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वीर सिंहः जिसने विकलांगता को मात दे, बना डाली व्हील चेयर क्रिकेट टीम
संजीव पंगोत्रा/अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
Updated Mon, 01 Aug 2016 11:50 AM IST
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Divyag Cricket Team
- फोटो : amar ujala
इंसान के हौसले बुलंद हों तो वह मंजिल को छू लेता है। यह बात दिव्यांग वीर सिंह पर सटीक बैठती है। इन्होंने हिम्मत नहीं हारी और एक क्रिकेट टीम तैयार कर ली। जिसके वह खुद कप्तान हैं।
वीर सिंह ने अपनी तरह के दिव्यांग साथियों को क्रिकेट के खेल में माहिर बनाया। इनकी चंडीगढ़ की व्हील चेयर क्रिकेट टीम ने इलाहाबाद में आयोजित ट्राई सीरीज टूर्नामेंट में रनरअप ट्रॉफी जीतकर साबित किया है कि वह किसी से कम नहीं हैं।
अब इंटरनेशनल खिलाड़ी हैं
मूलरूप से मोगा के पास गांव के रहने वाले वीर सिंह का चयन भारतीय व्हील चेयर क्रिकेट टीम में हुआ है। इस टीम को अगले महीने मलयेशिया में होने वाले इंटरनेशनल क्रिकेट टूर्नामेंट में हिस्सा लेना है।
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वीर सिंह ने अपनी तरह के दिव्यांग साथियों को क्रिकेट के खेल में माहिर बनाया। इनकी चंडीगढ़ की व्हील चेयर क्रिकेट टीम ने इलाहाबाद में आयोजित ट्राई सीरीज टूर्नामेंट में रनरअप ट्रॉफी जीतकर साबित किया है कि वह किसी से कम नहीं हैं।
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अब इंटरनेशनल खिलाड़ी हैं
मूलरूप से मोगा के पास गांव के रहने वाले वीर सिंह का चयन भारतीय व्हील चेयर क्रिकेट टीम में हुआ है। इस टीम को अगले महीने मलयेशिया में होने वाले इंटरनेशनल क्रिकेट टूर्नामेंट में हिस्सा लेना है।
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Divyang Cricket Team
- फोटो : amar ujala
ढाई साल के थे तो बुखार ने लिया चपेट में
वीर सिंह ने बताया कि जब वह ढाई साल के थे तो बुखार ने चपेट में ले लिया। गलत दवा की वजह से वीर सिंह को पोलियो हो गया। पढ़ाई लिखाई लुधियाना में की। एक दिन भाई ने व्हील चेयर पर क्रिकेट खेलते हुए देखा तो कहा कि तुम बेहतर खेलते हो इसी में ध्यान लगाओ।
और जुट गए टीम बनाने
क्रिकेट का जनून ऐसा सवार हुआ कि वीर सिंह ने अपने जैसे साथियों को साथ लेकर एक क्रिकेट की टीम बना ली। इस टीम में एक दो नौकरी करते हैं, बाकी पढ़ाई करते हैं। टीम के खिलाड़ी सेक्टर 23 में अभ्यास करते हैं।
स्पोंसर नहीं मिल रहे
वीर सिंह ने बताया कि हमारी किसी ने कोई मदद नहीं की और न ही कोई स्पोंसर मिला। दिक्कतों के बाद भी खुद के जेब खर्च से इलाहाबाद में आयोजित ट्राई सीरीज टूर्नामेंट में गए और रनरअप ट्रॉफी जीती। वीर सिंह के अनुसार अगर कोई हमारी टीम को स्पोंसर करे तो हमारी टीम और बेहतर कर सकती है।
वीर सिंह ने बताया कि जब वह ढाई साल के थे तो बुखार ने चपेट में ले लिया। गलत दवा की वजह से वीर सिंह को पोलियो हो गया। पढ़ाई लिखाई लुधियाना में की। एक दिन भाई ने व्हील चेयर पर क्रिकेट खेलते हुए देखा तो कहा कि तुम बेहतर खेलते हो इसी में ध्यान लगाओ।
और जुट गए टीम बनाने
क्रिकेट का जनून ऐसा सवार हुआ कि वीर सिंह ने अपने जैसे साथियों को साथ लेकर एक क्रिकेट की टीम बना ली। इस टीम में एक दो नौकरी करते हैं, बाकी पढ़ाई करते हैं। टीम के खिलाड़ी सेक्टर 23 में अभ्यास करते हैं।
स्पोंसर नहीं मिल रहे
वीर सिंह ने बताया कि हमारी किसी ने कोई मदद नहीं की और न ही कोई स्पोंसर मिला। दिक्कतों के बाद भी खुद के जेब खर्च से इलाहाबाद में आयोजित ट्राई सीरीज टूर्नामेंट में गए और रनरअप ट्रॉफी जीती। वीर सिंह के अनुसार अगर कोई हमारी टीम को स्पोंसर करे तो हमारी टीम और बेहतर कर सकती है।