दुनिया को अलविदा कह दो घरों में ऐसे 'जिंदा' रहेगा ये शख्स, पिता बोले- वह हमारा रियल हीरो
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यमुनानगर के 21 वर्षीय दीपक कुमार यादव भले ही इस दुनिया में न हो लेकिन वे दो घरों को रोशन कर गए हैं। दीपक 7 जुलाई को परिवार व दोस्तों के साथ हरिद्वार यात्रा पर थे। घर से कुछ ही दूर निकले थे, तभी उनकी कार एक दूसरी कार से टकरा गई। इससे दीपक के सिर पर गहरी चोट आई और वह कोमा में चले गए।
उन्हें पहले यमुनानगर के प्राइमरी अस्पताल में एडमिट कराया गया। हालत में कोई सुधार नहीं होने पर पीजीआई चंडीगढ़ रेफर कर दिया गया। पीजीआई में आने के बाद भी उनकी हालत जस की तस बनी रही। काफी प्रयासों के बाद जब कोई रिस्पांस नहीं मिला तो उन्हें ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया।
उसके बाद ट्रांसप्लांट को-आर्डिनेटर नवदीप बंसल ने दीपक के परिवार से बातकर आर्गन डोनेशन की बात। प्रारंभिक बातचीत के दौरान परिजनों ने दीपक के आर्गन डोनेट करने से मना कर दिया, क्योंकि दीपक के अचानक से चले जाने से पूरा परिवार सदमे में था। दूसरे दौर की बातचीत में परिवार आर्गन डोनेशन के लिए तैयार हो गया।
उसके बाद उसकी दोनों किडनी डोनेट कर दी गई, जो दो मरीजों में ट्रांसप्लांट की गई। दीपक केमिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा कर रहे थे। दीपक के पिता जगदीश कुमार यादव ने दुखी मन से बताया कि दीपक के जाने से पूरा परिवार उजड़ गया है। वह हमें बहुत खुशी व प्यार देता था। जाते वक्त भी वह दो लोगों को नया जीवन दे गया है।
वह हमारा रियल हीरो है। हमें उस पर गर्व है। दीपक के भाई संदीप कुमार यादव ने बताया कि अब भी सदमे में हैं और उन्हें विश्वास नहीं हो रहा है कि उनका भाई अब इस दुनिया में नहीं है। जब वह जिंदा था तो नियमित रक्तदान कर लोगों को नया जीवन देता था। मरने के बाद भी वह दो लोगों को नया जीवन दे गया है।
मुश्किल घड़ी में बड़ा दिल वाला फैसला
दीपक की फैमिली के लिए काफी मुश्किल वक्त था। ऐसे वक्त पर कोई बड़ा फैसला लेना आसान नहीं होता। लेकिन उन्होंने बड़ा दिल दिखाते हुए यह फैसला लिया और दो लोगों की नई जिंदगी मिल गई। -अशोक कुमार, कार्यवाहक नोडल अधिकारी, रोटो