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Chandigarh News: तीस साल बाद फिर मिले दो प्रेमी यादों के साथ साझा की आपबीती
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चंडीगढ़। टैगोर थिएटर सेक्टर-18 के मिनी ऑडिटोरियम में चंडीगढ़ संगीत नाटक अकादमी की ओर से पांच दिवसीय कहानियों के रंगमंच के चौथे दिन बुधवार को नाटक जहां से चले थे का मंचन किया गया।
इसमें यूनिक आर्ट्स सोसाइटी के कलाकारों ने अभिनय किया। यह नाटक मनमोहन गुप्ता मोनी ने लिखा है और निर्देशन सोनिका भाटिया ने किया है। मुख्य अतिथि के रूप में देश भगत विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ. जोरा सिंह ने और बतौर विशेष अतिथि इसी यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर चांसलर डॉ. तजिंदर कौर शामिल हुईं।
इस मौके पर नाटक के लेखक मनमोहन गुप्ता मोनी भी मौजूद रहे। इस नाटक में दो प्रेमी राहुल और बिंदु की कहानी है जो जवानी में आपस में प्रेम तो करते हैं, लेकिन किसी कारणवश एक दूसरे के साथ शादी नहीं कर पाए। उनके रास्ते अलग हो जाते हैं, मंजिलें बदल जाती हैं। फिर अचानक तीस साल के बाद दोनों की मुलाकात हो जाती है। मुलाकात के दौरान दोनों पुरानी यादों में खो जाते हैं और आपबीती साझा करते हैं। बिंदु बताती है कि उसके पति की मृत्यु हो जाने के बाद कैसे बच्चे अपनी जिंदगी में व्यस्त हो गए और वह अकेली रह गई। इसी तरह से राहुल भी उसे अपनी पत्नी की मृत्यु के बारे में बताता है। वह कहता है कि एक बाप दो बेटों को तो पाल सकता है। लेकिन दो बेटे एक बाप को नहीं पाल सकते।
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इसमें यूनिक आर्ट्स सोसाइटी के कलाकारों ने अभिनय किया। यह नाटक मनमोहन गुप्ता मोनी ने लिखा है और निर्देशन सोनिका भाटिया ने किया है। मुख्य अतिथि के रूप में देश भगत विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ. जोरा सिंह ने और बतौर विशेष अतिथि इसी यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर चांसलर डॉ. तजिंदर कौर शामिल हुईं।
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इस मौके पर नाटक के लेखक मनमोहन गुप्ता मोनी भी मौजूद रहे। इस नाटक में दो प्रेमी राहुल और बिंदु की कहानी है जो जवानी में आपस में प्रेम तो करते हैं, लेकिन किसी कारणवश एक दूसरे के साथ शादी नहीं कर पाए। उनके रास्ते अलग हो जाते हैं, मंजिलें बदल जाती हैं। फिर अचानक तीस साल के बाद दोनों की मुलाकात हो जाती है। मुलाकात के दौरान दोनों पुरानी यादों में खो जाते हैं और आपबीती साझा करते हैं। बिंदु बताती है कि उसके पति की मृत्यु हो जाने के बाद कैसे बच्चे अपनी जिंदगी में व्यस्त हो गए और वह अकेली रह गई। इसी तरह से राहुल भी उसे अपनी पत्नी की मृत्यु के बारे में बताता है। वह कहता है कि एक बाप दो बेटों को तो पाल सकता है। लेकिन दो बेटे एक बाप को नहीं पाल सकते।
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