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सुभाष बराला के बेटे के कारनामे ने बदले हरियाणा BJP की राजनीति के समीकरण

Wed, 09 Aug 2017 10:04 AM IST
नितिन यादव/अमर उजाला, रोहतक(हरियाणा)
नितिन यादव/अमर उजाला, रोहतक(हरियाणा) Updated Wed, 09 Aug 2017 10:04 AM IST
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vikas barala, varnika kundu, subhash barala, chandigarh stalking case effect on haryana bjp
Vikas Barala Case
बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष के बेटे के एक करनामे ने हरियाणा में पार्टी की अंदरुनी राजनीति के समीकरण बिल्कुल बदलकर रख दिए हैं। किसी भी समय कुछ भी बदलाव हो सकता है। बराला विरोधी लॉबी इस मुद्दे पर बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष सुभाष बराला को घेर सकती है। बराला को सीएम का करीबी भी माना जाता है।
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ऐसे में असंतुष्ट खेमा भी इस मौके का फायदा उठाने की कोशिश में लग सकता है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के रोहतक प्रवास में मजबूत बनकर उभरे बराला के लिए आने वाले दिन और कठिन हो सकते हैं। हालांकि अभी तक भाजपा के आला नेता बराला के साथ दिखाई दे रहे हैं। 
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नए चेहरे को लेकर भी होने लगीं चर्चाएं
 बेटे के फंसने के बाद से ही भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सुभाष बराला के भविष्य को लेकर चर्चाएं जारी हैं। बराला के हटने की दशा में भाजपा के अंदर ही नए चेहरे पर कयास लगाए जाने लगे हैं। पिछले दिनों भाजपा ओबीसी के मुद्दे को ज्यादा उठाती रही है। अमित शाह ने अपने रोहतक प्रवास के दौरान कांग्रेस पर ओबीसी विरोधी होने का आरोप लगाते हुए कार्यकर्ताओं को निर्देश दिए थे।
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ऐसे में माना जा रहा है कि बदले जाने की स्थिति में नया अध्यक्ष ओबीसी वर्ग का ही हो सकता है। राजकुमार सैनी के मोर्चे से निपटने के लिए किसी सैनी को अध्यक्ष बनाने की वकालत पहले ही हो चुकी है। अहीरवाल में पकड़ और मजबूत बनाने के लिए किसी यादव चेहरे को भी सामने लाया जा सकता है।
 

गैर जाट समीकरण का भी दिया जा सकता है हवाला

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Haryana CM on Vikas Barala Case
अमित शाह ने जाट और गैर जाट की राजनीति से दूर रहने की बात रोहतक प्रवास के दौरान कही थी। स्थानीय नेताओं की मानें तो गैर जाट का समीकरण भाजपा के लिए मुफीद है। इसलिए ही दबी जुबान में किसी गैर जाट को प्रदेश अध्यक्ष बनाने की भी वकालत हो चुकी है। अमित शाह के रोहतक प्रवास के पहले दिन ही कार्यकर्ताओं ने यह मांग उठाई थी।

सैनी समाज के किसी नेता को यह जिम्मेदारी देने की मांग एक पदाधिकारी ने की थी। अमित शाह के दौरे में बराला की भूमिका के कारण यह आवाज ज्यादा जोर से नहीं उठ पाई थी। अब बेटे के छेड़खानी प्रकरण में घिरे बराला को घेरने के लिए फिर से इस समीकरण का हवाला दिया जा सकता है।

चेहरा बचाने के लिए हो सकती है बराला की कुर्बानी
 ्भाजपा ने बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ के अभियान को काफी बढ़ चढ़कर प्रचारित किया है। ऐसे में अपना चेहरा बचाने के लिए और पार्टी के अंदर किसी भी प्रकार की गुटबाजी को रोकने के लिहाज से बराला की कुर्बानी दी जा सकती है। हालांकि सीएम खट्टर और कई बड़े नेताओं ने अभी इसका बचाव किया है। सोशल मीडिया पर भी एक वर्ग बचाव में उतर आया है।
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