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अमानवीय व्यवहारः एंबुलेंस के इंतजार में ओपीडी के बाहर कांपते रहे मरीज, एक ही हालत बिगड़ी
Wed, 08 Jan 2020 02:06 PM IST
पंचकुला ब्यूरो
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Wed, 08 Jan 2020 02:06 PM IST
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ओपीडी के बाहर एंबुलेंस का इंतजार करतीं महिला मरीज
- फोटो : अमर उजाला
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एक बार फिर मरीजों से अमानवीय व्यवहार का मामला सामने आया है। सेक्टर-48 से जीएमसीएच में इलाज कराने पहुंचे करीब 12 मरीज चार घंटे तक बारिश और कड़ाके की ठंड में ओपीडी के बाहर एंबुलेंस के इंतजाम में खड़े होकर कांपते रहे। इस दौरान कीमो के एक मरीज की हालत बिगड़ गई और वह चक्कर खाकर जमीन पर गिर पड़े।
आनन-फानन में अन्य मरीजों के परिजनों ने एक ऑटो बुलाकर उन्हें सेक्टर-48 के अस्पताल पहुंचाया। इस घटना को लेकर सेक्टर-48 में भर्ती मरीजों में काफी रोष है। उनका कहना है कि इलाज के नाम पर मरीजों की फजीहत हो रही है। जांच, दवा, ओपीडी, कीमो सब के लिए जीएमसीएच जाना पड़ता है। केवल सोने के लिए सेक्टर-48 के हॉस्पिटल में भर्ती कर रखा है।
सेक्टर-48 हॉस्पिटल से मंगलवार को जीएमसीएच की ओपीडी में इलाज के लिए आईं मोहाली की पपिन्दर कौर, अंबाला की रूपिंदर कौर और कुरुक्षेत्र की कुरवीर कौर भी उन मरीजों के साथ थीं। सभी दोपहर 12 बजे से शाम 4.15 बजे तक ओपीडी के बाहर ठंड में खड़े होकर कांपते रहे।
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उनका कहना था कि हर दो से तीन दिन बाद जांच, दवा और डॉक्टर को दिखाने के नाम पर उन्हें सेक्टर-48 से एंबुलेंस के जरिए जीएमसीएच भेज दिया जाता है। सुबह तो एंबुलेंस उन्हें यहां छोड़ जाती है लेकिन इसके बाद वापस ले जाने की जिम्मेदारी कोई नहीं लेता। ऐसे में मजबूरन हर बार उन्हें सैकड़ों रुपये खर्च कर वापस लौटना पड़ता है।
मरीजों ने बताया कि शिकायत के लिए वे सेक्टर-48 हॉस्पिटल के प्रभारी डॉ. जी थामी से भी मिलने गए थे लेकिन उनके अवकाश पर होने की बात कहकर उन्हें लौटा दिया गया। इस घटना को लेकर हेल्थ सेक्रेटरी एके गुप्ता और सेक्टर-48 हॉस्पिटल के नोडल अधिकारी डॉ. जी थामी से कॉल और मैसेज के जरिए संपर्क करने का प्रयास किया गया लेकिन न तो उन्होंने कॉल रिसीव की न हीं मैसेज का जवाब दिया।
भर्ती हैं सेक्टर-48 में, इलाज हो रहा सेक्टर-32 में
बता दें कि सेक्टर-48 स्थित 100 बेड के अस्पताल में सितंबर से मरीजों को भर्ती किया जा रहा है। मौजूदा समय में वहां तीन डिपार्टमेंट के मरीजों को भर्ती किया जा रहा है। इनमें स्किन, रेडियोथैरेपी और साइकेट्री के मरीज शामिल हैं। इन विभागों के मरीजों का इलाज तो जीएमसीएच में ही चल रहा है जबकि उन्हें भर्ती सेक्टर-48 के हॉस्पिटल में किया गया है।
भर्ती मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि उन्हें जांच से लेकर दवा तक के लिए हर दिन सेक्टर-48 से सेक्टर-32 का चक्कर काटना पड़ रहा है। स्थिति यह है कि सेक्टर-48 में किसी मरीज की स्थिति बिगड़ने पर वहां उसे तत्काल इलाज नहीं मिल पाता, उसकी जिंदगी बचाने के लिए उसे जीएमसीएच लाना पड़ता है।
सेक्टर-48 हॉस्पिटल से संबंधित किसी भी मामले पर उनके नोडल अधिकारी डॉ. जी थामी ही जानकारी देंगे।
- अनिल मोदगिल, प्रशासनिक प्रवक्ता, जीएमसीएच-32
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आनन-फानन में अन्य मरीजों के परिजनों ने एक ऑटो बुलाकर उन्हें सेक्टर-48 के अस्पताल पहुंचाया। इस घटना को लेकर सेक्टर-48 में भर्ती मरीजों में काफी रोष है। उनका कहना है कि इलाज के नाम पर मरीजों की फजीहत हो रही है। जांच, दवा, ओपीडी, कीमो सब के लिए जीएमसीएच जाना पड़ता है। केवल सोने के लिए सेक्टर-48 के हॉस्पिटल में भर्ती कर रखा है।
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सेक्टर-48 हॉस्पिटल से मंगलवार को जीएमसीएच की ओपीडी में इलाज के लिए आईं मोहाली की पपिन्दर कौर, अंबाला की रूपिंदर कौर और कुरुक्षेत्र की कुरवीर कौर भी उन मरीजों के साथ थीं। सभी दोपहर 12 बजे से शाम 4.15 बजे तक ओपीडी के बाहर ठंड में खड़े होकर कांपते रहे।
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उनका कहना था कि हर दो से तीन दिन बाद जांच, दवा और डॉक्टर को दिखाने के नाम पर उन्हें सेक्टर-48 से एंबुलेंस के जरिए जीएमसीएच भेज दिया जाता है। सुबह तो एंबुलेंस उन्हें यहां छोड़ जाती है लेकिन इसके बाद वापस ले जाने की जिम्मेदारी कोई नहीं लेता। ऐसे में मजबूरन हर बार उन्हें सैकड़ों रुपये खर्च कर वापस लौटना पड़ता है।
मरीजों ने बताया कि शिकायत के लिए वे सेक्टर-48 हॉस्पिटल के प्रभारी डॉ. जी थामी से भी मिलने गए थे लेकिन उनके अवकाश पर होने की बात कहकर उन्हें लौटा दिया गया। इस घटना को लेकर हेल्थ सेक्रेटरी एके गुप्ता और सेक्टर-48 हॉस्पिटल के नोडल अधिकारी डॉ. जी थामी से कॉल और मैसेज के जरिए संपर्क करने का प्रयास किया गया लेकिन न तो उन्होंने कॉल रिसीव की न हीं मैसेज का जवाब दिया।
भर्ती हैं सेक्टर-48 में, इलाज हो रहा सेक्टर-32 में
बता दें कि सेक्टर-48 स्थित 100 बेड के अस्पताल में सितंबर से मरीजों को भर्ती किया जा रहा है। मौजूदा समय में वहां तीन डिपार्टमेंट के मरीजों को भर्ती किया जा रहा है। इनमें स्किन, रेडियोथैरेपी और साइकेट्री के मरीज शामिल हैं। इन विभागों के मरीजों का इलाज तो जीएमसीएच में ही चल रहा है जबकि उन्हें भर्ती सेक्टर-48 के हॉस्पिटल में किया गया है।
भर्ती मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि उन्हें जांच से लेकर दवा तक के लिए हर दिन सेक्टर-48 से सेक्टर-32 का चक्कर काटना पड़ रहा है। स्थिति यह है कि सेक्टर-48 में किसी मरीज की स्थिति बिगड़ने पर वहां उसे तत्काल इलाज नहीं मिल पाता, उसकी जिंदगी बचाने के लिए उसे जीएमसीएच लाना पड़ता है।
सेक्टर-48 हॉस्पिटल से संबंधित किसी भी मामले पर उनके नोडल अधिकारी डॉ. जी थामी ही जानकारी देंगे।
- अनिल मोदगिल, प्रशासनिक प्रवक्ता, जीएमसीएच-32