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बजट सत्र: पिंजौर वन विभाग में करोड़ों रुपये का घोटाला, विधानसभा में उठा मामला, अब विजिलेंस करेगी जांच

Tue, 22 Mar 2022 09:09 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Tue, 22 Mar 2022 09:09 PM IST
सार

4.15 करोड़ रुपये के घोटाले में आरोप है कि बिना पौधे लगाए ही फर्जी बिल तैयार कर लिए गए। केवल कागजों में ही सारा खर्च दिखाया गया और विभागीय नियमों का उल्लंघन किया गया।

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Vigilance will investigate scam of Pinjore Forest Department
हरियाणा विधानसभा - फोटो : फाइल

विस्तार

वन विभाग पिंजौर में हुए करोड़ों रुपये के घोटाले की जांच अब राज्य सतर्कता ब्यूरो (विजिलेंस) करेगा। साथ ही इस मामले के आरोपी और मौजूदा समय में भिवानी जिले के डीएफओ जितेंद्र अहलावत को फील्ड की पोस्ट से हटाया जाएगा। विधानसभा में विपक्षी दल के सदस्यों का जवाब देते हुए कृषि मंत्री जेपी दलाल ने दावा किया कि इस मामले में शामिल अन्य कर्मचारियों और अधिकारियों की संलिप्तता जानने को आईएएस अधिकारियों की कमेटी से भी जांच कराई जाएगी। जो भी दोषी होगा, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

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विधानसभा में मुलाना से विधायक वरुण चौधरी और रोहतक विधायक बीबी बतरा द्वारा इस मामले में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव लाया गया। वरुण चौधरी ने कहा कि करोड़ों रुपये के गबन के बाद भी इस मामले में न तो कोई एफआईआर की गई है और न ही आरोपी अधिकारी को निलंबित किया गया। इतना ही नहीं आरोपी को भिवानी जिले का डीएफओ लगा दिया गया। 
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वहीं, विधायक बीबी बतरा ने कहा कि पौधों के लाने और ले जाने का खर्च 46 हजार रुपये दिखाया गया, जबकि बिलों में जिस वाहन पर ढुलाई दिखाई गई है, वह मोटरसाइकिल है। बतरा ने हैरानी जताई कि क्या ऐसा संभव हो सकता है। लाखों पॉलीथिन बैग पौधों के लिए दिखाए गए थे, वो भी गायब हैं। जवाब में कृषि मंत्री जेपी दलाल ने कहा कि इस मामले में प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सरकार के स्तर पर विचाराधीन है तथा अन्य अधिकारियों व कर्मचारियों की मिलीभगत के बारे में भी जांच करवाई जाएगी। 

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वर्तमान सरकार किसी भी प्रकार की अनिमितताओं को बर्दाश्त नहीं करेगी और कसूरवार अधिकारियों व कर्मचारियों को बख्शा नहीं जाएगा। विपक्षी सदस्यों की मांग पर दलाल ने कहा कि इस मामले की विजिलेंस जांच कराई जाएगी और डीएफओ जितेंद्र अहलावत को फील्ड पोस्ट से हटाया जाएगा 

17 जनवरी को शिकायत, 7 फरवरी में आई जांच रिपोर्ट, कार्रवाई अब तक नहीं
4.15 करोड़ रुपये के घोटाले में आरोप है कि बिना पौधे लगाए ही फर्जी बिल तैयार कर लिए गए। केवल कागजों में ही सारा खर्च दिखाया गया और विभागीय नियमों का उल्लंघन किया गया। आईएफएस जितेंद्र अहलावत 27 जनवरी से 17 सितंबर 2021 तक बतौर वन मंडल अधिकारी अनुसंधान मंडल, पिंजौर में रहे। अहलावत के खिलाफ 17 जनवरी, 2022 को करोड़ों रुपये के गबन की शिकायत आई थी। मामले की जांच के लिए विनीत कुमार गर्ग की अध्यक्षता में जांच कमेटी गठित की गई, जिसमें पंकज गोयल सदस्य और यशपाल जांगड़ा सचिव थे। 7 फरवरी को भेजी रिपोर्ट सौंप दी, लेकिन आज तक किसी पर कार्रवाई नहीं की गई। 

पौधे लगे नहीं, दिखाया खर्च
कमेटी ने जांच में पाया कि वर्ष 2020-21 और वर्ष 2021-22 के दौरान 51 लाख रुपये की राशि को लेकर ईपीएफ, ईएसआई, कांट्रेक्टर प्रॉफिट की अदायगी न करके इस राशि को लेबर, मशीनरी और मटीरियल पर खर्च किया गया। वर्ष 2020-21 के दौरान पहले से उपलब्ध 37 लाख रुपये को नए पौधे उगाने की अनुमति लेने के उपरांत नए पौधे न उगाकर इस धन राशि का गबन किया गया। ऐसे ही, वर्ष 2020-21 में पौधे उगाने के अलॉटिड भौतिक लक्ष्य से कम पौधे उगाकर पूरी अलॉटिड धन राशि को खर्च किया गया। 

पौधों के रख-रखाव पर राशि खर्च की गई, जोकि वास्तव में उपलब्ध ही नहीं थे। इसके अलावा, फरवरी 2021 में नर्सरी में पौधे तैयार करने को भरी गई थैलियों से अधिक संख्या में उगाए गए पौधों के बिल चार्ज किए गए।

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