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Haryana Local Body Elections : सियासी मिजाज साफ, निकाय चुनाव फतह, अब भाजपा की नजर पंचायत चुनाव पर
Thu, 23 Jun 2022 04:39 AM IST
दुष्यंत शर्मा
प्रवीण पाण्डेय, चंडीगढ़
प्रवीण पाण्डेय, चंडीगढ़
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Thu, 23 Jun 2022 04:39 AM IST
सार
भाजपा ने 2014 में सत्ता संभालने के बाद से शहरी निकाय चुनावों में बड़ी जीत हासिल की है। 21 जिलों के 46 निकायों के मतदाताओं ने दिया दूरगामी संदेश। कांग्रेस को बदलनी होगी रणनीति, आप-इनेलो को झोंकनी पड़ेगी ताकत।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : Social Media
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विस्तार
हरियाणा के शहरी निकाय चुनाव में भाजपा ने एक बार फिर अपनी बादशाहत साबित कर दी। भाजपा का विजय रथ पहले की तरह ही आगे बढ़ा जबकि 19 जून को जब मतदान हुआ था, उस समय प्रदेश में अग्निपथ के विरोध की आग प्रबल थी।
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भाजपा ने 2014 में सत्ता संभालने के बाद से शहरी निकाय चुनावों में बड़ी जीत हासिल की है। इस बार भी शहरी मतदाताओं ने सत्तारूढ़ दल में ही अधिक विश्वास जताया, जिससे सियासी मिजाज भी पता चल गया। बुधवार को आए चुनाव नतीजों का आगामी पंचायत चुनाव और 2024 के विधानसभा चुनाव की दिशा और दशा पर काफी असर पड़ने वाला है। भाजपा ने 21 जिलों के 46 निकायों में से 22 चेयरमैन के पद अपने बूते जीते, जबकि 3 पर गठबंधन सहयोगी जजपा ने जीत दर्ज की।
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भाजपा-जजपा के लिए चुनाव से पहले एक बार फिर साथ आना फायदेमंद साबित हुआ। हालांकि कुछ सीटों पर दोनों दलों के नेता बागी होकर भी लड़े, लेकिन अधिक नुकसान नहीं हुआ। भाजपा इस जीत को पूरी तरह भुनाने की कोशिश करेगी। निर्दलीय चेयरमैन जीते 7 भाजपा और एक जजपा के ही बागी हैं। इनके देर-सवेर भाजपा-जजपा गठबंधन सरकार के साथ आने के संकेत मिल रहे हैं।
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कांग्रेस सिंबल पर न लड़कर पहले ही मुकाबले से बाहर हो चुकी थी, वह कुछ निर्दलीयों की जीत का श्रेय भले लेने की कोशिश करे, लेकिन उससे कार्यकर्ताओं में नए रक्त का संचार होने के कम ही आसार हैं। चूंकि, पार्टी में गुटबंदी खत्म होने के बजाय बढ़ती जा रही है।
पंजाब की जीत हरियाणा में बेअसर
पंजाब में प्रचंड से बहुमत सरकार बनाने के बाद आम आदमी पार्टी हरियाणा के निकाय चुनाव में बड़े उलटफेर की आस लगाए बैठे थी, जो नहीं हो पाया। आप को अभी धरातल पर और काम करने के साथ ही शहरी मतदाताओं का विश्वास जीतना होगा। पंजाब और हरियाणा की सियासत में दिन-रात का अंतर है, इसलिए पंजाब और दिल्ली की तरह यहां राजनीतिक सफलता हासिल करना आसान नहीं है।
इनेलो को शहरों में बढ़ानी होगी पैठ
इनेलो के लिए भी ये नतीजे सुखद नहीं कहे जा सकते। उसे भी आगामी चुनावों के लिए बिसात नए सिरे से बिछानी होगी। परंपरागत तरीके की राजनीति से शहरों में जीत मिलने वाली नहीं है। उसे शहरों में पैठ बढ़ानी पड़ेगी।
2018 में जीते पांच निगम, 2020 में एक
दिसंबर 2018 में भाजपा ने पानीपत, यमुनानगर, करनाल, हिसार और रोहतक नगर निगम चुनाव जीतकर मेयर पद पर अपना कब्जा जमाया। भाजपा उ मीदवार भारी मतों से विजयी हुए थे। सरकार ने इसे भाजपा सरकार की नीतियों की जीत बताया था। पानीपत नगर निगम की मेयर अवनीत कौर रिकॉर्ड 74940 मतों से जीती थी। इसके बाद भाजपा ने दिसंबर 2020 में पंचकूला नगर निगम में जीत दर्ज की। सोनीपत में कांग्रेस जीती, जबकि अंबाला शहर में पूर्व केंद्रीय मंत्री विनोद शर्मा की पत्नी ने जीत दर्ज की थी। विनोद शर्मा अब भाजपा के समर्थन में ही हैं।