के पूर्व छात्र रहे नीरज चोपड़ा ने लंबे इंतजार के बाद देशवासियों को स्वर्ण पदक जीतकर खुशी मनाने का मौका दिया। नीरज ने टोक्यो ओलंपिक में जेवलिन थ्रो (भाला फेंक) में 87.58 मीटर भाला फेंक कर भारत की झोली में स्वर्ण पदक डाला। नीरज ने अपने जेवलिन थ्रो सीखने की शुरुआत पंचकूला के ताऊ देवी लाल स्टेडियम में की थी। यहां पर जेवलिन थ्रो के कोच नसीम अहमद से ट्रेनिंग ली है। यहां ट्रेनिंग के साथ डीएवी कॉलेज सेक्टर- 10 में पढ़ाई भी जारी रखी।
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41 वर्षों बाद कांस्य पदक
टोक्यो ओलंपिक में भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने कांस्य पदक हासिल किया। पिछले 41 वर्षों के अंतराल के बाद भारत ने हॉकी में यह पदक जीता। यह एक बेहतर उपलब्धि रही। कांस्य पदक जीतने वाली भारतीय पुरुष टीम में शहर की हॉकी अकादमी के दो ट्रेंनी रहे रुपिंदर पाल सिंह और गुरजंट सिंह शामिल थे। इन दोनों ने शहर की यूटी खेल विभाग की हॉकी अकादमी में हॉकी की एबीसीडी सीखी और पहले स्टेट, फिर जूनियर और इसके बाद राष्ट्रीय सीनियर हॉकी टीम में जगह बनाने में कामयाब रहे थे।
जब सचिन तेंदुलकर भी हरलीन देओल की हो गए मुरीद
शहर से क्रिकेट की बारीकियां सीख भारतीय महिला सीनियर क्रिकेट टीम में जगह बनाने वाली हरलीन देयोल एक बेहतरीन ऑलराउंडर खिलाड़ी हैं। इस साल जुलाई में हरलीन देयोल ने इंग्लैंड के खिलाफ खेले गए एक मुकाबले में इंग्लैंड की बल्लेबाज एमी जोंस ने लॉग ऑन के ऊपर से छक्का मारने की कोशिश की, लेकिन हरलीन देयोल ने पहले छलांग लागकर गेंद को पकड़ा। इसके बाद जब उन्हें लगा कि गेंद बाउंड्री के बाहर गिरेगी तो उन्होंने हवा में ही गेंद का अंदर फेंक दिया। इसके बाद बाउंड्री के अंदर आकर हैरत भरा कैच थाम लिया। यह हैरत भरा कैच पूरी दुनिया को हैरान कर गया। सोशल मीडिया इस कैच का वीडियो तेजी से वायरल हुआ। जिसके बाद सचिन तेंदुकर इस खिलाड़ी के मुरीद हो गए थे।
पहली बार मिली संतोष ट्रॉफी की मेजबानी
चंडीगढ़ को पहली बार नॉर्थ इंडिया की फुटबॉल के खेल की संतोष ट्रॉफी की मेजबानी मिली थी। इसके मुकाबले सेक्टर- 7 स्थित खेल परिसर में सफलतापूर्वक हुए। चंडीगढ़ सहित देश की नामी फुटबॉल टीमों और क्लबों ने इसमें शिरकत की थी। कोरोना संक्रमण से टीमों के खिलाड़ियों को बचाने के लिए व्यापक प्रंबध भी किए गए थे। सभी टीमें के खिलाड़ियाें, कोचों, मैनजरों, बस ड्राइवरों का कोविड टेस्ट भी कराया गया था।
नई सौगात
अंतरराष्ट्रीय स्तर का फुटबॉल मैदान
सेक्टर-17 में फुटबॉल का अंतरराष्ट्रीय स्तर का नया फुटबॉल स्टेडियम का निमार्ण किया गया है। करोड़ों की लागात से तैयार किए यह फुटबॉल स्टेडियम में सभी अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस है। खिलाड़ियों के लिए बेहतर मैदान से लेकर पवेलियन और दर्शकों के बैठने की बेहतर व्यवस्था भी दी गई है।
बीसीसीआई ने दिव्यांग खिलाड़ियों को अपनाया
इसी महीने बीसीसीआई ने एतिहासिक निर्णय लेते हुए दिव्यांग क्रिकेट खिलाड़ियों को अपनाने लिया था। यह फैसला शहर के रहने वाले व्हील चेयर, ब्लाइंड क्रिकेट सुनने ओर बोलने में अक्षम क्रिकेट खिलाड़ियाें की टीमें के लिए किसी सौगात से कम नहीं था। इस फैसले से इन दिव्यांग क्रिकेट खिलाड़ियाें का भविष्य सुधर जाएगा।
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दो युवा क्रिकेटर वर्ल्ड कप में शुमार हुए
शहर के दो युुवा क्रिकेट खिलाड़ी राज अंगद बावा और हरनूर सिंह का वर्ल्ड कप अंडर-19 के लिए भारतीय अंडर-19 टीम में चयन हुआ है। वर्ल्ड कप वेस्टइंडीज में 14 जनवरी से 5 फरवरी तक खेला जाएगा। दोनों युवा क्रिकेट खिलाड़ी यूटी क्रिकेट एसोसिएशन की ओर से घरेलू सीरीज में खेलते हैं। राज अंगद बावा सेक्टर- 50 निवासी एसडी कॉलेज सेक्टर- 32 के बीए प्रथम वर्ष के छात्र हैं। राजअंगद बावा ने पिछले महीने बीसीसीआई की ओर से खेली गई वीनू मांकड़ ट्रॉफी में चंडीगढ़ टीम की कमान संभाली थी। यूटीसीए डोमेस्टिक टूर्नामेंट में बावा ने प्लाजा जोन की कप्तानी की थी। वहीं हरनूर सिंह सेक्टर 30 निवासी है और एसडी कॉलेज सेक्टर 32 के बीए प्रथम वर्ष के छात्र है। वीनू मांकड़ ट्राफी में चंडीगढ़ टीम के लिए सलामी बल्लेबाज के तौर पर मैदान पर उतरे थे। यूटीसीए डोमेस्टिक टूर्नामेंट में हरनूर ने सुखना जोन की कप्तानी की थी और कुल 419 रन बनाए थे।
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टोक्यो ओलंपिक में सोना
डीएवी कॉलेज के पूर्व छात्र रहे नीरज चोपड़ा ने लंबे इंतजार के बाद देशवासियों को स्वर्ण पदक जीतकर खुशी मनाने का मौका दिया। नीरज ने टोक्यो ओलंपिक में जेवलिन थ्रो (भाला फेंक) में 87.58 मीटर भाला फेंक कर भारत की झोली में स्वर्ण पदक डाला। नीरज ने अपने जेवलिन थ्रो सीखने की शुरुआत पंचकूला के ताऊ देवी लाल स्टेडियम में की थी। यहां पर जेवलिन थ्रो के कोच नसीम अहमद से ट्रेनिंग ली है। यहां ट्रेनिंग के साथ डीएवी कॉलेज सेक्टर- 10 में पढ़ाई भी जारी रखी।
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41 वर्षों बाद कांस्य पदक
टोक्यो ओलंपिक में भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने कांस्य पदक हासिल किया। पिछले 41 वर्षों के अंतराल के बाद भारत ने हॉकी में यह पदक जीता। यह एक बेहतर उपलब्धि रही। कांस्य पदक जीतने वाली भारतीय पुरुष टीम में शहर की हॉकी अकादमी के दो ट्रेंनी रहे रुपिंदर पाल सिंह और गुरजंट सिंह शामिल थे। इन दोनों ने शहर की यूटी खेल विभाग की हॉकी अकादमी में हॉकी की एबीसीडी सीखी और पहले स्टेट, फिर जूनियर और इसके बाद राष्ट्रीय सीनियर हॉकी टीम में जगह बनाने में कामयाब रहे थे।
जब सचिन तेंदुलकर भी हरलीन देओल की हो गए मुरीद
शहर से क्रिकेट की बारीकियां सीख भारतीय महिला सीनियर क्रिकेट टीम में जगह बनाने वाली हरलीन देयोल एक बेहतरीन ऑलराउंडर खिलाड़ी हैं। इस साल जुलाई में हरलीन देयोल ने इंग्लैंड के खिलाफ खेले गए एक मुकाबले में इंग्लैंड की बल्लेबाज एमी जोंस ने लॉग ऑन के ऊपर से छक्का मारने की कोशिश की, लेकिन हरलीन देयोल ने पहले छलांग लागकर गेंद को पकड़ा। इसके बाद जब उन्हें लगा कि गेंद बाउंड्री के बाहर गिरेगी तो उन्होंने हवा में ही गेंद का अंदर फेंक दिया। इसके बाद बाउंड्री के अंदर आकर हैरत भरा कैच थाम लिया। यह हैरत भरा कैच पूरी दुनिया को हैरान कर गया। सोशल मीडिया इस कैच का वीडियो तेजी से वायरल हुआ। जिसके बाद सचिन तेंदुकर इस खिलाड़ी के मुरीद हो गए थे।
पहली बार मिली संतोष ट्रॉफी की मेजबानी
चंडीगढ़ को पहली बार नॉर्थ इंडिया की फुटबॉल के खेल की संतोष ट्रॉफी की मेजबानी मिली थी। इसके मुकाबले सेक्टर- 7 स्थित खेल परिसर में सफलतापूर्वक हुए। चंडीगढ़ सहित देश की नामी फुटबॉल टीमों और क्लबों ने इसमें शिरकत की थी। कोरोना संक्रमण से टीमों के खिलाड़ियों को बचाने के लिए व्यापक प्रंबध भी किए गए थे। सभी टीमें के खिलाड़ियाें, कोचों, मैनजरों, बस ड्राइवरों का कोविड टेस्ट भी कराया गया था।
नई सौगात
अंतरराष्ट्रीय स्तर का फुटबॉल मैदान
सेक्टर-17 में फुटबॉल का अंतरराष्ट्रीय स्तर का नया फुटबॉल स्टेडियम का निमार्ण किया गया है। करोड़ों की लागात से तैयार किए यह फुटबॉल स्टेडियम में सभी अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस है। खिलाड़ियों के लिए बेहतर मैदान से लेकर पवेलियन और दर्शकों के बैठने की बेहतर व्यवस्था भी दी गई है।
बीसीसीआई ने दिव्यांग खिलाड़ियों को अपनाया
इसी महीने बीसीसीआई ने एतिहासिक निर्णय लेते हुए दिव्यांग क्रिकेट खिलाड़ियों को अपनाने लिया था। यह फैसला शहर के रहने वाले व्हील चेयर, ब्लाइंड क्रिकेट सुनने ओर बोलने में अक्षम क्रिकेट खिलाड़ियाें की टीमें के लिए किसी सौगात से कम नहीं था। इस फैसले से इन दिव्यांग क्रिकेट खिलाड़ियाें का भविष्य सुधर जाएगा।