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पीजीआई डायरेक्टर को ट्रिब्यूनल का समन, 15 को पेश होने के आदेश
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 31 Aug 2016 12:58 AM IST
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पीजीआई चंडीगढ़
केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) ने पीजीआई डायरेक्टर प्रोफेसर योगेश चावला और यूनियन हेल्थ सेक्रेटरी को कंटेप्ट ऑफ कोर्ट की एक याचिका पर समन जारी किए हैं। ट्रिब्यूनल ने उन्हें 15 सितंबर को खुद पेश होकर स्थिति साफ करने के आदेश दिए हैं।
सामान्य श्रेणी के कर्मियों ने कैट से 15 नवंबर 2012 के एक फैसले का पालन न करने को लेकर पीजीआई और सेंट्रल गवर्नमेंट के खिलाफ एग्जिक्यूशन/कंटेंप्ट ऑफ कोर्ट की याचिका दायर की थी। याचिका में पीजीआई के सामान्य श्रेणी के कर्मियों ने पीजीआई मैनेजमेंट पर प्रमोशन में गैरकानूनी और असंवैधानिक कार्रवाई का आरोप लगाया था। उनका कहना था कि पीजीआई प्रशासन ने आरक्षित श्रेणी के कर्मियों को जल्दबाजी में वरिष्ठता के आधार पर प्रमोशन दे दी। इसमें नियमों की अनदेखी की गई।
19 जुलाई 2013 को सामान्य श्रेणी के कर्मियों ने कैट की नवंबर 2012 के फैसले की पालन के लिए एग्जिक्यूशन अर्जी दायर की थी। सितंबर 2013 में पीजीआई डायरेक्टर ने कैट के फैसले के खिलाफ रिट याचिका दायर की थी। नवंबर 2013 में कैट के फैसले पर कार्रवाई पर स्टे लग गया था। इसके बाद 13 जनवरी 2016 को कैट के फैसले को बरकरार रखा था। 18 फरवरी 2016 को एग्जिक्यूशन एप्लीकेशन पर फैसला आया था। इसमें प्रतिवादी पक्ष ने संबंधित फैसले की पालना व इस पर कार्रवाई के लिए 6 महीने का समय मांगा था। वहीं पालन के संबंध में हलफनामा दायर करने के लिए इसके बाद एक सप्ताह का और समय मांगा था।
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सामान्य श्रेणी के कर्मियों ने कैट से 15 नवंबर 2012 के एक फैसले का पालन न करने को लेकर पीजीआई और सेंट्रल गवर्नमेंट के खिलाफ एग्जिक्यूशन/कंटेंप्ट ऑफ कोर्ट की याचिका दायर की थी। याचिका में पीजीआई के सामान्य श्रेणी के कर्मियों ने पीजीआई मैनेजमेंट पर प्रमोशन में गैरकानूनी और असंवैधानिक कार्रवाई का आरोप लगाया था। उनका कहना था कि पीजीआई प्रशासन ने आरक्षित श्रेणी के कर्मियों को जल्दबाजी में वरिष्ठता के आधार पर प्रमोशन दे दी। इसमें नियमों की अनदेखी की गई।
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19 जुलाई 2013 को सामान्य श्रेणी के कर्मियों ने कैट की नवंबर 2012 के फैसले की पालन के लिए एग्जिक्यूशन अर्जी दायर की थी। सितंबर 2013 में पीजीआई डायरेक्टर ने कैट के फैसले के खिलाफ रिट याचिका दायर की थी। नवंबर 2013 में कैट के फैसले पर कार्रवाई पर स्टे लग गया था। इसके बाद 13 जनवरी 2016 को कैट के फैसले को बरकरार रखा था। 18 फरवरी 2016 को एग्जिक्यूशन एप्लीकेशन पर फैसला आया था। इसमें प्रतिवादी पक्ष ने संबंधित फैसले की पालना व इस पर कार्रवाई के लिए 6 महीने का समय मांगा था। वहीं पालन के संबंध में हलफनामा दायर करने के लिए इसके बाद एक सप्ताह का और समय मांगा था।
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