पीजी हॉस्टल में रहेंगी गाय-भैंस, एप भी बनेगा, किराया और सुविधाएं जान आप हो सकते हैं हैरान
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अभी तक आपने इंसानों के पीजी (पेइंग गेस्ट) हॉस्टल के बारे में तो सुना होगा जहां पैसे देकर रहने और खाने जैसी तमाम सुविधाएं मिल जाती हैं। लेकिन जब बात एनिमल पीजी हॉस्टल की आए तो आप भी हैरान रह जाएंगे। लेकिन अब हरियाणा के अंबाला के गांव उगाड़ा में जल्द ही एनिमल हॉस्टल बनने जा रहा है। जहां पर पशुओं को तमाम सुविधाएं बेहद सस्ते दाम पर मिलेंगी।
ग्राम पंचायत उगाड़ा ने न केवल इसकी पहल कर दी है बल्कि यह पूरा प्रोजेक्ट हरियाणा सरकार के पास जा चुका है। अंबाला शहर से करीब 8 किलोमीटर दूर सटे इस गांव में बनने वाले एनिमल पीजी हॉस्टल पर करीब 19 करोड़ रुपये का खर्च आना है। हरियाणा सरकार प्रोजेक्ट को सब्सिडी देगी। इस प्रोजेक्ट की खासियत के चलते यह प्रोजेक्ट न केवल हरियाणा बल्कि देशभर के कई राज्यों में मिसाल बनेगा।
इस एनिमल हॉस्टल में बीपीएल परिवारों की महिलाओं को निशुल्क गाय, भैंस उपलब्ध करवाने का भी प्रावधान है। गाय, भैंस की जो भी कीमत तय होगी उसे उनके 60 फीसद दूध से रिकवर किया जाएगा। इस एनिमल हॉस्टल में ही दूध बेचने और खरीदने की सुविधा भी रहेगी। साथ ही जो दूध आएगा उससे निर्मित दूध, दही, पनीर व अन्य खाद्य पदार्थ बनाने का प्लांट भी लगाया जाएगा। एनिमल हॉस्टल में गाय या भैंस दुधारू न होने पर भी रखा जा सकता है।
चार फेस में पूरा होगा कार्य
उगाड़ा में करीब 19 एकड़ जमीन पंचायत ने इस काम के लिए रिजर्व कर दी है। पहले फेस में चारदीवारी और पशुओं के लिए शेड बनाया जाएगा। इस पर 92 लाख रुपये खर्च होंगे। इसका प्रस्ताव बनकर सरकार के पास जा चुका है। उम्मीद है कि सितंबर माह के पहले या दूसरे सप्ताह में यह राशि भी पंचायत को अलॉट कर दी जाएगी।
प्रिंसिपल सेक्रेटरी ने किया दौरा
इस प्रोजेक्ट को देखने रूरल डिपार्टमेंट के प्रिंसिपल सेक्रेटरी सुधीर राजपाल खुद उगाड़ा पहुंचे। जब उन्होंने पंचायत के इस प्रोजेक्ट को देखा तो वह भी हैरान रह गए। इसके बाद उन्होंने गांव की सरंपच की जमकर सराहना की और उन्हें शाबासी दी।
कैसा होगा एनिमल हॉस्टल का स्वरूप, क्या रहेंगी विशेषताएं
एनिमल हॉस्टल में प्रत्येक पशु की रजिस्ट्रेशन फीस 200 रुपये होगी। जबकि पशु की सुविधाओं के हिसाब से आगे की फीस तय की जाएगी। पशु को चारा डालने, गोबर उठाने, पानी पिलाने और नहलाने जैसी यदि तमाम सुविधाएं चाहिए तो 500 रुपये प्रति माह लिए जाएंगे। यदि खाली केबिन ही पशु को रखने के लिए चाहिए तो एक पशु के लिए 50 रुपये में केबिन उपलब्ध करवा दिया जाएगा।
पशुओं की संख्या के हिसाब से कैबिन का रेट तय होगा। इस केबिन में सीसीटीवी कैमरे और पंखे व कूलर तक की व्यवस्था होगी। यह पशु के मालिक पर छोड़ दिया जाएगा कि वह क्या-क्या सुविधाएं लेना चाहता है।
घर बैठे कर सकेंगे पशु की निगरानी
एनिमल हॉस्टल में एक स्थाई डॉक्टर भी रहेगा। साथ ही आपातकालीन स्थिति के लिए भी डॉक्टर की सुविधा रहेगी। सीसीटीवी के साथ एक मोबाइल एप भी बनाया जाएगा जिससे पशु मालिक 24 घंटे अपने मोबाइल पर पशु को देख सकेगा।
कहां से आया प्रोजेक्ट
गांव सरपंच हरिंद्र कौर जोकि एमए बीएड हैं उन्होंने बताया कि वह और उनके पति गुजरात के अकोदरा गांव में गए थे जोकि साबरकांठा जिले में पड़ता है। वहां पर एनिमल हॉस्टल चल रहे हैं। वहां से प्रोजेक्ट देखा लेकिन जो कमियां वहां थी उन्हें दूर करते हुए नये सिरे से प्रोजेक्ट तैयार करने की ठानी।
क्या-क्या रहेगा एनिमल हॉस्टल में खास
- सेंट्रल बायोगैस प्लांट
- मिल्क परचेजिंग यूनिट
- मिल्क चिलिंग प्लांट
- मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट
- चारा स्टोरेज रूम
- सोलर पवार प्लांट
कड़ी मशक्कत के बाद इस योजना को अमलीजामा पहनाया गया है। इसमें गांव की सरपंच का सबसे बड़ा हाथ है। 92 लाख रुपये प्रथम चरण में प्रदेश सरकार से जल्द मिलने की उम्मीद है। उत्तरभारत का यह पहला ऐसा गांव होगा जहां एनिमल हॉस्टल बनेगा। शक्ति सिंह, एडीसी अंबाला।