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Haryana Election: सात चुनावी योद्धाओं को फिर मिली हार, निर्मल सिंह और अशोक अरोड़ा की खुली किस्मत
Fri, 11 Oct 2024 10:20 PM IST
अंकेश ठाकुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: अंकेश ठाकुर
Updated Fri, 11 Oct 2024 10:20 PM IST
सार
हरियाणा चुनाव में बार बार चुनावी मैदान में उतरने वाले सात नेता इस बार फिर हार गए हैं। इस बार जीत की आस लगाए बैठे इन नेताओं को जनता ने फिर नकार दिया है।
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हरियाणा विधानसभा चुनाव।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
हरियाणा विधानसभा चुनाव में हर बार ताल ठोकने और हर बार हार का सामना करने वाले चुनावी योद्धा इस बार भी मिथक नहीं तोड़ पाए। इस बार भी इनको हार से ही सब्र करना पड़ा। हरियाणा में आधा दर्जन से अधिक नेताओं को इस बार भी जनता ने नकार दिया है। इनमें वीरेंद्र मराठा, वीरेंद्र राठौर, सज्जन ढुल, राव नरेंद्र. मनीष ग्रोवर, चित्रा सरवारा और रमेश दलाल के नाम शामिल हैं।
हालांकि, लगातार तीन बार चुनाव हारने के बाद इस बार पूर्व मंत्री निर्मल सिंह चुनाव जीतने में कामयाब रहे। इनके अलावा, मनीष ग्रोवर लगातार और निर्दलीय चित्रा सरवारा को लगातार दूसरी बार हार का सामना करना पड़ा है। इनके साथ ही नारनौल विधानसभा से कांग्रेस प्रत्याशी नरेंद्र सिंह को लगातार तीसरी बार हार का सामना करना पड़ा। 2014 और 2019 में वह चुनाव हार चुके हैं।
4531 वोटों से फिर रह गए राठौर
घरौंडा से कांग्रेस की टिकट पर चौथी बार उतरे वीरेंद्र राठौर इस बार भाजपा के हरविंद्र कल्याण से हारे हैं। राठौर को 82705 वोट मिले हैं और कल्याण को 87236 वोट मिले हैं। इससे पहले राठौर 2005, 2009 और 2014 का चुनाव कांग्रेस ही टिकट पर हारते रहे हैं। राठौर ने अपनी हार के लिए कांग्रेस के ही तीन नेताओं को जिम्मेदार ठहराया है। साथ ही पार्टी के खिलाफ काम करने वाले नेताओं पर कार्रवाई के लिए पार्टी को पत्र भी लिखा है।
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मराठा इस बार भी नहीं हुए पार
मराठा वीरेंद्र वर्मा भी आज तक कोई चुनाव नहीं जीत पाए हैं। इस बार वे असंध से एनसीपी के टिकट पर मैदान में उतरे थे। लेकिन इस बार भी जनता ने उनका साथ नहीं दिया। मराठा को मात्र 4218 वोट ही मिल पाए। मराठा 2005 में एकता शक्ति पार्टी से नीलोखेड़ी विधानसभा क्षेत्र, 2009 में असंध, 2014 में चुनाव लड़े, लेकिन जीत नहीं पाए। पिछला लोकसभा चुनाव करनाल सीट से एनसीपी-इनेलो गठबंधन से लड़ा था और 2014 में भी लोकसभा का चुनाव लड़ा था, लेकिन जीत नसीब नहीं हो सकी।
सज्जन सिंह ढुल को नहीं मिला जनता का आशीर्वाद
रिटायर्ड अधिकारी सज्जन सिंह ढुल कैथल जिले की पूंडरी विधानसभा सीट से लगातार दो बार चुनाव हार चुके हैं। इस बार वह कांग्रेस के टिकट के दावेदार थे, लेकिन टिकट नहीं मिला तो वह निर्दलीय ही चुनाव में कूद पड़े। लेकिन वह इस बार भी जनता का आशीर्वाद नहीं ले पाए और उनको 5 हजार से भी कम वोट मिल पाए।
लगातार हार के बाद अरोड़ा और निर्मल सिंह की खुली किस्मत
अंबाला शहर से इस बार कांग्रेस के प्रत्याशी निर्मल सिंह लगातार तीन चुनाव हार चुके हैं। निर्मल सिंह ने अंबाला छावनी सीट से 2009 व 2014 में कांग्रेस से चुनाव लड़ा था। इसके अलावा अंबाला शहर सीट से निर्दलीय विधानसभा चुनाव लड़ा, मगर जीते नहीं। वहीं, अशोक अरोड़ा पिछले दो चुनाव लगातार हारते रहे हैं, लेकिन इस बार उन्होंने भाजपा के सुभाष सुधा को हराया है और विधानसभा पहुंचें हैं।
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हालांकि, लगातार तीन बार चुनाव हारने के बाद इस बार पूर्व मंत्री निर्मल सिंह चुनाव जीतने में कामयाब रहे। इनके अलावा, मनीष ग्रोवर लगातार और निर्दलीय चित्रा सरवारा को लगातार दूसरी बार हार का सामना करना पड़ा है। इनके साथ ही नारनौल विधानसभा से कांग्रेस प्रत्याशी नरेंद्र सिंह को लगातार तीसरी बार हार का सामना करना पड़ा। 2014 और 2019 में वह चुनाव हार चुके हैं।
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4531 वोटों से फिर रह गए राठौर
घरौंडा से कांग्रेस की टिकट पर चौथी बार उतरे वीरेंद्र राठौर इस बार भाजपा के हरविंद्र कल्याण से हारे हैं। राठौर को 82705 वोट मिले हैं और कल्याण को 87236 वोट मिले हैं। इससे पहले राठौर 2005, 2009 और 2014 का चुनाव कांग्रेस ही टिकट पर हारते रहे हैं। राठौर ने अपनी हार के लिए कांग्रेस के ही तीन नेताओं को जिम्मेदार ठहराया है। साथ ही पार्टी के खिलाफ काम करने वाले नेताओं पर कार्रवाई के लिए पार्टी को पत्र भी लिखा है।
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मराठा इस बार भी नहीं हुए पार
मराठा वीरेंद्र वर्मा भी आज तक कोई चुनाव नहीं जीत पाए हैं। इस बार वे असंध से एनसीपी के टिकट पर मैदान में उतरे थे। लेकिन इस बार भी जनता ने उनका साथ नहीं दिया। मराठा को मात्र 4218 वोट ही मिल पाए। मराठा 2005 में एकता शक्ति पार्टी से नीलोखेड़ी विधानसभा क्षेत्र, 2009 में असंध, 2014 में चुनाव लड़े, लेकिन जीत नहीं पाए। पिछला लोकसभा चुनाव करनाल सीट से एनसीपी-इनेलो गठबंधन से लड़ा था और 2014 में भी लोकसभा का चुनाव लड़ा था, लेकिन जीत नसीब नहीं हो सकी।
सज्जन सिंह ढुल को नहीं मिला जनता का आशीर्वाद
रिटायर्ड अधिकारी सज्जन सिंह ढुल कैथल जिले की पूंडरी विधानसभा सीट से लगातार दो बार चुनाव हार चुके हैं। इस बार वह कांग्रेस के टिकट के दावेदार थे, लेकिन टिकट नहीं मिला तो वह निर्दलीय ही चुनाव में कूद पड़े। लेकिन वह इस बार भी जनता का आशीर्वाद नहीं ले पाए और उनको 5 हजार से भी कम वोट मिल पाए।
लगातार हार के बाद अरोड़ा और निर्मल सिंह की खुली किस्मत
अंबाला शहर से इस बार कांग्रेस के प्रत्याशी निर्मल सिंह लगातार तीन चुनाव हार चुके हैं। निर्मल सिंह ने अंबाला छावनी सीट से 2009 व 2014 में कांग्रेस से चुनाव लड़ा था। इसके अलावा अंबाला शहर सीट से निर्दलीय विधानसभा चुनाव लड़ा, मगर जीते नहीं। वहीं, अशोक अरोड़ा पिछले दो चुनाव लगातार हारते रहे हैं, लेकिन इस बार उन्होंने भाजपा के सुभाष सुधा को हराया है और विधानसभा पहुंचें हैं।