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शहर में चलने वाली 258 डीजल बसों को सीएनजी में बदलेगा परिवहन विभाग
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चंडीगढ़। यूटी प्रशासन के परिवहन विभाग ने शहर में चल रही 258 डीजल बसों को सीएनजी में बदलने की तैयारी शुरू कर दी है। पांच अगस्त से आवेदन की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। इन बसों के सीएनजी में बदलने के बाद शहर में सबसे ज्यादा बसें सीएनजी और इलेक्ट्रिक हो जाएंगी। विभाग का यह कदम शहर की हरियाली को बचाने के लिए है।
बढ़ता ट्रैफिक और उसकी वजह से हो रहा प्रदूषण, शहर की सबसे बड़ी चुनौती है। प्रशासन के अधिकारी भी इस समस्या की गंभीरता को समझते हैं। इसलिए ही जिन डीजल बसों की उम्र बाकी है, उन्हें सीएनजी में बदला जा रहा है। पहले फेज में 258 बसों को बदला जाएगा। इसमें सीटीयू की 88 डीजल बसें हैं, जिसमें 49 टाटा मिडी (9 मीटर) और 39 एचवीएसी स्टैंडर्ड कोरोना बस (12 मीटर) बसें हैं। इसके अलावा शहर में बसों को चलाने वाली सोसाइटी चंडीगढ़ सिटी बस सर्विसेज सोसाइटी (सीसीबीएसएस) की 9 मीटर वाली 170 बसें हैं। विभाग ने उन कंपनियों से आवेदन मांगा है, जो इन बसों में सीएनजी किट लगाने के लिए डिजाइन, मैन्युफैक्चर, सप्लाई, इंटीग्रेशन, कमीशनिंग, टेस्टिंग और गाड़ी की उम्र पूरी होने तक सीएनजी किट की देखभाल करते रहने का काम करेंगी। विभाग ने इसके लिए 30 लाख की ईएमडी तय की है। इच्छुक एजेंसियां पांच अगस्त को बोली लगाएंगी। सीटीयू विभाग में ये एक बड़ा कदम है, जिसे लेकर विभाग के अधिकारी भी काफी उत्साहित हैं।
अगले महीने तक शहर में हो जाएंगी 80 इलेक्ट्रिक बसें
शहर में चलाने के लिए विभाग अब इलेक्ट्रिक बसें ही खरीद रहा है। परिवहन विभाग और वॉल्वो-आयशर के बीच 40 बसों के लिए समझौता हुआ है। पहली बस चंडीगढ़ पहुंच चुकी है और अन्य सभी अगले माह तक चंडीगढ़ पहुंच जाएंगी जबकि शहर में पहले से ही 40 ई-बसें दौड़ रही हैं। उसके लिए अशोक लेलैंड से समझौता हुआ है। केंद्र ने इन 80 बसों के लिए प्रति बस 45 लाख रुपये सब्सिडी देने की घोषणा की है। एक बार चार्ज होने के बाद ये बसें करीब 140 किलोमीटर चलती हैं। सेक्टर-25 के डिपो नंबर-3 में चार्जिंग स्टेशन बनाया गया है। बसों में आग का पता लगाने और अलॉर्म सिस्टम (एफडीएसएस) भी लगाया गया है। बता दें कि वर्ष 2021 में केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने फास्टर एडॉप्शन एंड मैन्युफैक्चरिंग ऑफ हाइब्रिड एंड इलेक्ट्रिक व्हीकल यानी फेम इंडिया स्कीम फेस-दो के तहत ये सौगात दी थी।
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बढ़ता ट्रैफिक और उसकी वजह से हो रहा प्रदूषण, शहर की सबसे बड़ी चुनौती है। प्रशासन के अधिकारी भी इस समस्या की गंभीरता को समझते हैं। इसलिए ही जिन डीजल बसों की उम्र बाकी है, उन्हें सीएनजी में बदला जा रहा है। पहले फेज में 258 बसों को बदला जाएगा। इसमें सीटीयू की 88 डीजल बसें हैं, जिसमें 49 टाटा मिडी (9 मीटर) और 39 एचवीएसी स्टैंडर्ड कोरोना बस (12 मीटर) बसें हैं। इसके अलावा शहर में बसों को चलाने वाली सोसाइटी चंडीगढ़ सिटी बस सर्विसेज सोसाइटी (सीसीबीएसएस) की 9 मीटर वाली 170 बसें हैं। विभाग ने उन कंपनियों से आवेदन मांगा है, जो इन बसों में सीएनजी किट लगाने के लिए डिजाइन, मैन्युफैक्चर, सप्लाई, इंटीग्रेशन, कमीशनिंग, टेस्टिंग और गाड़ी की उम्र पूरी होने तक सीएनजी किट की देखभाल करते रहने का काम करेंगी। विभाग ने इसके लिए 30 लाख की ईएमडी तय की है। इच्छुक एजेंसियां पांच अगस्त को बोली लगाएंगी। सीटीयू विभाग में ये एक बड़ा कदम है, जिसे लेकर विभाग के अधिकारी भी काफी उत्साहित हैं।
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अगले महीने तक शहर में हो जाएंगी 80 इलेक्ट्रिक बसें
शहर में चलाने के लिए विभाग अब इलेक्ट्रिक बसें ही खरीद रहा है। परिवहन विभाग और वॉल्वो-आयशर के बीच 40 बसों के लिए समझौता हुआ है। पहली बस चंडीगढ़ पहुंच चुकी है और अन्य सभी अगले माह तक चंडीगढ़ पहुंच जाएंगी जबकि शहर में पहले से ही 40 ई-बसें दौड़ रही हैं। उसके लिए अशोक लेलैंड से समझौता हुआ है। केंद्र ने इन 80 बसों के लिए प्रति बस 45 लाख रुपये सब्सिडी देने की घोषणा की है। एक बार चार्ज होने के बाद ये बसें करीब 140 किलोमीटर चलती हैं। सेक्टर-25 के डिपो नंबर-3 में चार्जिंग स्टेशन बनाया गया है। बसों में आग का पता लगाने और अलॉर्म सिस्टम (एफडीएसएस) भी लगाया गया है। बता दें कि वर्ष 2021 में केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने फास्टर एडॉप्शन एंड मैन्युफैक्चरिंग ऑफ हाइब्रिड एंड इलेक्ट्रिक व्हीकल यानी फेम इंडिया स्कीम फेस-दो के तहत ये सौगात दी थी।
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