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केपीएस गिल को श्रद्धांजलि के खिलाफ शिअद का वाकआउट, 'आप' ने भी दिया साथ

Thu, 15 Jun 2017 09:21 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Thu, 15 Jun 2017 09:21 AM IST
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tribute to KPS Gill, Punjab assembly session, sad walkout
punjab assembly session
पंजाब विधानसभा के बुधवार को शुरू हुए बजट सत्र के पहले दिन दिवंगतों को श्रद्धांजलि देने की परंपरा भी सियासत की चपेट में आ गई। शिअद ने सूबे के पूर्व डीजीपी केपीएस गिल को श्रद्धांजलि दिए जाने का विरोध करते हुए सदन से वाकआउट किया।
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हालांकि इस मामले में उसके सहयोगी दल भाजपा के विधायक शांत बैठे रहे और उन्होंने गिल को श्रद्धांजलि दिए जाने का विरोध नहीं किया। दूसरी ओर, मुख्य विपक्षी दल आम आदमी पार्टी (आप) के सदस्यों ने खड़े होकर गिल को श्रद्धांजलि देने का विरोध तो जताया, लेकिन सदन नहीं छोड़ा। फिर भी, आप के सहयोगी दल लोक इंसाफ पार्टी के बैंस भाइयों ने नारेबाजी करते हुए सदन से वाकआउट किया।
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सदन की कार्यवाही शुरू होते ही स्पीकर राणा केपी ने विधानसभा के पिछले सत्र से अब तक की अवधि के दौरान दिवंगत हुए लोगों को श्रद्धांजलि देने की प्रक्रिया शुरू की। जैसे ही उन्होंने पूर्व डीजीपी केपीएस गिल को श्रद्धांजलि देने के लिए उनका जीवन वृतांत पढ़ना आरंभ किया, पूर्व डिप्टी सीएम सुखबीर सिंह बादल के नेतृत्व में शिअद के सदस्य खड़े हो गए। उन्होंने गिल को पंजाब में मानवाधिकारों के हनन को दोषी बताते हुए सदन में उन्हें श्रद्धांजलि देने का विरोध किया। इस दौरान नवजोत सिंह सिद्धू और ब्रह्म मोहिंद्रा समेत सत्तापक्ष के कई नेता भी खड़े हो गए और उन्होंने शिअद के रवैये का विरोध किया। 
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भाजपा ने नहीं दिया साथ

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आप की और से विधायक सुखपाल खैरा ने भी स्पीकर के भाषण के दौरान टोकाटाकी करते हुए केपीएस गिल को श्रद्धांजलि देने पर एतराज जताया। इसी दौरान आप के सहयोगी लोक इंसाफ पार्टी के बलविंदर सिंह बैंस और सिमरजीत सिंह बैंस ने भी गिल को श्रद्धांजलि का विरोध जताते हुए नारेबाजी शुरू कर दी। कुछ देर बाद वे नारेबाजी करते हुए सदन से बाहर चले गए।

स्पीकर की अनुमति से बोलते हुए खैरा ने शिअद के वाकआउट को ढकोसला बताते हुए कहा कि बरगाड़ी कांड कराने वाले अकाली-भाजपा सरकार ने सुमेध सिंह सैनी को मानवाधिकारों को उल्लंघन की छूट दी। इसके अलावा इजहार आलम को भी गठबंधन का वरदहस्त प्राप्त रहा, जिन्होंने बाद में आलम सेना बनाकर कई गैरकानूनी काम किए। उन्होंने कहा कि केपीएस गिल पर मानवाधिकारों के हनन के आरोप हैं, इसलिए सदन द्वारा उन्हें श्रद्धांजलि नहीं दी जानी चाहिए।

स्पीकर द्वारा खैरा की मांग अस्वीकार करने के बाद सभी दिवंगत आत्माओं को श्रद्धांजलि स्वरूप सदन में दो मिनट का मौन रखा गया, जिस पर आप विधायकों ने केपीएस गिल को श्रद्धांजलि न देने की बात कहते हुए अन्य दिवंगत लोगों के लिए दो मिनट का मौन रखा।
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