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मतदाता पहचान पत्र चाहिए तो ये पढ़ें
अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 31 Dec 2013 10:08 AM IST
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शहर में मतदाताओं की संख्या बढ़ गई है। चंडीगढ़ संसदीय क्षेत्र में मतदाताओं की संख्या 5 लाख से ऊपर हो गई है।
चुनाव विभाग की ओर से मतदाता सूची में संशोधन के लिए 1 से 30 नवंबर तक चलाए गए विशेष अभियान के बाद चंडीगढ़ में 55 हजार मतदाता बढ़ गए हैं।
नए मतदाताओं के नाम 6 जनवरी, 2014 को प्रकाशित होने वाली मतदाता सूची में भी शामिल होंगे। उन्हें 25 जनवरी को राष्ट्रीय मतदाता दिवस पर मतदाता पहचान पत्र दिए जाएंगे।
एक तरफ जहां इस मतदाता सूची में नए मतदाता शामिल हुए हैं, वहीं कुछ के नाम कटे भी हैं। यह नई मतदाता सूची अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव के दौरान प्रभावी होगी। हालांकि चुनाव से पहले भी नए मत बनेंगे।
ध्यान रहे कि दिसंबर 2011 में हुए नगर निगम चुनाव में चंडीगढ़ में 5,06,171 मतदाता थे। चुनाव से पहले 27,374 नए मतदाता जुड़े थे।
इसके बाद फरवरी, 2012 में मतदाता और बढ़ गए थे लेकिन संख्या पांच लाख से कम हो गई थी। चुनाव विभाग ने ब्लॉक लेवल अफसर (बीएलओ) को घर-घर भेजकर सर्वे कराया था जिसका उद्देश्य मतदाताओं के कम होने का कारण पता करना था।
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ये मतदाता या तो अपने पुराने निवास से कहीं और शिफ्ट कर गए हैं या दूसरे शहर में चले गए हैं। इसके अलावा कुछ का निधन भी हो गया था। इन मतदाताओं के नाम सूची से हटाने से पहले उन्हें एक बार नोटिस भेजा गया था।
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चुनाव विभाग की ओर से मतदाता सूची में संशोधन के लिए 1 से 30 नवंबर तक चलाए गए विशेष अभियान के बाद चंडीगढ़ में 55 हजार मतदाता बढ़ गए हैं।
नए मतदाताओं के नाम 6 जनवरी, 2014 को प्रकाशित होने वाली मतदाता सूची में भी शामिल होंगे। उन्हें 25 जनवरी को राष्ट्रीय मतदाता दिवस पर मतदाता पहचान पत्र दिए जाएंगे।
एक तरफ जहां इस मतदाता सूची में नए मतदाता शामिल हुए हैं, वहीं कुछ के नाम कटे भी हैं। यह नई मतदाता सूची अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव के दौरान प्रभावी होगी। हालांकि चुनाव से पहले भी नए मत बनेंगे।
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ध्यान रहे कि दिसंबर 2011 में हुए नगर निगम चुनाव में चंडीगढ़ में 5,06,171 मतदाता थे। चुनाव से पहले 27,374 नए मतदाता जुड़े थे।
इसके बाद फरवरी, 2012 में मतदाता और बढ़ गए थे लेकिन संख्या पांच लाख से कम हो गई थी। चुनाव विभाग ने ब्लॉक लेवल अफसर (बीएलओ) को घर-घर भेजकर सर्वे कराया था जिसका उद्देश्य मतदाताओं के कम होने का कारण पता करना था।
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ये मतदाता या तो अपने पुराने निवास से कहीं और शिफ्ट कर गए हैं या दूसरे शहर में चले गए हैं। इसके अलावा कुछ का निधन भी हो गया था। इन मतदाताओं के नाम सूची से हटाने से पहले उन्हें एक बार नोटिस भेजा गया था।